एडवेंचर ऑफ़ करुण नायर – रहस्य ब्लादिमीर का पार्ट 5

अध्याय – 5 गुमशुदा लड़की 


सुबह का समय, करुण और  सुजान एक तांगे में बैठे हुए है। सुबह की धुप अब वातावरण को तपा रही थी। तांगा अपनी रफ्तार से चला जा रहा था। लाल किले के सामने से होते हुए दरियागंज की तरफ बढ़ रहा था। 

इस चिट्ठी का क्या मतलब हो सकता है? सुजान ने एक अजीब नजरो से देखते हुए पूछा। 

कुछ कह नहीं सकते है! इसके कई मतलब हो सकते है! करुण इतना कहकर आसपास देखने लगता है। 

तभी करुण को महसूस होता है की एक मोटर तेज़ी से तांगे की तरफ बढ़ रही है इसलिए जल्दी से करुण सुजान को तांगे से धक्का देता है और तांगा चालक को लेकर नीचे कूद जाता है और मोटर तांगे को तोड़ते हुए निकल जाती है। 

तांगे वाला जल्दी से अपने तांगे की तरफ भागता है और रोने लगता है जिससे देखकर करुण चुपचाप कुछ पैसे निकालता है जिससे वह  अपने तांगे को ठीक कर सके। 

करुण पैसे देकर तुरंत ही सुजान के साथ दरियागंज की एक गली की तरफ निकल जाता है। 

ये लोग कौन थे और ये हमे मारना क्यों चाहते है? सुजान ने चौंकते हुए पूछा। 

ब्लादिमीर के लोग है और ये जरूर हमारा पीछा कर रहे होंगे इसलिए हमे जल्दी ही कमला मार्किट ठाणे की तरफ जाना होगा! इतना कहकर करुण सुजान को दूसरी गली में ले जाता है। 

तभी सामने कुछ लंगोटी बांधे पहलवान दिखाई पड़ते है जो की करुण और सुजान की तरफ बढ़ रहे थे। 

अब हम क्या करे? सुजान ने धीमे स्वर में कहा। 

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तुम मुझसे दूसरी दिशा में भागना और कोशिश करना की जितनी जल्दी हो सके तुम कमला मार्किट थाने पहुँच जाओ! इतना कहकर करुण की पीछे की तरफ भागता है और करुण को भागता देखकर सुजान भी भाग लेता है दोनों जैसे ही मुख्य सड़क पर पहुँचते है तभी सुजान दरीबाकलां की तरफ भाग जाता है और करुण नई सड़क की तरफ भागता है। 

एक पहलवान सुजान की तरफ भागता है बाकी सभी करुण की तरफ भागते है। करुण को एक घर दिखाई देता है जिससे वो उस घर के अंदर भाग जाता है रो सीढिया चढ़कर ऊपर छत पर जाता है। 

सुजान भी भागते हुए एक छोटी गली में भाग जाता है। तभी सुजान को एक डंडा दिखाई देता है इसलिए वह जल्दी से एक कूचे में घुसकर वंहा छुपकर बैठ जाता है और जैसे ही वो पहलवान कूचे में झांकता है तभी सुजान एक जोरदार प्रहार करता है जिससे वो पहलवान वंही गिर जाता है लेकिन सुजान डंडे को घुमाकर उस पहलवान के पैरो में मारता है और फिर भागते हुए वापस मुख्य गली में आ  जाता है और जल्दी से एक चलते हुए तांगे में बैठ जाता है। 

कमला मार्किट ठाणे की तरफ ले लो! सुजान ने अपना पसीना पोंछते हुए कहा। 

तांगे वाला भी चुपचाप उसी तरफ ले लेता है। 

दूसरी तरफ, 

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करुण लगातार छतो को कूदते हुए निकल रहा है और कुछ पहलवान नीचे गली में पीछा कर रहे है और कुछ छत पर उसका पीछा कर रहे है। तभी करुण की नजर एक कपडे पर जाती है जिसपर मिर्च सुख रही होती है करुण तुरंत उसके कपडे को उलटी तरफ से पकड़कर उन पहलवानो के ऊपर फेंक देता है जो की उनकी आँखों में चली जाती है और वो दर्द से कराहते हुए रुक जाते है और करुण एक छत से नीचे कूद जाता है और जंहा पर एक पेड़ था। 

इसलिए करुण उसी पेड़ के सहारे नीचे उत्तर जाता है और जल्दी से भागता है लेकिन तभी उसे पहलवान दिखाई देते है इसलिए वह एक मंदिर में भागकर जाता है और मंदिर की मूर्ति में लगा हनुमान जी का गदा उठा लेता है और फिर करुण उसे गदे से पहलवानो पर प्रहार करता है। 

