उम्मीद है, औऱ हिम्मत – कुमार विशाल

क्यों तोड़े वो सपना हम, जिनको अभी सवारे नही है,
हौसला हैं उम्मीद हैं, और हिम्मत अभी हारे नही है ।

जब दाना लेकर के चींटी मंजिल की सीढ़ी चढ़ती है
देखा हमने कितनी बार वो गिरती और फिसलती हैं ।
कुछ कर जाने की नशा चढ़ी हैं उसको अभी उतारे नही है,
हौसला हैं उम्मीद हैं, और हिम्मत अभी भी हारे नही है

करेंगे अच्छे कर्म हे गुरुवर, जीवन की नईया पार करेंगे,
माँ-बाबुल ने जो देखा सपना, उसको ही साकार करेंगे ।
गुजरा है खुशियों का दिन, संघर्ष की रात गुजारे नही हैं,
हौसला हैं उम्मीद हैं, और हिम्मत अभी भी हारे नही है।

हे प्रियवर अब भोर हुई, नींदों से अपनी जागेंगे,
बिना समय व्यर्थ किये मंजिल के पीछे भागेंगे ।
कर मेहनत पाना है मंजिल, दुसरो के हम सहारे नही है,
हौसला हैं उम्मीद हैं, और हिम्मत अभी भी हारे नही है।

मिली कहि जो असफलता, खुशी-खुशी स्वीकार करूँगा,
मन लग्न से मेहनत कर, अपनी गलतियां सुधार करूँगा।
सब वक्त वक्त का खेल हैं, और ये तो वक्त हमारे नही है,
हौसला हैं उम्मीद हैं, और हिम्मत अभी भी हारे नही है।हौसला हैं उम्मीद हैं, और हिम्मत अभी भी हारे नही है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *