एडवेंचर ऑफ़ करुण नायर – रहस्य ब्लादिमीर का पार्ट 6

अध्याय – 6 घटनाओ की योजना 


थाने में चारो तरफ एक  शांति फैली हुई है क्योंकि  करुण का लगाया आरोप के पीछे के तथ्य कोई  नहीं समझ पा रहा था। पुलिस वालो ने लेकिन अमित को घेर रखा था सभी जानते थे की करुण की बुद्धिमत्ता सामान्य लोगो से अलग है वो अपनी इन्द्रियों का इस्तेमाल करना भी जानता है और साथ ही अपनी तार्किक शक्ति के दुवारा उन तथ्यों को भी समझ लेता है जो की दुसरो के लिए एक पहली बनी होती है। 

आप पर क्या सबूत है की खुनी कोई और नहीं मै हूँ? अमित ने चौंकते हुए कहा। 

तुम्हारे कहे गए झूठ मिस्टर। वो ही मेरे सबूत है अमित! इतना कहकर करुण अमित की तरफ एक अजीब नजरो से देखते हुए कहता है। 

आपका पहला झूठ की आपने कहा की आपने दोनों तरफ की टिकट बुकिंग पहले ही करवा ली थी लेकिन सच तो ये है की अपने दिल्ली से शिमला की टिकट दो लोगो की करवाई थी बल्कि आपने शिमला से दिल्ली की बुकिंग सिर्फ अपनी ही करवाई थी। क्योंकि आपको पहले ही पता था की आपकी पत्नी दुवरा आपके साथ वापस ही नहीं आएगी तो उसकी टिकट करवाकर क्यों पैसे बर्बाद करना। 

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दूसरा झूठ ये है की आपने कहा की आपको चिठ्ठी शिमला में मिली जबकि अपने ये चिठ्ठी पर पंक्तिया दिल्ली में आकर लिखी है जो की आपके ही पेन से लिखी गई है। इसका सबूत ये है की जिस पेन का इस्तेमाल आप करते है अमित वो बहुत ही खास पेन है जो की बंगलोर में उच्च दामों में मिलता है  इस पेन की खासियत ये है की इससे लिखावट बहुत अच्छी आती है। मेने ये तब ही देख लिया था जब मै आपसे पहली बार मिला था और आपकी कमीज में वो पेन लगा हुआ था तभी मै समझ गया था की जो चिठ्ठी आपने हमे दिखाई वो इसी पेन से लिखी गई होगी। 

और आपका आखिरी झूठ की आपकी पत्नी लापता हुई है क्योंकि अगर ऐसा होता तो जब मैने कहा की लीजिये आपकी पत्नी आ गई तो सभी ने तुरंत पीछे मुड़कर देखा लेकिन आपने पहले मुझे देखा फिर पीछे मुड़कर को देखा। ऐसा कोई इंसान तब ही करता है जब उसे पता हो की उसकी पत्नी कँहा है और वो यंहा आ सकती है की नहीं! करुण ने मुस्कराते हुए अमित की आँखों में देखा। 

अमित के पसीने आने लगे थे वो समझ चूका था की उसका झूठ पकड़ा गया है। इसलिए बस वो चुपचाप बैठा करुण को ही देखे जा रहा था ओर बाकि वंहा सभी तालिया बजाने लगते है। 

धन्यवाद मिस्टर नायर! हम इससे इसकी पत्नी की लाश कँहा है ये जानकारी जल्द ही उगलवा लेंगे! इंस्पेक्टर ने अमित की तरफ गुस्से भरी नजरो से देखा। 

इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी इंस्पेक्टर शिशोदिया क्योंकि मुझे पता है इसकी पत्नी की लाश कँहा पर है? करुण ने इंस्पेक्टर की तरफ देखते हुए जबाब दिया। 

अमित एकदम से घबराई हुई नजरो से करुण की तरफ देखता है। 

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वो शिमला में अमित के घर के पास वाले उस छोटे से कुंड में है! मैने शिमला पुलिस को आने से पहले ही इसकी सुचना दे दी है वो बहुत जल्द ही लाश को यंहा दिल्ली भेज देंगे! करुण ने जबाब दिया। 

लेकिन तुम्हे कैसे पता चला की लाश कुंड में है? सुजान ने चौंकते हुए पूछा। 

क्योंकि अमित के घर के पास चारो तरफ हरी घास उगी हुई है और बर्फ पड़ने के कोई संयोग नहीं नजर आ रहे थे लेकिन फिर भी अमित का कुंड बर्फ से जमा हुआ था बस इसी से पता चल गया मुझे की लाश वंही छुपाई गई होगी! करुण ने हँसते हुए कहा। 

लेकिन फिर अगली चिठ्ठी? सुजान ने फिर से उत्सुकतापूर्वक पूछा। 

वो तो लाश के साथ ही छुपाई गई थी जो की मेने निकाल ली थी! करुण ने अपनी जेब से एक चिठ्ठी निकालते हुए दिखाई। 

इसमें क्या है? सुजान ने चिठ्ठी को खोलते हुए पढ़ना शुरू कर दिया। 

“आज़ाद पंछियो का झुण्ड पिंजरों में है 

जो ना था किसी का वो अब नजरो में है 

योजना है एक और कत्ल की 

बादशाह भी अब देखो कंजरो में है 

कत्ल होते गए सरकारी दीवारों के बिच में 

बुध्जीवी भी देखो अब दर्जनों में है”

इस कविता का क्या मतलब हुआ? सुजान ने चौंकते हुए पूछा 

कुछ नहीं! करुण इतना कहकर घर की तरफ रवाना होने के लिए तांगे को रोकता है। 

तभी सामने से राजीव दिखाई  देता है। सूरज की रौशनी चारो तरफ फेल रही थी। साथ ही  सुजान और करुण अचम्भे में राजीव को देख रहे थे। 

आप यंहा? करुण राजीव को देखते ही चौंक जाता है। 

आप के लिए एक ख़ुशी की खबर है मिस्टर नायर! राजीव ने मुस्कराते हुए कहा। 

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करुण के चेहरे पर शून्य के भाव थे और सुजान अब भी अजीब नजरो से  राजीव को देख रहा था मानो उसकी आंखे पूछ रही हो। 

ब्लादिमीर को हमने यमुना के किनारे एक बस्ती में पकड़ लिया है! राजीव ने खुश होते हुए कहा। 

क्या? सुजान एकदम से उत्सुक होते हुए कहता है। 

क्या दूसरे देशो की ख़ुफ़िया विभागों की इसकी जानकारी दी गई है? करुण के चेहरे पर अब भी किसी तरह के भाव नहीं थे। 

नहीं! हमारी सरकार इसको बाहरी तत्वों को नहीं आने देना चाहती क्योंकि सरकार मानती है की भारत इतना  सक्षम है की वो ऐसे अंदुरनी मामलो को खुद ही हल कर सकती है! राजीव ने जानकारी दी। 

ब्लादिमीर को कँहा रखा गया है? सुजान ने चौंकते हुए पूछा। 

तिहाड़जेल में! राजीव ने जानकारी दी। 

क्या मै उससे मिल सकता हूँ? करुण ने तुरंत ही कहा। 

जी आप मिल सकते है क्योंकि दो दिन बाद उसको फांसी दे दी जाएगी! राजीव ने जानकारी  देते हुए कहा। 

फिर तो हमारे पास काफी कम समय है मै आज ही उससे मिलना चाहूंगा! करुण इतना कहकर राजीव की गाड़ी की तरफ बड़ जाता है। 

सभी करुण के साथ तिहाड़ जाते है जैसे ही करुण तिहाड़ के अंदर घुसता है सभी कैदी जोर जोर से चिल्ला रहे थे। 

ये साहब जब से ब्लादिमीर आया है तब से ही चिल्ला रहे है मानो कोई आत्मा घुस गई हो सब में! हवलदार ने राजीव को जानकारी दी। 

