एडवेंचर ऑफ़ करुण नायर – रहस्य ब्लादिमीर का पार्ट 2

अध्याय – 2 माया की मौत 


शाम के 4 बज चुके थे और सूरज हल्का छुप  चूका था। करुण बिलकुल निडरता से ब्लादिमीर की आँखों में देख रहा हो। चारो तरफ एक शांति फैली हुई थी। बाहर यमुना तले कई पक्षियों की आवाजे गूंज रही थी। 

तो तुम हो वो ब्लादिमीर जिसे लोग शैतान कहते है! करुण ने ब्लादिमीर की तरफ अजीब नजरो से देखते हुए कहा। 

बिलकुल मै ही हूँ लेकिन सच कहु तो मै तुम्हारा प्रंशसक हूँ मिस्टर नायर। शायद ही कोई है जो जर्मनी की रिकॉर्डिंग की ख़ुफ़िया सन्देश को समझने वाली तकनीक को जान सकता है मुझे काफी मजा आएगा तुम्हे मारने में लेकिन इतनी जल्दी नहीं क्योंकि क्या है ना मै आपके बारे में काफी कुछ सुना है लोग तो ये कहते है की आप तार्किकता के भगवान् है इसलिए मुझे आपकी बुद्धमिता को आजमाना है! ब्लादिमीर वापस अपनी कुर्सी पर बैठ जाता है। 

तुम ना ही आजमाओ तो अच्छा है क्योंकि तुम सिर्फ लोगो की जान लेना जानते हो लेकिन एक बात मुझे समझने में मुश्किल हो रही है की तुमने पुरे विश्व को बड़ी मुश्किल से ये साबित किया की तुम मर चुके हो फिर तुम मुझ जैसे प्राइवेट डिटेक्टिव को मारने क्यों आये हो ब्लादिमीर? करुण इतना कहकर एक कदम पीछे हटा लेता है। 

ये एक जंग है मिस्टर नायर जो कभी खत्म नहीं होगी क्योंकि मेरा जैसा शैतान बिना कत्लेआम के जी नहीं सकता और तुम जैसा भगवान् लोगो को बचाये बिना नहीं जी सकता तो फिर हमारा आमना सामना तो बनता ही है! ब्लादिमीर ने खड़े होते हुए कहा। 

तभी करुण अपने पतलून में छुपी बंदूक को बाहर निकाल लेता है और ब्लादिमीर पर तान देता है। 

तो फिर कर लेते है आमना सामना! इतना कहकर करुण जैसे ही गोली चलाने वाला होता है तभी उसे माया की आवाज आती है। 

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दूसरी तरफ माया पर किसी ने कैलिबर बंदूक तान रखी थी जिसे देखकर करुण चौंक जाता है। 

हाहा मार दो मुझे मिस्टर नायर लेकिन याद रखना की तुम्हारी गलती से इस लड़की की जान चली जाएगी! ब्लादिमीर इतना कहकर करुण से वो बंदूक लेने के लिए आगे बढ़ता है। 

करुण अपनी बंदूक नीचे कर लेता है तभी कुछ लोग बंदूक से करुण पर भी निशाना लगा देते है। 

अच्छे लोगो की यही कमी होती है की वो अच्छा ही बने रहते है। फ़िलहाल तो भर्म के शैतान को तार्किकता के भगवान् को एक तोहफा! इतना कहते ही ब्लादिमीर एक गोली माया के छाती में मारता है और गोली उसके सीने से आरपार हो जाती है। 

नहीं कहते हुए! करुण भागकर माया की तरफ बढ़ता है और सभी लोग ब्लादिमीर के साथ वंहा से चले जाते है। 

तुम चिंता मत करना! हम तुम्हे बचा लेंगे माया! इतना कहकर करुण माया को उठाने की कोशिश करता है लेकिन माया उसे रोक देती है और अपने जुत्तो को नीचे से फाड़ कर एक छोटी सी सीडी करुण को दे देती है। 

ये तुम्हे ब्लादिमीर को हारने में मदद करेगी! माया इतना कहकर अपनी सांसे छोड़ देती है। 

करुण की आँखों में आंसू नहीं थे बस शून्य भाव से वो माया की लाश को देख रहा था तभी फैक्ट्री में चारो तरफ पुलिस आती है। इंस्पेक्टर शिशोदिया बस चुपचाप करुण के कंधे पर हाँथ रखते है। 

