एडवेंचर ऑफ़ करुण नायर – रहस्य ब्लादिमीर का पार्ट 4

 अध्याय – 4 जहर का रहस्य 


शाम हो चुकी थी, सभी फोरेंसिक टीम जहर का परीक्षण करने में व्यस्त थी। सभी हवलदार लोगो को होटल से दूर रखने की कोशिश कर रहे थे। वंही दूसरी तरफ होटल के मेनेजर से करुण और सुजान उस वेटर के बारे में पूछताछ कर रहे थे। इंस्पेक्टर अब भी उस लड़की को देख कर हैरान था जिसने तीन गिलास जहर के पिए और फिर भी वह जिन्दा थी। 

जो हमे चमत्कार दीखता है दरअसल वो सिर्फ एक भर्म होता है! करुण ने मुस्कराते हुए इंस्पेक्टर से कहा। 

लेकिन ऐसे भर्म को आप क्या कहेंगे जो किसी चमत्कार से कम नहीं है! इंपेक्टर ने जबाब दिया। 

आँखों का धोखा! करुण इतना कहकर उस लड़की को अजीब नजरो से देखता है। 

तो क्या आप इस भर्म की सच्चाई बता सकते है! इंस्पेक्टर ने चौंकते हुए कहा। 

 जी जरूर! करुण इतना कहकर वापस उन जहर वाले गिलास को देखता है। 

तो हमे बताइये मिस्टर नायर? की ये चमत्कार कैसे हुआ? इंस्पेक्टर ने जबाब दिया। 

ये सवाल सुनकर सभी लोग करुण की तरफ देखने लगते है। मानो सभी लोग बेसब्री से इसी पल का इंतज़ार कर रहे हो। 

इस लड़की की जान बच पाना एक इत्तिफ़ाक़ ही था  क्योंकि जहर सभी गिलासों में था जिससे ये साबित हो जाता है की खुनी इन दोनों लड़कियों को मारना चाहता था लेकिन इसके पीछे की वजह एक रहस्य मेरे मन में  था जिसका पर्दाफाश भी तब हुआ जब मेरी बात इस लड़की के पिता से हुई जिनसे कुछ गिरोह के लोगो ने कुछ दिन पहले ही पैसो की मांग की थी और पैसे ना मिलने की वजह से इनकी दोनों बेटियों को भी जान से मारने की धमकी दी गई थी।

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अब मै आप लोगो को मुख्य रहस्य की तरफ  जाता हूँ दोनों लड़किया जब आई तब उनमे से एक लड़की ज्यादा प्यासी थी और दूसरी नहीं इसलिए एक ने जल्दी से तीन गिलास पिए और दूसरी ने सिर्फ एक ही गिलास पिया फिर भी एक गिलास पीने वाली लड़की की मौत कैसे हुई? 

खैर दरअसल जहर शर्बत में था ही नहीं बल्कि उसमे डाली गई  बर्फ में जहर मिलाया गया था। जिस लड़की ने जल्दी जल्दी गिलास के शर्बत पिए उसके गिलास में बर्फ जल्दी घुल नहीं पाई जिसकी वजह से उसपर जहर का कोई असर भी नहीं हो पाया लेकिन जिस लड़की ने शर्बत बड़े आराम से पिया उसके शर्बत में तब तक बर्फ घुल चुकी थी इसलिए उसकी मौत हो गई! इतना कहकर करुण एक  गिलास उठा लेता है। 

लेकिन आपको कैसे पता चला मिस्टर नायर की जहर बर्फ में था? बल्कि गिलास में नहीं या शर्बत में नहीं? फोरेंसिक टीम ने सोचते हुए पूछा। 

क्योंकि जब मेने उन तीन गिलासों को देखा तो उसमे अब भी बर्फ का पानी बचा हुआ था जबकि सिर्फ दूसरे गिलास में शर्बत बचा हुआ है जिसमे बर्फ घुल चुकी है! करुण ने जबाब दिया। 

अद्भुत मिस्टर नायर! आप सच में काफी प्रतिभाशाली और रोमांचकारी व्यक्ति है! इंस्पेक्टर शिशोदिया ने  जबाब दिया। 