ठीक है तुम हमे उसके  पास ले चलो! राजीव ने कड़कते हुए कहा। 

हवलदार सभी को एक कालकोठरी की तरफ ले जाता है जंहा पर कोठरी में ब्लादिमीर बैठा होता है। 

मै इसी अकेले ही बात करना चाहूंगा! करुण इतना कहकर हवलदार को दरवाजा खोलने के लिए कहता है।

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जैसे ही करुण कोठरी में प्रवेश करता है तो दीवारों पर चोक से हर जगह शैतान और अजीब सी आकृति बनाई हुई थी। 

आखिरकार तुम पकडे गए और अब ये खेल यही खत्म हो जायेगा! करुण अजीब नजरो से  दीवारों को देखता हुआ बोला 

खेल तो अब शुरू हुआ है मिस्टर नायर! ब्लादमीर ने मुस्कराते हुए जबाब दिया। 

तुम्हे लगता है की अब तुम बच पाओगे ये तिहाड़ जेल है इससे निकलना आसान नहीं है और तुम्हारे पास सिर्फ दो दिन है अपने आप को फांसी के फंदे से बचाने के लिए! करुण ने ब्लादमीर की देखते हुए कहा। 

कहते है ये करुण बाबू ये दीवारे और सलाखे सरकारी है और शायद  जानते नहीं है की सरकारे वो ही काम करती है मै चाहता हूँ! ब्लादिमीर ने करुण की आँखों में देखते हुए कहा

वो तो देखा जायेगा क्योंकि जो गरजते है अक्सर वो बरसते नहीं है! करुण इतना कहकर जाने लगता है। 

तभी ब्लादिमीर पीछे से आवाज लगाता है 

अपनी कामवाली बाई सीता बाई को तो बचा लो मिस्टर नायर! इतना कहकर ब्लादिमीर हसने लगता है। 

ये है मेरा चौथा केस! ब्लादिमीर इतना कहकर वापस फिर से दिवार पर कुछ लिखने लगता है। 

इतना सुनते ही करुण तुरंत ही बाहर की तरफ भागता है। 

क्या हुआ करुण? सुजान ने करुण के घबराये हुए चेहरे को देखकर पूछा। 

सीताबाई की जान को खतरा है! इतना कहकर करुण बाहर की तरफ भागता है। 

सभी करुण के पीछे भागते है और राजीव की मोटर से चांदनी चौक की हनुमान गली की तरफ रवाना हो जाते है। 

दूसरी तरफ, 

ब्लादमीर दिवार पर चोक से एक लड़की की तस्वीर बना रहा था और हलकी आवाज में गुनगुना भी रहा था। 

“दुनिया से लड़ा मै, तेरे लिए 

देख तेरे पीछे खड़ा मै, तेरे लिए” 

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ब्लादमीर की आवाज सुनकर सभी कैदी चुप हो चुके थे मानो उसने किसी तरह का समोहन कर रखा हो। 

करुण और सुजान भागकर घर के अंदर प्रवेश करते है तो सामने हॉल में ही एक कुर्सी पर सीताबाई बंधी हुई थी और उसके सीने पर एक बम लगाया गया था। उनके हाँथ में एक चिठ्ठी थी। सीताबाई फूटफूटकर रो रही थी। 

मै आ गया हूँ सीताबाई आपको अब घबराने की कोई जरूरत नहीं है! करुण ने सीताबाई के सामने बैठते हुए कहा। 

करुण उनके हाँथ से वो चिठ्ठी ले लेता है और पढ़ना शुरू कर देता है। 

“ये बम  खास तरिके से लॉक किया गया है मिस्टर नायर जो की 4 घंटो में फट जायेगा लेकिन अगर इसको शरीर से हटाने की कोशिश की गई या बम को डिफ्यूज़ करने की कोशिश की गई तो ये उसी समय फट जायेगा। इसको डिफ्यूज़ करने के लिए 4 शब्दों को बम के लॉक में रखना होगा जिससे ये खुल सकता है लेकिन ये शब्द एक खास पहली से जुड़े हुए है जो की है 