वो बहुत चालक था इससे पहले की हम गांव को पार करके इस फैकट्री तक समय पर पहुँच पाते उसने गांव में धार्मिक दंगे करवा दिए थे जिसकी वजह से हम उसी को नियत्रंण करने में व्यस्त रहे! शिशोदिया ने उदासी भर स्वर में जबाब दिया। 

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कोई बात नहीं उसका पहला वार था जब मै तैयार नहीं था लेकिन मेरा वार तब होगा जब वो बिलकुल तैयार होगा! इतना कहकर करुण फैक्ट्री से बाहर निकल जाता है। 

इस लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो और चारो तरफ फैल जाओ वो बच कर ना निकल पाए! इंस्पेक्टर ने गरजते हुए अपने हवलदारों से कहा। 

रात हो चुकी थी, सुजान अब भी जाग रहा था वो करुण के लिए बेचैन था तभी कमरे में करुण प्रवेश करता है और एक बेचैनी से इधर उधर घूमने लगता है। 

क्या हुआ? सुजान भी एक बेचैनी से पूछता है। 

माया को मौत के घाट उतार दिया गया और अब वो बहुत जल्द कुछ ऐसा कदम उठाएगा जिससे वो मुझे परख सके लेकिन सुजान क्या तुम्हारी राजीव से भेंट हुई? करुण अपनी आराम कुर्सी पर बैठते हुए पूछता है। 

हाँ और उसने अपने बेहतरीन जासूसी की टीम ना सिर्फ हमारे घर के आसपास तैनात करवा दी है बल्कि  उनकी कोशिश है की वो पूरी दिल्ली में अपनी व्यक्तिगत छानबीन को भी बढ़ावा देंगे जिससे हम जल्द ही ब्लादिमीर तक पहुँच जायेंगे! सुजान ने एक उत्साहित स्वर में जबाब दिया। 

बहुत बढ़िया सुजान लेकिन इतना काफी नहीं होगा। हो ना हो ब्लादिमीर हमारे आसपास ही होगा ये उसके भरोसेमंद लोग उसकी आंख कान बनकर हमारी जैसी कर रहे होंगे तो हमे वह उनको चकमा देकर ब्लादिमीर तक जल्द से जल्द ही पहुंचना होगा। अगर मै गलत नहीं हूँ तो सुबह तक ही ब्लादिमीर कुछ जरूर करेगा इसलिए तुम जल्दी सो जाओ क्योंकि कल सुबह जल्दी उठना होगा! इतना कहकर करुण अपनी खिड़की से अपने आँगन में देखने लगता है। 

सुजान अपने कमरे में जाकर सो जाता है और करुण खिड़कीयो पर पर्दे डालकर चुपचाप अपनी आराम कुर्सी पर बैठ जाता है और अपने ग्रामोफोन पर उस सीडी की रिकॉर्डिंग सुनता है। 

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अगले दिन, 

सुबह का समय, चारो तरफ पक्षियों की चहचहाट की आवाजे गूंज रही थी। करुण की नींद जैसे ही टूटती है तभी उसे कमरे में चाय का कप लिए सुजान आता दिखाई देता है जो की उसके पास वाली कुर्सी पर ही बैठ जाता है।

सुबह एक चिठ्ठी आई है! सुजान करुण के सामने वो चिठ्ठी रख देता है। 

करुण चुपचाप उस चिठ्ठी को खोलकर देखता है और एक धीरे स्वर में पढ़ता है 

“मिस्टर नायर 

“आपके पास हर दिन सात सामान्य हत्या से लेकिन मुझसे जुड़े हुए केस होंगे हर केस में एक सन्देश होगा जो आपको दूसरी हत्या तक ले जायेगा अगर आपने सभी केसो में उन संदेशो को ढूंढ लिया तो आप मुझ तक पहुँच जायेंगे और फिर वादे के अनुसार हम दोनों आमने सामने होंगे कुछ ही देर में आपके पास एक पार्सल आएगा जिसमे पहले केस के बारे में हिंट होगा” 

आपका प्रिय ब्लादिमीर” 

आखिरकार ये चाहता क्या है? सुजान ने चौंकते हुए पूछा

बस एक खेल जिसमे ये समझता है की ये खेल का पुराना खिलाडी है लेकिन ये भूल गया की इस खेल को बनाने वाला ही मै हूँ! करुण इतना कहकर खड़ा हो जाता है और खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगता है