धन्यवाद! करुण इतना कहकर होटल की रसोई की तरफ चला जाता है। 

जंहा पर उस प्लेट में जिसमे गिलास लाये गए हुए थे वंहा पर एक कागज रखा हुआ जिसे करुण चुपचाप उठा लेता है और आराम से बिना किसी को कुछ कहे बाहर आ जाता है। करुण बाहर आकर एक हवलदार को पास आने का इशारा करता है तभी एक हवलदार करुण की तरफ आता है। 

जी मिस्टर नायर! हवलदार ने अदब से कहा। 

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मेरी एक चिठ्ठी आप पहुंचा देंगे? करुण ने बड़ी  तहजीब के साथ पूछा। 

जी जरूर! हवलदार ने जबाब दिया। 

करुण एक चिठ्ठी हवलदार को दे देता है और खुद सुजान की तरफ बढ़ जाता है। 

क्या तुम्हे कोई सुराग मिला की अगला खून किसका होने वाला है? सुजान ने पूछा। 

मुझे एक चिठ्ठी प्राप्त हुई है! करुण ने चिठ्ठी को निकालते हुए कहा। तब तक इंस्पेक्टर भी करुण के नजदीक आ चुके थे। 

सुजान बस चुपचाप उस चिठ्ठी को देखता है। 

इसमें तो कुछ भी नहीं लिखा हुआ है? सुजान ने चौंकते हुए कहा। 

इसको पढ़ने के लिए तुम्हे इस कागज को रौशनी में रखना होता है! क्योंकि इसपर खास स्याही का इस्तेमाल किया गया है! करुण ने इतना कहकर उस कागज को एक मोमबत्ती की तरफ किया। सुजान को अब सभी शब्द प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगे थे इसलिए वह धीरे स्वर में बोलने लगता है। 

“बुराई का अजन्मा, अजर, अमर रूप हूँ मै 

मुझे बस काल विकराल का दामन कहदो 

शैतान, राक्षस, दानव और दुसरो नामो से ना पुकारो 

मुझे तो बस अब तुम लंकापति रावण कहदो 

सिर उठाकर कर रहा इंतज़ार तुम्हारा

इस खेल का मुझे साजन कहदो 

राख का महल बना दिया मेने 

नरक की कब्रों को तुम पवित्र पावन कहदो”

इसका क्या मतलब हुआ? सुजान ने चौंकते हुए पूछा। 

कुछ नहीं! करुण इतना कहकर वंहा से बाहर निकल जाता है। 

लेकिन इंस्पेक्टर और शिशोदिया जल्दी से करुण को रुकने के लिए कहते है। 

क्या तुम दुबारा से उससे लड़ने के लिए अकेले जा रहे हो? सुजान ने करुण की तरफ देखते हुए कहा। 

यही समझ लो! करुण इतना कहकर एक तांगे वाले को रुकने का इशारा करता है। 

लेकिन? इंस्पेक्टर इतना कहकर रुक जाता है। 

वो नहीं रुकेगा! सुजान इतना कहकर करुण को जाते हुए देखता रहता है। 

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दूसरी तरफ करुण तांगे को लेकर फ्री स्टाइल लड़ाई करने वाली जगह जाता है जो की एक फैक्टरी से नीचे गोदाम में थी वंहा पर अधिकतर वो ही लोग आते थे जो की करुण को मारना चाहते थे लेकिन करुण आज तक किसी से भी नहीं हारा था। 

करुण जैसे ही उस गोदाम में प्रवेश करता है उसे देखकर बोली लगाने वाला खुश हो जाता है। उसकी कमर झुकी हुई थी और मुंह में पान दबाया हुआ था। 

आइये करुण बाबू! उस झुके  हुए आदमी ने कहा। 

स्कोर क्या चल रहा है? करुण ने अपना कोट उतारते हुए कहा। 

फ़िलहाल तो कोई भी नहीं है अभी तो शुरू ही हुआ है! उस आदमी ने जबाब दिया। 

तो बोली लगवाओ मुझे हारने वाले के लिए! इतना कहकर करुण रिंग के अंदर चला जाता है जिसमे जाने का सिर्फ एक छोटा सा दरवाजा था बाकी जाल से चारो तरफ से बंद था। 

