उन आँखों को रुलाया कैसे – कुमार विशाल

याद करो उन रातों को ,
उस मीठी मीठी बातों को ,
काश , हमे भी बता देते वो सब तुमने भुलाया कैसे
जिन आँखों मे बसते थे उसको तुमने रुलाया कैसे ।

क्या भूल गई तुम वादे सब,
क्यों बदली तूने इरादे अब ।
क्यों इश्क़ की तुमने बात कही,
क्यों अब तक मेरे साथ रही ।
मेरी होकर भी किसी और के साथ, अपने सपनों को सजाया कैसे,
जिन आँखों मे बसते थे उसको तुमने रुलाया कैसे

तूने मेरा भरोसा तोड़ा क्यों
और मुझसे मुँह तू मोड़ा क्यों
मुझे इतना बतादे ए हमदम,
अपनाकर तन्हा छोड़ा क्यों ।
गिरगिट से भी तेज मुझको तुमने रंग दिखाया कैसे,
जिन आँखों मे बसते थे उसको तुमने रुलाया कैसे ।

जलती है लौ एहसासों की,
तुझे मोल नही विश्वासों की ।
ये सफर भी कैसा दौर हुआ,
अब मेरी जगह कोई और हुआ ।
काश, हमको भी सिखला जाते ये सब तुमने भुलाया कैसे ,
जिन आँखों मे बसते थे उसको तुमने रुलाया कैसे ।।

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