जोबन रूत्ते जो भी मरदा फूल बने या तारा

जोबन रुत्ते आशिक़ मरदे या कोई करमा वाला

इस बात का क्या मतलब हुआ? सुजान ने चौंकते हुए पूछा। 

ये पंक्तिया तो मशहूर पंजाबी कवि शिव कुमार बटालवी की है जिसमे वो कहते है की जवानी में जो भी मरता है वो या तो फूल बनता है  या तारा और जवानी में सिर्फ वही मरते है जो या तो आशिक होते है या कोई अच्छे कर्म करने वाले! करुण ने पंक्तियों को अपने मन में गुनगुनाते हुए कहा

लेकिन इसका इस लॉक से क्या रिश्ता हो सकता है? राजीव ने सोचते हुए पूछा

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करुण जल्दी से लॉक में फूल तारा आशिक कर्मा लिखता है लेकिन बम डिफ्यूज़ नहीं होता है करुण फिर से लॉक में कवि शिव कुमार बटालवी डालता है लेकिन  उसके हाँथ लगातार निराशा ही लगती है 

दो घंटे हो चुके थे और सीताबाई बिलकुल शांत बैठी हुई थी क्योंकि उन्हें पता था की करुण हरहाल में उन्हें बचा लेगा करुण ने इसी बीच कई शब्दों को लॉक में रखता है लेकिन वह अब तक सफल नहीं हो पाया था और बम डिफ्यूज़ करने वाली टीम ने भी ये मान लिया की अगर बम को किसी भी दूसरी तरिके से छेड़ा गया तो बम फुट सकता है लेकिन इससे सिर्फ कुर्सी से बंधे और उसके आसपास खड़े लोगो के चीथड़े ही उड़ेंगे मतलब इससे ज्यादा नुकसान नहीं होगा। 

करुण लगातार लॉक में रखने के लिए शब्दों को सोच रहा था वह हर शब्द की बारीकी देख रहा था। समय लगातार बीत रहा था सभी लगातार कोशिश कर रहे थे लेकिन किसी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था। 

तभी करुण को कुछ अजीब सा लगता है वह लॉक में अपना नाम डालता है करुण नायर और फिर प्रेमिका का नाम डालता है सृष्टि श्रीवास्तव और लॉक की तरफ देखता है जो की गलत जबाब पर लाल और सही पर हरी लाइट जलाता था। 

सबकी नजर उसी पर थी और करुण की आँखों से आंसू गिर जाते है तभी लाल लाइट जल जाती है। सभी फिर से निराश हो जाते है अब बम के फटने में सिर्फ एक मिनट बचा था। 

हम एक इंसान की जान के लिए सबकी जान खतरे में नहीं डाल सकते करुण इसलिए यंहा से चलो! राजीव ने सबको बाहर जाने के लिए कहा। 

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सुजान और आप लोग बाहर जाये लेकिन मै यही रहूँगा! करुण सीताबाई के चेहरे पर ही अपनी नजरे टिकाये हुए था। 

भवनाओ के आवेश में मत आओ आखिरी मिनट बचा है इससे तुम्हारी जान भी जा सकती है! राजीव ने करुण को समझाते हुए कहा 

आप जा सकते है! करुण के चेहरे पर शून्य भाव थे। 

सुजान की आँखों में आंसू थे सभी लोग घर से बाहर आ जाते है और सुजान भी घर से बाहर चला जाता है। 

बेटा तुम भी चले जाओ मै नहीं चाहती की मेरी वजह से तुम्हे कुछ हो! सीताबाई ने करुण के चेहरे को अपने कोमल हाँथ से पुचकारते हुए कहा। 

मुझे और आपको कुछ नहीं होगा आप व्यर्थ ही चिंता कर रही है और फिर से करुण लॉक को देखने लगता है। अब सिर्फ 10 सेकंड ही बचे थे। 

फिर करुण चुपचाप लॉक में “करुण नायर की मौत” डालता है और लाइट की तरफ देखता है की वो अब हरी होगी या लाल 

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