एडवेंचर ऑफ़ करुण नायर – रहस्य ब्लादिमीर का पार्ट 3

अध्याय – 3 खुनी की सच्चाई 


शाम का समय हो चूका था। बाहर गर्म गर्म हवाएं चल रही है। सूरज डूब चूका था जिसकी वजह से तापमान में कमी आ चुकी थी और माहौल हल्का शीतल हो चूका था। पक्षियों की आवाजे आना शुरू हो चुकी थी और करुण शिशोदिया के पूछे हुए सवाल से  विचार में था फिर सुजान की तरफ देखकर पूछता है 

तुम्हे क्या लगता है सुजान खुनी कौन हो सकता है? करुण ने मुस्कराते हुए सुजान से पूछा। 

मेरे हिसाब से रवि शुक्ला की पत्नी क्योंकि उसकी उसके पति से नहीं बनती थी साथ ही खून के समय सिर्फ वो ही थी जो बंगले के अंदर थी! सुजान ने जबाब दिया।

काफी अच्छा अनुमान था मेरे मित्र! करुण ने मुस्कराते हुए कहा। 

तो क्या खुनी सच में रुक्मणि शुक्ला है? इंस्पेक्टर ने चौंकते हुए पूछा। 

जी नहीं! क्योंकि सुजान का अनुमान सिर्फ घटनाओ का प्रतिनिधत्व करती है  लेकिन उसमे ना सिर्फ तार्किकता की कमी है बल्कि सबूतों का भी गहरा आभाव है! करुण ने मुस्कराते हुए जबाब दिया

तो फिर खुनी कौन है? सुजान और शिशोदिया दोनों ने ही  एकदम से पूछा

मै आपको खुनी से प्रत्यक्ष मिलाना ज्यादा जरुरी समझूंगा! इतना कहकर करुण दोनों को  कमरे से बाहर आने का इशारा करता है और फिर हॉल में जाता है जंहा पर सभी लोग खड़े होते है

तो मै सबको बताता हूँ की खुनी कौन है और वो खुनी कोई और नहीं बल्कि रवि शुक्ला के दोस्त तरुण सरद है! करुण ने तरुण की तरफ देखते हुए कहा

क्या बकवास कर रहे है मै आखिर कैसे अपने दोस्त का खून कर सकता हूँ? तरुण ने झल्लाते हुए कहा

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तुमने हमे बताया की तुम अपने दोस्त यानि की रवि शुक्ला के लिए गार्डन में साल्मन पिज़्ज़ा बना रहे थे लेकिन हमे नौकरानी ने बताया की रवि शुक्ला तो शाकाहारी थे फिर आप रवि शुक्ला के लिए मांसाहारी खाना क्यों बना रहे थे दरअसल तुमने हमसे झूठ बोला जिससे हमे ये पता ना चल सके की तुम समय बंगले में ही थे और तुमने ही जब देखा की सब व्यस्त है तब रवि शुक्ला का खून कर दिया! करुण इतना कहकर एक कुर्सी पर बैठ जाता है 

लेकिन मै अपने दोस्त का खून क्यों करूँगा भला? तरुण झल्लाते हुए कहता है

शायद रुक्मणि को पाने के लिये ? करुण इतना कहकर तरुण के सामने खड़ा हो जाता है 

तरुण और रुक्मणि दोनों के होश उड़ चुके थे 

अब सच बताओ! इंस्पेक्टर ने तरुण की देखते हुए गरज कर पूछा

जी आपने सही कहा मैने ही अपने दोस्त का खून किया है क्योंकि वो वैसे तो बहुत अच्छा था लेकिन रुक्मणि के साथ उसका व्यवहार किसी जानवर से कम नहीं था। रुक्मणि मुझे सब बताती थी और इसलिए मै उससे प्यार करने लगा था वो उस बेचारी पर बहुत अत्याचार करता था। आज जब मै रुक्मणि से मिलने गया तभी रवि वंहा पर आ गया और वह रुक्मणि पर गाली गलोच करने लगा इसलिए मैने उसका खून कर दिया! इतना कहकर तरुण घुटने के बल बैठकर रोने लगता है। 

करुण बस चुपचाप खड़ा हुआ था और आसपास देख रहा था मानो उसकी नजर कुछ ढूंढ रही हो उसे समझ नहीं आ रहा था की इस समान्य हत्याकांड में ब्लादिमीर की क्या साजिश थी तभी तरुण एकदम से गिर जाता है और उसके मुंह से झाग आने लगता है। सभी एकदम से घबरा जाते है। 

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करुण जल्दी से फोरेंसिक टीम को इशारा करता है और फॉरेंसिक टीम जल्दी से तरुण का चेकउप करने लगती है।

