एडवेंचर ऑफ़ करुण नायर – रहस्य ब्लादिमीर का पार्ट 7

अध्याय –  7 फांसी की सजा 


सभी लोग घर के आसपास खड़े है। घर के आसपास बेरियर लगा दिए गए है और  लोगो की भीड़ को पुलिस वाले अलग कर रहे है।

बगल के घरो को भी खाली करवा दिया गया है।

सभी लोग प्राथना कर रहे है।

क्योंकि पूरी हनुमान गली करुण नायर की बहुत इज़्ज़त करते थे।

कोई भी इस अद्भुत इंसान का इस तरह अंत देखना नहीं चाहता था।

राजीव और सुजान की चिंता लगातार बढ़ रही थी। 

दूसरी तरफ करुण अब भी चुपचाप सीताबाई के सामने खड़ा होता है पर जैसे ही उस लाइट की तरफ देखता है तो उसमे हरे रंग की लाइट जल जाती है और बम अपने आप ही डिफ्यूज हो जाता है। 

सीताबाई तुरंत ही करुण को गले लगा लेती है।

करुण चुपचाप हँसते हुए कहता है “अभी मेरे लिए बहुत चाय बनानी है सीताबाई” 

ये सुनकर सीताबाई की आँखों में आंसू आ जाते है करुण खड़ा हो जाता है और सीताबाई को बम से अलग कर देता है। 

बाकी सभी लोग घड़ी में समय देखने में व्यस्त है तभी उन्हें बाहर करुण आता हुआ दिखाई देता है

जिसके हाँथ में बम था और दूसरे हाँथ से वह सीताबाई को सहारा देते हुए बाहर लाता है। 

करुण और सीताबाई को जिन्दा देखकर सभी लोग खुश हो जाते है और वंहा खड़े सभी लोग करुण की जयजयकार करने लगते है।

सुजान और राजीव को कुछ समझ नहीं आता है की आखिर करुण कैसे बच गया और उसने कैसे सीताबाई को बचाया आखिर उस बम में उसने कौनसे डिजिट डाले होंगे। 

मुझे पूरा विश्वास था मेरे मित्र की तुम सीताबाई को कुछ नहीं होने दोगे! सुजान इतना कहकर करुण को गले लगा लेता है। 

वैसे तुमने कौनसे डिजिट उसमे डाले थे? राजीव ने चौंकते हुए पूछा। 

“करुण नायर की मौत”! करुण ने मुस्कराते हुए जबाब दिया। 

VLADIMIR IS AN EVIL

चलो लेकिन ये खेल अब यही खत्म हो जायेगा क्योंकि कल ब्लादिमीर को फांसी दे दी जाएगी और उसका खेल खत्म! राजीव ने वापस अपनी मोटर में बैठते हुए कहा। 

हमे भी यही आशा है मिस्टर राजीव! करुण भी इतना कहकर सुजान और सीताबाई के साथ अपने घर के अंदर चला जाता है। 

सभी लोग खाने की मेज पर बैठे हुए है।

रात हो चुकी है। सीताबाई खाना मेज पर सजा कर बैठ जाती है 

मुझे लगता है की सीताबाई आपको कल अपने गांव कुछ समय के लिए चला जाना चाहिए

फ़िलहाल माहौल ठीक नहीं है और मै नहीं चाहता की आपको मेरी वजह से किसी भी तरह की परेशानी हो

जब माहौल ठीक हो जायेगा तब मै आपको वापस बुला लूंगा! करुण ने खाना खाते  हुए कहा

लेकिन बेटा! सीताबाई इतना कहकर रुक जाती है। 

आप मेरी चिंता ना करे सीताबाई! करुण इतना कहकर वापस अपने कमरे में चला जाता है। 

सुजान भी कमरे में आकर अपने बिस्तर पर लेट जाता है। 

तो आगे की क्या योजना है? सुजान ने पूछा। 

मुझे लगता है सुजान तुम्हे भी कुछ दिनों के लिए बंगाल वापस चले जाना चाहिए। हो ना हो ब्लादिमीर तुम्हे भी अपना शिकार बना सकता है! करुण एक चिठ्ठी लिखते हुए कह रहा था। 

लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता अगर मुझे मौत का भी होता तो शायद मै वकालत नहीं चुनता और तुम्हारे साथ इन खतरनाक केसो पर काम नहीं करता। मुझे पता है की तुम मुझे अपना दोस्त समझते हो इसलिए तुम्हे मेरी चिंता है लेकिन दोस्त होने के नाते मुझे भी तुम्हारी चिंता है इसलिए मै यही रुकूंगा! सुजान इतना कहकर कंबल ओढ़ लेता है। 

करुण फिर कुछ नहीं कहता है और चुपचाप लिखता रहता है। 

VLADIMIR IS AN EVIL

अगले दिन, 

सुबह होते ही करुण और सुजान दोनों सीताबाई को प्लेटफार्म पर गाड़ी पर बैठा कर वापस आ जाते है