रॉ और आईबी दोनों ही दिल्ली और उसके अलग अलग रास्तो में फैल गई है लेकिन अब तक ब्लादिमीर का कुछ पता नहीं चला है! सुजान ने जानकारी देते हुए कहा तभी दरवाजे पर एक डाकिया दरवाजे की घंटी बजाता है जिसे सुनकर सुजान तुरंत ही नीचे जाकर डाकिये से वो पार्सल ले लेता है। जिसमे सिर्फ एक घर का पता लिखा होता है। करुण तुरंत ही अपना लम्बा कोट पहन लेता है और अपनी छड़ी भी उठा लेता है। 

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हमे तुरंत ही जाना होगा मेरे मित्र सुजान! करुण इतना कहकर कमरे से निकलकर नीचे उत्तर  जाता है और सुजान भी तुरंत ही उस चिठ्ठी को लेकर करुण के पीछे भागता है दोनों एक तांगा करके गीता कॉलनी की तरफ निकल जाता है। 

सुजान तांगे से बाहर देख रहा था। करुण ने अपनी आंखे बंद कर रखी थी। तभी तांगा एक बंगले के सामने रुक जाता है। करुण तांगे वाले को किराया देकर बंगले के  अंदर प्रवेश करता है तो वंहा पर सुरेश शिशोदिया पहले से ही मौजूद थे। 

आप कैसे है मिस्टर नायर! मुझे आपके आने के बारे में पता चल गया था कृपया आप इस तरफ आइये! इतना कहकर इंस्पेक्टर शिशौदिया करुण और सुजान को एक कमरे की तरफ ले जाता है जंहा पर एक आदमी की लाश पड़ी हुई थी। 

क्या आप जानते है ये कौन है? इंस्पेक्टर ने करुण की तरफ देखते हुए पूछा। 

अगर मै गलत नहीं हूँ तो ये प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी रवि शुक्ला है! करुण ने लाश को बरीकी से देखते हुए जबाब दिया। 

जी बिलकुल किसी ने इनका कत्ल चाकू घोप कर की है! इंस्पेक्टर ने जबाब दिया। 

चाकू के घाव को देखकर लगता है की चाकू घर की रसोई से ही लिया गया था। क्या आपको हथियार बरामद हुआ? सुजान ने घाव को देखते हुए पूछा। 

नहीं फ़िलहाल तो नहीं मिस्टर चटर्जी! इंस्पेक्टर ने जबाब दिया। 

जब खून हुआ तब कौन कौन घर में मौजूद था या आप को किस किस पर शक है? करुण ने कमरे से बाहर निकलते हुए पूछा। 

इस घर में उस समय तीन लोग मौजूद थे पहली नौकरानी, दूसरी उनकी बीवी और तीसरा उनका दोस्त! इंस्पेक्टर ने जबाब दिया। 

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क्या मै तीनो से अलग अलग मिल सकता हूँ क्या आप इन्हे दूसरे कमरे में भेज देंगे! करुण इतना कहकर एक कमरे में चला जाता है और सुजान भी कमरे में चला जाता है।

कुछ ही देर में घर की नौकरानी कमरे में प्रवेश करती है जिसमे हलके गंदे कपडे पहन रखे थे और बालो को बांधा हुआ था। रंग सांवला था लेकिन बातचीत करने में तेज़ दरार थी। 

आइये शायद  आप इस घर की नौकरानी सीमा जी होंगी? करुण ने सीमा को अंदर आने का इशारा करते हुए कहा। 

जी! नौकरानी ने डरते हुए जबाब दिया। 

तो सीमा जी जब खून हुआ तब आप कँहा थी? करुण ने सीमा के चेहरे को पढ़ने की कोशिश करते हुए पूछा। 

जी दरअसल मै उस समय पीछे गोदाम में फूलो की कलियारी ठीक करने के लिए सामान लेने गई थी! सीमा ने जबाब दिया। 

सीमा क्या तुम बता सकती हो की तुम्हारे मालिक किस तरह के व्यक्ति थे? करुण ने सीमा से नजर हटा कर दूसरी तरफ देखते हुए पूछा। 

जी वो बहुत अच्छे व्यक्ति थे। पर्यावरण से काफी प्रेम करते थे अक्सर लोगो को पर्यावरण की महत्वता बताने के लिए बढे बढे विश्व विधालय में जाकर लोगो को जागरूक करते थे। खुद भी शाकाहारी थे और दुसरो को भी इन्ही चीज़ो के लिए प्रेरित करते थे। लेकिन एक बात बताऊ साहब उनकी मालिकन  मेम से कभी नहीं पटती थी अक्सर दोनों मै झगड़ा होता रहता था। 