मंदिर में तोड़फोड़ देखकर मंदिर का पुजारी पुलिस को बुला लेता है और पुलिस हवलदार करुण और उन सभी पहलवानो को तिहाड़ जेल ले जाते है। लेकिन तिहाड़ अधीक्षक करुण को एक खाली जगह पर बैठा देते है जिसके चारो तरफ जाल लगा होता है। 

जाल के चारो तरफ कैदी करुण को देखकर जाल को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। मानो वह सभी करुण को मारना ही चाहते हो लेकिन करुण सबको नजरअंदाज करते हुए चुपचाप बैठा रहता है। 

तभी उस जाल में इंस्पेक्टर शिशोदिया प्रवेश करते है। 

लगता है आपके यंहा काफी प्रंशसक है मिस्टर नायर? सुरेश शिशोदिया ने मुस्कराते हुए पूछा। 

हाँ यंहा ज्यादातर कैदी मेरी वजह से पकडे गए है इसलिए भड़के हुए है! करुण ने एक तीखी नजर से केदियो की तरफ देखते हुए कहा। 

चलिए मिस्टर नायर! इतना कहकर शिशोदिया करुण को उस जाल से बाहर ले जाता है। 

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जैसे ही करुण मुख्य कक्ष में आता  है तो वंहा सुजान भी मौजूद होता है 

कैसे हो मेरे मित्र? करुण ने सुजान से हाँथ मिलाते हुए कहा। 

मेरे कमला मार्किट ठाणे पहुँचते ही एक आदमी उस थाने में प्रवेश करता है जिसकी पत्नी दो दिन से लापता है और उसे हाँथ में एक चिठ्ठी थी जिसपर लिखा था 

“पिंजरे से एक नन्ही चिड़िया कैद से आजाद कर दी है”

इतना कहकर सुजान भी खड़ा हो जाता है। 

करुण एक अजीब नजर से सुजान और इंस्पेक्टर शिशोदिया को देखता है फिर चुपचाप बाहर उनके साथ जीप में बैठकर थाने में पहुँचता है। जंहा पर अब भी वो आदमी बैठकर रो रहा था। 

अमित सक्सेना जी मिलये ये है डिटेक्टिव करुण नायर! इंस्पेक्टर शिशोदिया ने उस रोते हुए आदमी का करुण के साथ परिचय करवाया। 

जी इन्हे कौन नहीं जानता ये तो मशहूर और चमत्कारी करुण नायर है! अमित ने खड़े होते हुए कहा। 

मुझे  लगता है की शायद आप फिर मुझे सही से समझ नहीं पाए महाशय क्योंकि मेरी बाते किसी को तब तक चमत्कारी और असाधारण लगती है। जब तक मै उन बातो के पीछे छुपा हुआ तर्क नहीं बता देता वरना मै भी एक साधारण व्यक्ति की तरह ही हूँ! करुण इतना कहकर सभी के साथ कुर्सी पर बैठ जाता है। 

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मिस्टर नायर, मै आपको अब पूरी बात बताता हूँ दरअसल मै और मेरी पत्नी सालगिरह मानने के लिए शिमला गए हुए थे। हम दोनों ने पहले ही रेलगाड़ी की बुकिंग करवा ली थी क्योंकि हम सिर्फ तीन दिन के लिए ही रुकने वाले थे खैर हमारा वंहा पर भी एक घर है इसलिए हम किसी होटल में नहीं रुके। हम दोनों ने दो दिन खूब मस्ती की जिस दिन हमारी वापसी थी उस दिन मै किसी काम से बाजार जाना पड़ा लेकिन जब मै वापस आया तब मुझे पता चला की मेरी पत्नी को किसी ने अगवा किया है मैने चारो तरफ देखा तो मेज पर मुझे चिठ्ठी प्राप्त हुई जिसपर लिखा था 

“पिंजरे से एक नन्ही चिड़िया कैद से आजाद कर दी है”

मुझे शुरुआत में तो इन बातो का कोई मतलब ही नहीं पता चला लेकिन मेने तुरंत ही शिमला के थाने में शिकायत दर्ज करवा दी और फिर काफी देर तक उस अगवा करने वाले की किसी तरह की चिठ्ठी का इंतज़ार करने लगा। जब मेरी शाम की ट्रैन का समय हुआ तो मै वापस दिल्ली आया आपसे मिलने के लिए क्योंकि सिर्फ आप ही है मिस्टर नायर जो मेरी मदद कर सकते है! इतना कहकर अमित रोने लगता है। 

आप धैर्य रखिये हम आपकी पत्नी को जरूर ढूंढ लेंगे! 

क्या आप मेरे साथ उसे ढूंढने शिमला चलेंगे? अमित ने उदास होते हुए पूछा

जी नहीं क्योंकि आपकी पत्नी हो ना हो दिल्ली में ही है इसलिए आप चिंता मत कीजिये जैसे ही हमे उनके बारे में पता चलेगा हम जरूर आपको यंहा बुला लेंगे! इतना कहकर करुण सुजान के साथ थाने से बाहर चला जाता  है

तो हम उसे ढूंढेगे कैसे? ये ब्लादिमीर का काम  है तो ये तो नामुमकिन होगा? सुजान ने सोचते हुए कहा

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सोचने वाली बात ये है  की ब्लादमीर एक औरत की हत्या शिमला में क्यों  करवाएगा? या फिर अगवा क्यों करवाएगा? करुण इतना कहकर एक तांगे वाले को रुकने इशारा करता है

एक तांगा रुक जाता है और करुण उसे रेलवे स्टेशन चलने को कहता है। रेलवे स्टेशन पहुंचकर करुण उस दिन की सभी बुकिंग दुबारा से देखता है और फिर एकदम से मुस्करा जाता है। 

सुजान तुम घर जाओ और रोनित को बोलो की वो यमुना के आसपास के इलाको में छानबीन करे! इतना कहकर करुण वापस रेलवे स्टेशन के अंदर चला जाता है। 

लेकिन तुम कँहा पर जा रहे हो? सुजान चौंकते हुए पूछता है 

शिमला! इतना कहकर करुण चला जाता है 

कुछ देर बाद, 

करुण एक शिमला जाने वाली ट्रैन में चढ़ जाता है और अगले दिन शिमला के रेलवे स्टेशन भी पहुँच जाता है।

वंहा से अमित के घर की तरफ रवाना हो जाता है जो की काफी खूबसूरत जगह पर बनाया होता है। 

करुण चारो तरफ देखता है की पेड़ो पर फूलो की कलियारी खिली होती है। सूरज की हलकी रौशनी पड़ रही होती है। एक छोटा सा घर जिसमे कम से कम दो कमरे होंगे। करुण चारो तरफ उस घर को देखता है जिसके पास में ही एक तालाब होता है जिसपर बर्फ जमी हुई होती है। 

करुण कमरे में जाता है और हर चीज़ को बढ़ी ध्यान से देखता है।

सभी चीज़ो को ध्यान से देखते हुए दोपहर में उससे ट्रैन से वापस दिल्ली आ जाता है। 

अगले दिन, 

करुण चुपचाप कमला मार्किट थाने में बैठा होता है और साथ की कुर्सी पर ही सुजान भी बैठा होता है टेबल के दूसरी तरफ इंस्पेक्टर शिशोदिया अपना डंडा लिए बैठे होते है। तभी थाने में अमित प्रवेश करता है। 

आइये अमित बैठ जाइये! करुण ने एक हलकी आवाज से कहा। 

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क्या आपको मेरी पत्नी के बारे में पता चला मिस्टर नायर? अमित ने अजीब नजरो से करुण को देखता हुआ पूछा क्योंकि उसकी पत्नी उसे कंही भी दिखाई नहीं दे रही थी। 

ये लीजिये आपकी पत्नी भी आ गई! करुण ने एकदम से कहा। 

सभी लोग तुरंत ही दरवाजे की तरफ देखते है लेकिन अमित पहले अजीब नजरो से करुण की तरफ देखता है। फिर धीरे से दरवाजे की तरफ एक तीखी नजर से देखता है। लेकिन दरवाजे की तरफ कोई नहीं होता। 

इनकी पत्नी सुलेखा कँहा पर है डिटेक्टिव? इंस्पेक्टर ने चौंकते हुए पूछा। 

ये तो अमित जी हमे बतांएगे की उनकी पत्नी कँहा पर है? करुण ने खड़े होते हुए कहा। 

क्या बकवास कर रहे है आप? मेरी पत्नी लापता हुई है तो मुझे कैसे पता होगा की वो कँहा पर है? अमित ने चिल्लाते हुए कहा। 

जी क्योंकि आपने ही अपनी पत्नी का खून करके उनकी लाश को ठिकाने लगा दिया है! करुण ने अमित की आँखों की तरफ देखते हुए कहा। 

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