तो कोई है जो प्रसिद्ध करुण नायर से लड़ना चाहते हो? मिस्टर नायर को हराने वाले को 1 लाख रूपये दिए जाएंगे! इतना कहकर वो आदमी नोटों का एक सूटकेस सभी को दिखाता है। 

मै तैयार हूँ! एक काले चोगा पहने हुए एक व्यक्ति ने कहा। 

वाह महाशय! तो आपका नाम क्या है? उस आदमी ने उस काले चोगे वाले से पूछा। 

ब्लादिमीर! इतना कहकर ब्लादिमीर अपना काला चोगा उतार कर रिंग में चला जाता है। 

तो दोस्तों बोली लगाइये ब्लादिमीर और करुण पर! वो आदमी ऊँची ऊँची आवाज में चिल्लाकर कह रहा था। 

सभी लोग चीखने और चिल्लाने लगते है लेकिन सभी करुण को अच्छी तरह से जानते थे की वो आज तक कभी भी नहीं हारा था इसलिए लोग करुण पर बढ़चढ़के बोली लगाते है। 

आपको मुझसे आमने सामने लड़ना था ना मिस्टर नायर? लीजिये मै हाज़िर हूँ! ब्लादिमीर ने मुस्कराते हुए कहा। 

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छलावे के पीछे छुप कर तुम कब तक दुनिया से बचोगे? इतिहास अपने आपको हमेसा दुबारा जरूर दोहराता है पहला दुर्घटना के रूप में और दूसरा तामाशे के रूप में! करुण इतना कहकर अपनी लड़ाई की मुद्रा ले लेता है। 

ब्लादिमीर अपने हांथो को ऊपर करते हुए इतनी तेज़ी से मुक्को का हमला करता है की करुण को सम्भलने का मौका ही नहीं मिलता और करुण दूर जाकर दूसरी तरफ गिर जाता है लेकिन ब्लादिमीर एक लात मारता है जिससे करुण हवा में उछाल मारता हुआ जाली से जाकर टकरा जाता है। 

उठो मिस्टर नायर! ब्लादिमीर ने अपने हांथो से करुण को उठने का इशारा किया। 

करुण चुपचाप अपने आप को साफ़ करते हुए खड़ा हो जाता है। वापस लड़ने की मुद्रा बना लेता है। 

ब्लादिमीर वापस अपने मुक्को की बौछार करने की कोशिश करता है लेकिन करुण उसका पहला वार ही पकड़ लेता है और फिर दूसरा मुक्का ब्लादिमीर के पेट में मारता है और फिर घुमा कर एक ही लात में ब्लादिमीर को धराशायी कर देता है। 

करुण जैसे ही आगे बढ़ता है तभी ब्लादिमीर अपनों हांथो को करुण के चेहरे के सामने मारता है जिसकी वजह से एक धूल जैसी परत करुण के चेहरे पर पड़ती है। 

करुण एकदम से पीछे हट जाता है लेकिन अचानक ही उसे अजीब सा महसूस होता है तभी वो घुटनो पर गिर जाता है और करुण जैसे ही पीछे की तरफ देखता है तो वो एकदम से चौंक जाता है क्योंकि करुण अपने शरीर को घुटनो के बल गिरा देख सकता था। 

ये कैसे हो सकता है की मेरी आत्मा मेरे शरीर से अलग है? करुण ने अपने शरीर को देखते हुए कहा। 

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फिर अचानक ही करुण ऐसा लगता है जैसे वो हवा के साथ बह गया हो और एक बर्फीली जगह पर एक विशाल घर में एक लड़की जो की बिस्तर पर मूक चुपचाप लेटी हुई थी। जैसे ही करुण उस लड़की को छूने की कोशिश करता है तभी उसकी चीख के साथ उसकी आंख खुलती है तो वह घुटनो के बल गिरा हुआ था। 

चारो तरफ लोग शांत खड़े थे और ब्लादिमीर जा चूका था। करुण अपना सिर पकड़ते हुए खड़ा हो जाता है और अपना लम्बा कोट पहनकर वंहा से बाहर आ जाता है। 

करुण का पूरा शरीर ठंडा हो चूका था और वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था इसलिए वह एक फुटपाथ पर ही सो जाता है। 

अगले दिन, 

सुबह का समय, जून की गर्मी और गर्म चल रही हवाएं मौसम को सुनहरा रंग दे रही थी। पक्षियों की कोलाहल चल रही है। सुजान कमरे में ठीक से सो नहीं पाया क्योंकि वह करुण के लिए काफी बेचैन था। सुबह के 8 बज चुके थे और सुजान ने खुद ठान लिया था की वह खुद ही करुण की खोज में निकलेगा लेकिन तभी दरवाजे पर किसी की दस्तक होती है। 

सुजान जल्दी से कमरे का दरवाजा खोलता है तो धूल से लिपटा हुआ करुण कमरे में प्रवेश करता है। वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था इसलिए वह जल्दी से सोफे पर गिर जाता है और सुजान उसके जूते और कोट को जल्दी से उतार देता है और पानी का ठंडा गिलास पिने के लिए देता है। 

क्या तुम ठीक हो? सुजान ने चौंकते हुए पूछा। 

मै बिलकुल ठीक हूँ मेरे दोस्त बस थक गया हूँ क्या तुम सीताबाई को खाना दे जाने  के लिए आवाज दे सकते हो? करुण ने अपने आप को सोफे पर निढाल करते हुए कहा। 

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कुछ देर बाद सुजान और करुण नाश्ता करते है ऐसे मै सुजान कल रात के बारे में पूछने के लिए काफी उत्सुक था। 

तुम्हे अपनी बेचैनी और छुपाने की  कोई जरूरत नहीं है सुजान। तुम जो चाहो पूछ सकते हो! करुण ने खाना खत्म करते हुए कहा। 

कल रात क्या हुआ? सुजान ने उत्सुकतावश पूछा। 

करुण कल रात का विस्तृत वर्णन करता है। की कैसे वो ब्लादिमीर से मिला और कैसे ब्लादिमीर उसके हांथो से बच निकला। 

लेकिन तुम्हे लड़ाई के बीचो बीच हो क्या गया था? क्या सच में ब्लादिमीर के पास कुछ दिव्य शक्तिया है? सुजान ने चौंकते हुए पूछा। 

दिव्य शक्तिया?  इतना कहकर करुण हॅसने लगता है। 

क्या इसके पीछे भी कोई छलावा था? सुजान ने चौंकते हुए पूछा। 

बिलकुल कह सकते हो। दरअसल लड़ाई के समय ब्लादिमीर ने मेरे चेहरे के पास एक ड्रगस को धूल में मिलाकर उड़ाया था जिसका नाम है साल्विया। ये एक पौधा है जिससे एक नशीला पदार्थ बनाया जाता है जो की किसी को भी ऐसा भर्म पैदा कर देता है की उसकी आत्मा उसके शरीर से बाहर आ गई हो और फिर उसकी आत्मा जंहा जाना चाहे जा सकती है लेकिन इस नशीले पदार्थ का असर सिर्फ पन्द्रह से बीस मिनट तक ही रहता है! करुण इतना कहकर आज की तारीख का अख़बार उठा लेता है। 

तभी दरवाजे पर इंपेक्टर शिशोदिया दस्तक देते है। 

सुप्रभात मिस्टर नायर और मिस्टर चटर्जी! इंस्पेक्टर ने अदब के साथ कहा। 

जी आइये मिस्टर शिशोदिया! करुण ने एक कुर्सी इंस्पेक्टर की तरफ सरकाते हुए कहा। 

धन्यवाद! इंस्पेक्टर ने जबाब दिया। 

आप इतनी सुबह आये है तो जरूर कोई खास बात होगी! करुण ने जबाब दिया 

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जी दरअसल वो वेटर जिसने वो शरबत के गिलास दिए थे उसकी लाश एक यमुना नदी में मिली है उसकी जेब में एक चिठ्ठी भी थी! इंस्पेक्टर ने चिठ्ठी को निकालते हुए कहा। 

“पिंजरे से एक नन्ही चिड़िया कैद से आजाद कर दी है”

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