इसने साइनेड जहर खाकर आत्महत्या कर ली है! फोरेंसिक टीम के एक मेंबर ने जबाब दिया। 

क्या ऐसे कैसे हो सकता है? सभी एकदम से चौंक जाते है। 

करुण पुरे शरीर को बढ़ी ध्यान से देखता है फिर एकदम से मुड़कर कहता है। 

ये आत्महत्या नहीं हत्या ही है  किसी ने बढ़ी चालाकी से साइनेड बंदूक से इसके गले पर हमला किया है! करुण इतना कहकर फोरेंसिक टीम को तरुण के गले पर एक सुई चुभोने का निशान दिखाता है। 

साइनेड बंदूक? आखिर ये क्या होती है? सुजान ने चौंकते हुए पूछा। 

ये एक बंदूक है जिसमे से एक सुई निकलती है जिसमे साइनेड नाम का जहर होता है और जब इसे किसी पर मारा जाता है तो पांच से दस मिनट में उस आदमी की मौत हो जाती है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ये दीखता है की मरने वाले ने साइनेड नाम के जहर खाकर ख़ुदकुशी की है! करुण ने जबाब दिया। 

लेकिन इसका मतलब है की हम लोगो के यंहा आने से पहले ही किसी ने तरुण पर हमला कर दिया था! सुजान ने जबाब दिया। 

बिलकुल ठीक कहा! करुण इतना कहकर बाहर आ जाता है और उसी जगह पर जाता है जंहा पर तरुण साल्मन पिज़्ज़ा को देखता है फिर उस साल्मन पिज़्ज़ा के टुकड़े करता है तो उसमे एक चिठ्ठी निकलती है जिसे करुण अपनी जेब में रख लेता है। 

यंहा पर साल्मन पिज़्ज़ा रखा हुआ है और ये गर्म भी है तो फिर तरूण घर में कब था? सुजान ने पूछा। 

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तरुण को ये आईडिया किसी ने जरूर दिया है जिससे वो बच सके क्योंकि कोई भी ये नहीं सोच सकता है की आदमी एक ही समय पर दो जगह हो सकता है लेकिन खुनी जिसने तरुण की मदद की वो ये नहीं जानता था की रवि शाकाहारी है जिसकी वजह से तरुण फंस गया! करुण ने सोचते हुए जबाब दिया फिर उस घर के बाहर आ गया तभी इंस्पेक्टर शिशोदिया भागते हुए करुण के पास आये। 

क्या हुआ इंस्पेक्टर? करुण ने अजीब नजरो से शिशोदिया को देखते हुए पूछा। 

राजीव की तरफ से एक टेलीग्राम आया  है और उसमे पता चला है की उन्हें ब्लादिमीर का पता चल गया है और राजीव अपनी टीम के साथ उसे पकड़ने के लिए गए है!  इंस्पेक्टर ने जबाब दिया है। 

लेकिन वो गए कंहा पर है? सुजान ने एकदम से चौंकते हुए पूछा। 

गाजियाबाद! इंस्पेक्टर ने जबाब दिया। 

तो फिर हम लोगो को  भी वंही चलना चाहिए! इतना कहकर करुण जल्दी से एक जीप में बैठ जाता है और सुजान और शिशोदिया के साथ गाजियाबाद की तरफ निकल जाता है। 

दूसरी तरफ, 

राजीव और उसकी टीम गाजियाबाद की कैलाश कॉलोनी में जाते है जंहा पर एक टुटा हुआ मंदिर होता है। सभी चारो तरफ से घेर कर उस घर में घुसते है। लेकिन सिर्फ राजीव ही अपनी बंदूक लेकर मंदिर के अंदर जाता है। मंदिर की सभी मुर्तिया टूटी हुई थी। 

राजीव खंडित मूर्तियों को देख ही रहा था तभी उसे मंदिर सामने लगी मूर्ति जो दुर्गा माता की थी उसे कोई कंबल ओढे एक छेनी हथोड़ी से तोड़ते हुए दिखाई देता है। 

रुक जाओ ब्लादिमीर। अपने हाँथ ऊपर करके घुटनो पर बल बैठ जाओ! राजीव ने अपनी बंदूक तानते हुए कहा। 

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वो कंबल ओढे और खांसता हुआ राजीव की तरफ मुड़ता है तब तक राजीव की टीम भी मंदिर के भीतर प्रवेश कर जाती है। 

ब्लादिमीर अपना कंबल दूसरी तरफ फेंक देता है उसने एक धोती पहनी हुई थी और हांथो में बाजूबंद पहने हुए थे बालो को खोला हुआ था। कानो में कुंडल मानो पुराने राजाओ जैसा हो उसने अपने गले में नौ मोतियों की बढ़ी माला भी पहनी हुई थी।