तभी उन्हें घर के बाहर इंस्पेक्टर सुरेश शिशोदिया खड़े दिखाई देते है। 

क्या हुआ इंस्पेक्टर आप सुबह सुबह यंहा? सुजान ने चौंकते हुए पूछा 

ब्लादिमीर जेल तोड़ कर भाग गया है  और अपने साथ कम से कम सौ केदियो को भी लेकर गया है! इंस्पेक्टर ने जानकारी दी। 

लेकिन कैसे? सुजान एकदम से भोचक्का होते हुए पूछता है 

रात के १२ बज चुके थे। इसी दौरान निगरानी पुलिस अपने ड्यूटी को बदलती है।

इस दौरान सिर्फ चार पुलिस वाले ही तिहाड़ में होते है जो की दो मुख्य दरवाजे पर और दो केदियो के सलाखों के पास।

पुलिस का मानना है की ब्लादिमीर एकदम से चीखता है इसलिए पुलिस टोर्च मारकर जब जेल के अंदर झांकती है तो ब्लादिमीर का पूरा शरीर हरा हो गया था मानो वह कोई दानव हो।

एक चीख के साथ वह बेहोश हो गया। 

पुलिस अधीक्षक अपनी बंदूक लिए जैसे ही उस जेल में प्रवेश करता है तभी ब्लादिमीर उस पर हमला कर देता है और उसका सिर दिवार पर मारकर जेल से बाहर आ जाता है। 

दूसरे पुलिस वाले की नजर जैसे ही ब्लादिमीर पर पड़ती है वह बंदूक निकालता है लेकिन ब्लादिमीर एक धुंआ चारो तरफ फैला देता है और जैसे ही उस पुलिस वाले की नजर ब्लादिमीर पर पड़ती है तभी वो बेहोश हो जाता है। ब्लादिमीर सभी सलाखे खोल देता है। सभी कैदी बाहर आ जाते है और साथ मिलकर जेल तोड़कर बाहर आ जाते है। 

क्या मै उस जेल को देख सकता हूँ जंहा से ब्लादिमीर भागा! करुण ने अजीब नजरो से इंस्पेक्टर को देखते हुए कहा। 

VLADIMIR IS AN EVIL

कुछ देर बाद, 

सभी लोग तिहाड़ जेल पहंचते है जो की खाली प्रतीत हो रहा था। मानो पुरे जेल में कोई कैदी ही नहीं है। करुण बस चुपचाप उस कैद खाने की तरफ जाता है जंहा पर ब्लादिमीर को रखा गया था। करुण कैद खाने की हालत का मुयाना करता है। वो हवलदार जो बेहोश हो गया था वो एक तरफ बैठा होता है। 

पुलिस अधीक्षक जो चोटिल था वो भी दूसरी तरफ बैठा हुआ था। ब्लादिमीर के कैद खाने में जाकर करुण चारो तरफ देखता है तो उसे रात के खाने की थाली दिखाई देती है जंहा पर सिर्फ एक रोटी बची हुई थी और दाल भी बची थी। 

क्या इस खाने का परीक्षण किया गया है? करुण ने इंस्पेक्टर शिशोदिया से पूछा। 

जी इसका परीक्षण किया गया था। खाना देने से पहले खुद पुलिस अधीक्षक इस खाने को खाकर देखते है और ये सब होने के बाद भी इस खाने का परीक्षण किया गया तो इस खाने में भी ऐसा कुछ नहीं पाया गया है। 

यंहा दो चीज़े अजीब हुई है पहली ब्लादिमीर का हरे रंग का होना और दूसरा हवलदार पर नशीले पदार्थ का छिड़काव होना। दोनों ही खास ड्रग्स की वजह से हुए है। लेकिन तिहाड़ जेल में इन ड्रग्स का ब्लादिमीर को मिलना एक पेहली की तरह है! सुजान ने अजीब नजरो से देखते हुए कहा। 

पेहलिया अक्सर एक चक्र की तरह होती है जिसका ना कोई छोर नहीं होता है और ना ही अंत लेकिन उसका मध्य जानकर भी आप पूरी पहली को समझ सकते हो! करुण ने इतना कहकर एक गिलास से पानी पिया। 

क्या तुम इस रहस्य को सुलझा पाए?  इंस्पेक्टर ने चौंकते हुए पूछा। 

हर समस्या को हल करने का कोण त्रिकोण होता है! करुण ने एक कुर्सी पर बैठते हुए कहा। 

VLADIMIR IS AN EVIL

मतलब? सभी ने चौंकते हुए पूछा। 

मै कल रात का पूरा वर्णन करता हूँ।

ब्लादिमीर ये सब अकेले नहीं कर सकता था जरूर उसके साथ इस जेल का कोई ना कोई पुलिस वाला जरूर मिला हुआ था।

अगर रात की सोचे तो सिर्फ दो लोगो पर शक जाता है।

एक वो हवलदार जिसपर नशीले पदार्थ फेंककर उसे बेहोश किया गया था या वो पुलिस अधीक्षक जो कैद खाने में गया और जिसे ब्लादिमीर ने दिवार से उसका सिर मारकर घायल कर दिया। 