धन्यवाद सीमा अब आप जा सकती है! करुण ने सीमा को बाहर जाने का इशारा किया। 

तभी कमरे में रवि शुक्ला के करीबी दोस्त तरुण सरद प्रवेश करते है। 

तरुण जी जब खून हुआ तब आप क्या कर रहे थे और कंहा पर थे? करुण ने तरुण की तरफ देखते हुए पूछा। 

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जी दरअसल मै गार्डन में अपने दोस्त के लिए साल्मन पास्ता बना रहा था! तरुण ने जबाब दिया। 

और आप अपने दोस्त के बारे में क्या  सोचते थे? करुण ने तरुण के कंधे पर हाँथ रखते हुए पूछा। 

इसमें समझना क्या है वो एक महान इंसान था उसे इस देश की प्रधानमंत्री की तरफ से और सरकार की तरफ से कई अवार्ड भी मिल चुके है और मुझे गर्व है की मै ऐसे इंसान का दोस्त था! तरुण ने तुरंत ही जबाब दिया। 

क्या आपने अपने दोस्त के चीखने की आवाज नहीं सुनी थी? करुण ने पूछा। 

जी नहीं क्योंकि मै गार्डन में था और जिसकी वजह से वंहा तक आवाज सुनना मुमकिन ही नहीं था! तरुण ने जबाब दिया। 

जी धन्यवाद तरुण जी अब आप जा सकते है! करुण इतना कहकर कुर्सी पर बैठ जाता है। 

इतना सुनते ही तरुण कमरे से बाहर चला जाता है तभी कमरे में एक खूबसूरत लड़की जो काफी नए ज़माने की प्रतीत होती थी लम्बे सुनहरे बाल, बाल भींगे हुए और आँखों में एक अलग ही चमक थी। 

शायद आप रुक्मणि शुक्ला यानि की रवि शुक्ला की पत्नी होगी? करुण ने रुक्मणि को एक कुर्सी पर बैठने का इशारा करते हुए कहा। 

जी सही जाना मै रुक्मणि शुक्ला हूँ! रुक्मणि ने जबाब दिया। 

तो हमे बताइये मिस शुक्ला की क्या हुआ था? करुण ने पूछा। 

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जी दरअसल मै उस समय नहाने गई हुई थी! लेकिन नहाते हुए मैने अपने पति के चीखने की आवाज सुनी। मेने तुरंत ही अपने आप को अपनी तौलिया से लपेटा और भागकर बाहर वाले कमरे में आई तो वंहा पर मेरे पति मरे हुए पड़े थे। सच कहु तो मिस्टर नायर मेरे पति से मेरी बिलकुल नहीं बनती है अक्सर हमारी लड़ाई भी होती रहती है क्योंकि मेरे पति समाज में तो अच्छा बनने की कोशिश करते है लेकिन अपनी ही बीवी को दबा कर रखने की कोशिश करते थे लेकिन मै फिर भी उनसे प्यार करती थी! इतना कहकर रुक्मणि रोने लगती है। 

जी आप रोइये मत! इतना कहकर करुण अपना रुमाल रुक्मणि को दे देता है। 

रुमाल लेकर रुक्मणि अपने आंसू पोछ लेती है और उदास चेहरे के साथ बैठ जाती है। 

ठीक है मिस शुक्ला आप भी जा सकती है! करुण इतना कहकर अपनी कुर्सी से उठ जाता है और ये सुनकर रुक्मणि भी कमरे से बाहर आ जाती है। कुछ ही देर में कमरे में इंस्पेक्टर शिशोदिया प्रवेश करते है। 

सभी एक शांत चेहरे के साथ सोचने में मजबूर थे तभी अचानक ही इंस्पेक्टर शिशोदिया करुण को देखते हुए पूछते है 

तो कुछ पता चला मिस्टर नायर की खुनी कौन है?

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अगला अध्याय 25 तारीख को इंडियन पेपर इंक पर आएगा तब तक आप इसका तीसरा अध्याय इंडियन पेपर इंक स्टोर से मात्र पांच रूपये में खरीद सकते है जिसमे आप ना सिर्फ खुनी के बारे में जानेगे बल्कि एक नए रहस्य से भी रूबरू होंगे 

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