ब्लादिमीर अपने आप को हमारे हवाले कर दो! राजीव ने गुस्से में कहा। 

मै ब्लादिमीर कलियुग का रावण और तुम मेरे सामने कुछ भी नहीं हो! ब्लादिमीर ने गरज कर कहा। 

रावण! राजीव ने मुंह बनाते हुए जबाब दिया मानो वो ब्लादिमीर को चिढ़ा रहा हो। 

तभी ब्लादिमीर हल्का से राजीव की तरफ देखता है तो ब्लादिमीर के नो सिर और निकल आते है मानो वह दस सिर वाला दशानंद रावण ही हो। ब्लादिमीर के नौ सिर और देखकर राजीव की टीम के रोंगटे खड़े हो जाते है और उनके हाँथ काँपने लगते है। 

राजीव एक घबहराट के साथ कहता है “ये कैसे हो सकता है?

तभी चारो तरफ धुंआ फैल जाता है और राजीव और उसकी टीम उस धुंए पर गोलिया चलाने लगती है लेकिन जैसे ही धुंआ हटता है सामने कोई भी नहीं होता है। 

सब अपनी आंखे मसल रहे होते है उन्होंने सक्षात चमत्कार देखा था किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था राजीव भी एक कोने में गिरे हुए पत्थर पर बैठ जाता है और ब्लादिमीर के दिखने वाले नौ सिरों के बारे में सोचने लगता है। 

तभी मंदिर  में करुण और सुजान प्रवेश करते है साथ में इंस्पेक्टर शिशोदिया भी थे

वो सभी को ऐसे चौंके हुए रूप में देखकर आश्चर्यचकित थे। 

क्या हुआ राजीव? करुण ने राजीव को असमंजस में बैठा देख पूछा। 

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डिटेक्टिव करुण नायर! राजीव ने अचानक ही करुण की तरफ देखते हुए उठते हुए कहा मानो करुण का आने का उसे पता ही नहीं चला। 

क्या हुआ? करुण ने अजीब नजरो से राजीव को चेहरे को देखते हुए पूछा। 

मिस्टर नायर! हम किसके खिलाफ लड़ रहे है जिसके दिव्य शक्तिया है! राजीव ने घबराते हुए जबाब दिया। 

दिव्य शक्तियों से जैसा कुछ भी नहीं होता है राजीव ये सब बस एक भरम होता है जिसे हम स्पष्ट तौर पर नहीं देख पाते है! करुण  ने राजीव के कंधे पर हाँथ रखते हुए कहा। 

नहीं मिस्टर नायर सिर्फ मैने ही नहीं मेरी पूरी टीम ने आज ब्लादिमीर के दस सिर देखे है रावण की भांति जो हम पर गरज रहा था। मुझपर  विश्वास कीजिये मिस्टर नायर कोई दिव्य शक्ति ही ब्लादिमीर की मदद कर रही है! राजीव ने घबराते हुए कहा। 

करुण ये सुनकर मुस्करा जाता है और वह हलकी मुस्कराहट के साथ कहता है आप धैर्य रखिये राजीव वो सिर्फ एक छलावा था जो अपने देखा वो सच होकर भी सच नहीं था! करुण ने जबाब दिया। 

मतलब?  क्या आप ये बात साबित कर सकते है की ये दस सिर का दिखना एक छलावा था? राजीव के साथ उसकी  टीम भी कहती है। 

बिलकुल साबित कर सकता हूँ लेकिन फ़िलहाल अभी नहीं! करुण एक चिठ्ठी निकालते हुए कहता है। 

ये क्या है? सभी ने एक साथ पूछा। 

एक संकेत जिससे हमे पता चलेगा की अगला खून ब्लादिमीर किसका करने वाला है! इतना कहकर करुण चिठ्ठी सुजान को पढ़ने के लिए दे देता है। 

“मेरी दोनों बच्चियों को सांप का जहर चढ़ गया है क्या आप उतार सकते है? अगर हाँ तो कृपया मेरे होटल में आये जिसका  पता है साकेत दिल्ली डी मॉल वाली कॉलोनी”

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लगता है इस बार दो बच्चियों का खून हुआ है! सुजान ने उदास होते हुए कहा। 

वो तो वंही जाकर पता चलेगा! राजीव आप अपनी टीम के साथ इस इलाके की नेकबन्दी कीजिये और पता कीजिये की ब्लादिमीर यंहा से कँहा गया और सुजान और इंस्पेक्टर शिशोदिया आप मेरे साथ साकेत चलिए! इतना कहकर करुण मंदिर से बाहर आ जाता है। 

सभी जीप में बैठकर साकेत के डी मॉल के पास होटल में जाते है जंहा पर लोकल पुलिस पहले से ही मौजूद थी इंस्पेक्टर शिशोदिया को देखते ही सभी हवलदार उसे सलूट करते है। करुण और सुजान होटल के अंदर जाते है तो वंहा पर एक लड़की गिरी होती है जिसपर सफ़ेद कपडा डाला होता है और दूसरी तरफ एक लड़की कुर्सी पर बैठी होती है उसके सामने एक टेबल रखी हुई थी जिसपर तीन गिलास खाली और एक गिलास भरा हुआ था और उसी टेबल पर दूसरी तरफ एक खाली गिलास रखा हुआ था। भरे हुए गिलासों में शरबत था। 

करुण जब दूसरी तरफ देखता है तो पुलिस ने होटल के स्टाफ को एक तरफ खड़ा करके पूछताछ कर रहे थे।

करुण चुपचाप उस लड़की की तरफ बढ़ जाता है। 

आप जरूर इस बहन होगी? करुण ने उस लड़की को देखते हुए कहा। 

जी हाँ! उस लड़की ने जबाब दिया। 

क्या आप बता सकती है की आपकी बहन की हत्या कैसे हुई? करुण भी एक कुर्सी पर बैठ जाता है जो की उस लकड़ी के सामने खाली पड़ी थी। 

दरअसल मुझे बहुत ज्यादा प्यास लगी हुई थी और भूख भी इसलिए मैने अपनी बहन से जिद की वो इस होटल में मुझे ठंडा शरबत पिलाये! उस लड़की ने इतना कहते ही रोना शुरू  कर दिया। 

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कृपया मुझे पूरी बात बताइये क्योंकि आपकी बताई हुई बातो से ही मै आपकी बहन के खुनी को पकड़ सकता हूँ! करुण ने हल्का सा जोर देते हुए कहा। 

जी उसके बाद हम दोनों इस होटल में आये और हमने शरबत मंगवाया तभी एक वेटर कुछ शरबत के गिलास थाली में सजा कर हमारे सामने खड़ा हो गया। मेरी बहन ने एक गिलास शरबत लेकर पीने लगी और मैने भी जल्दी से तीन गिलास शरबत पि लिए क्योंकि मुझे बहुत ज्यादा प्यास लगी हुई थी फिर एक गिलास मैने और ले लिया। वेटर तब तक दूसरा आर्डर लेने जा चूका था मेने जैसे ही अपना चौथा गिलास पीने वाली थी तभी मेरी बहन चक्कर खाकर गिर चुकी थी! वो लड़की इतना कहकर रोने लगी। 

करुण ने भी उस लड़की को ज्यादा परेशान करना सही नहीं समझा इसलिए वो  एक पुलिस वाले के पास जाता है। 

क्या आपको वो वेटर मिला जिसने इनको गिलास दिए थे? करुण ने बढ़ी अदब से पुलिस वाले से पूछा। 

जी नहीं दरअसल वो भाग गया है लेकिन हम उसे जल्दी ही पकड़ लेंगे हमने अपनी पुलिस की एक टीम इस इलाके में फैला दी है मिस्टर नायर! उस पुलिस वाले ने जबाब दिया। 

फोरेंसिक टीम क्या कहती है? मेरा मतलब है की खून कैसे हुआ? करुण ने एक फोरेंसिक टीम मेंबर की तरफ देखते हुए पूछा। 

मौत जहर देने से हुई है मिस्टर नायर लेकिन एक चौकाने वाली चीज़ है! फोरेंसिक मेंबर ने असमंजस में धीरे स्वर में कहा। 

क्या? करुण ने एक अजीब नजरो से देखते हुए पूछा और सभी का ध्यान उसी तरफ हो गया था। 

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खून जहर देने  से हुआ है जो की सभी गिलासों में था मतलब जो इन मोहतरमा ने पिया उस शरबत में भी जहर था और इनकी बहन ने जिस गिलास में शरबत पिया उसमे भी जहर पाया गया है लेकिन अजीब बात है की इनकी बहन की मौत एक गिलास शरबत पीने की वजह से हो गई लेकिन इन मोहतरमा ने तीन गिलास  जहर के शरबत पी लिए फिर भी ये जिन्दा है! उस फोरंसिक मेंबर ने चौंकते हुए उस लड़की की तरफ देखा। 

क्या? सभी एकदम से चौंक जाते है सिवाए करुण के। 

नोट – अगला अध्याय आप इंडियन पेपर इंक ईबुक स्टोर पर पढ़ सकते है अगला अध्याय इबुक स्टोर से 5 तारीख को अपलोड होगा

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