मेरे हिसाब से ये हवलदार ही ऐसा करता है क्योंकि छोटी पदवी वाले पुलिस जल्दी पैसे के लालच में बिक जाते है जितना मेने अपनी वकालत में पढ़ा और दूसरा की वो ये झूठ भी तो कह सकता है की उसपर नशीला पदार्थ फेंका गया हो? हो सकता हो वो वैसे ही बेहोशी का बहाना बना रहा हो? सुजान ने दृणनिश्चिय के साथ कहा। 

सम्भवनाये अक्सर तर्क के विपरीत काम करती है जो हम सोचते है वो सम्भवना है लेकिन जो हमे सोचने पर मजबूर कर दे वो तर्क है! करुण ने एक मुस्कान के साथ कहा। 

तुम्हारी बाते कभी कभी समझ नहीं आती है! इंस्पेक्टर शिशोदिया ने सोचते हुए कहा। 

ब्लादिमीर का साथ, कोई और नहीं खुद पुलिस अधीक्षक ने दिया! करुण ने पुलिस अधीक्षक से कहा। 

पुलिस अधीक्षक अपना नाम सुनकर चौंक जाता है और एकदम से झल्लाकर कहता है “ये क्या बकवास है मेने अपना काम निष्ठां से किया है और चोट भी खाई है। 

उस रात दरअसल हुआ क्या था आप सबको मै कुछ तथ्यों के साथ बताता हूँ

VLADIMIR IS AN EVIL

पहला तथ्य जो ये साबित करता है की हवलदार ब्लादिमीर से मिला हुआ  नहीं है और वो ये है की जंहा पर हवलदार खड़ा था वंहा कुछ सफ़ेद रंग का पाउडर गिरा हुआ है जो की एक खास नशीला पदार्थ है जिससे वह बेहोश हो गया इसका मतलब है की वो सच बोल रहा था।

 दूसरा तथ्य की ब्लादिमीर का शरीर हरा रंग इसलिए हो गया था क्योंकि उसने रूद्रनगा नाम का एक जहरीला पदार्थ खाया था जो की कोलंबिया में मिलता है ना की भारत में इसके कम सेवन से आपका रंग हरा हो जाता है और ज्यादा सेवन से मौत भी हो सकती है। खैर अगर अनुमान लगाया जाये तो ब्लादिमीर तक ये ड्रग्स उसके खाने के दवरा ही उस तक भेजा जा सकता था जो की सिर्फ पुलिस अधीक्षक ही चेक करते थे।

 ये बात मुझे इसलिए पता चली क्योंकि रात का खाना बचा हुआ था मतलब ब्लादिमीर ने सिर्फ एक रोटी ही खाई जो की शायद ड्रग्स वाली हो बाकि खाना इसलिए बचा हुआ था। तीसरा तथ्य ये है की जैसा पुलिस अधीक्षक ने कहा की कैदखाने से अजीब अजीब सी आवाजे आ रही थी और जब उन्होंने झाँका तो अंदर ब्लादिमीर का शरीर हरे रंग का हो चूका था। लेकिन पुलिस अधीक्षक इतने बढे कैदी के कैदखाने में बिना अपनी बंदूक के क्यों गए? मतलब ये सब एक योजना के साथ हुआ जिसमे पुलिस अधीक्षक जानबूझ कर अंदर गए और उन्होंने अपना सिर दिवार में मारा! करुण इतना कहकर कुर्सी से खड़ा हो जाता है। 

लेकिन वो ड्रग ब्लादिमीर तक कैसे पहुंचा जिससे उसने हवलदार को बेहोश किया? सुजान ने अचम्भित स्वर में पूछा। 

VLADIMIR IS AN EVIL

वो भी कोई और नही पुलिस अधीक्षक ने ही ब्लादिमीर को दिया था जिसका पाउडर अभी भी पुलिस अधीक्षक की उंगलियों के बीच मे है! करुण ने पुलिस अधीक्षक की उंगलियां देखते हुए कहा।

ये सुनकर पुलिस अधीक्षक तुरन्त ही अपने हाँथ को छुपाने की कोशिश करता है।

लेकिन तब तक हवलदार गोखले उसके हांथो को पकड़ लेता है।

इसको तुरन्त ही हिरासत में ले लो गोखले! इंस्पेक्टर ने गुस्से में होते हुए कहा।

करुण चुपचाप उस कैदखाने में वापस जाता है और इस खाने की थाली को उठाता है

जिसके नीचे एक चिट्ठी रखी होती है। सभी कैदखाने में आ जाते है।

“छठवे रहस्य की शुरुयात है।

दिल्ली के उत्तम नगर आपर्टमेंट वैष्णो में एक लड़की का खून हो चूका है।

मुझे आशा है की तुम इसके कातिल को जरूर पकड़ लोगे मिस्टर नायर” 

तुम्हारा शुभचिंतक ब्लादिमीर 

VLADIMIR IS AN EVIL

4 Replies to “एडवेंचर ऑफ़ करुण नायर – रहस्य ब्लादिमीर का पार्ट 7”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *