कलियुग – एक श्रापित राजकुमार पार्ट 13

अध्याय – 13 दिल टूट गया 

सुबह का समय, चारो तरफ स्कूल में बच्चो की भीड़ और छोटी छोटी सजाई हुई दुकाने क्योंकि आज स्कूल में सालाना उत्सव था। सभी बच्चे स्कूल में सजाने के लिए तरह तरह के प्रोग्राम कर रहे थे। कलियुग बस चुपचाप सभी लोगो से दूर एक पेड़ के नीचे बैठा हुआ था। 

उसे इस भीड़भाड़ से अलग रहना ही पसंद था तभी कोई कलियुग को आवाज देता है। कलियुग जैसे ही पीछे देखता है तो सामने पंखुड़ी खड़ी होती है। 

क्या कलियुग आज मेरा नृत्य है और तुम हो की यंहा बैठे हुए हो? 

मुझे भीड़भाड़ पसंद नहीं है इसलिए तुम होकर आ जाओ! कलियुग इतना कहकर जाने लगता है तभी पंखुड़ी उसका हाँथ पकड़ लेती है। 

पंखुड़ी चुपचाप कलियुग का हाँथ अपनी कमर पर रख देती है और इससे पहले कलियुग कुछ बोल पाता अपनी एक ऊँगली उसके होंठो पर रख देती है और मुस्कराते हुए कहती है। 

मुझे पता है की तुम जो सबको दिखाते हो तुम वैसे नहीं हो! इतना कहकर पंखुड़ी हल्का सा अपनी कमर को हिलाने लगती है और कलियुग के साथ नाचने लगती है। 

कलियुग बस शांत चेहरे से पंखुड़ी को देख रहा था। उसका प्यार पंखुड़ी के लिए अब और बढ़ चूका था। वह पंखुड़ी के लिए पूरी दुनिया से लड़ सकता था। कलियुग भी बस ऐसे पंखुड़ी के साथ झूमने लगता है। 

तभी पंखुड़ी को बुलाने की आवाज आती है। कलियुग झट से पीछे हो जाता है। 

तुम इतना सबसे डरते क्यों हो? पंखुड़ी ने हँसते हुए पूछा। 

मुझे वो दरअसल। इतना कहकर कलियुग रुक जाता है। 

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मुझे पता है की तुम इन सबसे कमजोर हो तुम्हारे पास कोई शक्ति नहीं है इसलिए तुम सबसे बच बच कर रहते हो लेकिन तुम्हारी यही बात मुझे अच्छी लगती है क्योंकि तुम दिल के अच्छे हो! इतना कहकर पंखुड़ी कलियुग के गले लग जाती है। 

काश मै तुम्हे सच बता सकता पंखुड़ी लेकिन अगर मेने तुम्हे सच बता दिया तो तुम मुझे गलत समझोगी और मुझसे दोस्ती तोड़ दोगी जो की मै बिलकुल भी नहीं चाहता हूँ! कलियुग अपने मन में बोलते हुए कहा। 

चलो अब मेरा नृत्य है और तुम्हे जरूर आना है! इतना कहकर पंखुड़ी चली जाती है।
कलियुग के हाँथ से पंखुड़ी ऐसे सरकता है जैसे मानो हाँथ से रेत सरक रही हो। 

कुछ देर बाद, 

मंच के पीछे से स्टूडेंट्स की भीड़ में पंखुड़ी बस कलियुग को ढूंढ रही थी लेकिन उसे कंही भी कलियुग दिखाई नहीं दे रहा था जिसकी वजह से उसकी बेचैनी और बढ़ने लगी थी। क्योंकि मंच पर उसके नाच के लिए घोषणा भी हो चुकी थी। 

पंखुड़ी हलके कदमो के साथ मंच पर पहुँच जाती है। लेकिन अब भी उसे कलियुग दिखाई नहीं दे रहा था।

वह एक उदास चेहरे के साथ मंच को प्रणाम करके नाचने के लिए तैयार होती है तभी उसे भीड़ में से निकलते हुए कलियुग दिखाई देता है जिसकी वजह से पंखुड़ी के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

पंखुड़ी नाचना शुरू कर देती है उसके चेहरे पर मुस्कान और दिल मे खुशी साफ देखी जा सकती थी जिसकी वजह से सभी उसके नाच से बहुत ही खुश नजर आ रहे थे।

पंखुड़ी नाचते हुए कलियुग को आंख भी मारती है जिसे रघु देखकर एकदम से गुस्से में हो जाता है। और चिढ़कर वंहा से चला जाता है।

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लेकिन तभी पंखुड़ी का पैर फिसल जाता है इसलिए वह गिर जाती है। स्कूल के सभी स्टुडेंट्स हसने लगते है।

पंखुड़ी के चेहरे की मुस्कान एकदम से चली जाती है और वह शर्मिंदा होकर जाने लगती है तभी मंच पर कलियुग दिखाई देता है।

जिसे देखकर सब चुप हो जाते है। संगीत दुबारा बजना शुरू हो जाता है। कलियुग पंखुडी के साथ नाचता है जिसे देखकर वंहा खड़े सभी स्टूडेंट्स एकदम से चोंक्त जाते है।

जैसे ही दोनों नाचना बन्द करते है अचानक ही सब तालिया बजाने लगते है कलियुग पंखुड़ी का हाँथ पकड़कर मंच के पीछे ले आता है।

पंखुड़ी जल्दी से कलियुग के गले लग जाती है।

धन्यवाद! कलियुग! पंखुड़ी ने मुस्कराते हुए कहा।

इसमे धन्यवाद कैसा? कलियुग इतना कहकर पंखुड़ी की जुल्फे उसके कान के पीछे कर देता है जो कि उसके चेहरे पर आ रही थी।

तुम सच मे बहुत अच्छे हो चलो मै अपने कपड़े बदलके आती हूँ! इतना कहकर पंखुड़ी चली जाती है।

क्या मुझे अपने दिल की बात पंखुड़ी को बता देनी चाहिए? कलियुग यही सोचता हुआ बस एक कुर्सी पर बैठ जाता है।

तभी कलियुग को कुछ सुनाई देता है जिसमे कुछ लड़के पंखुड़ी के बारे में बात कर रहे थे। कलियुग बस शांत होते हुए चुपचाप उनकी बाते सुनना लगता है।

यार क्या माल है सच मे! एक लड़के ने कहा।

सच मे यार में इसके साथ तो बस एक रात मिल जाये! दूसरा लड़का भी बोलता है।

पंखुड़ी के होंठ भी बिल्कुल किसी पंखुड़ी जैसे ही है! इतना कहकर तीसरा लड़का हँसने लगता है और उसके साथ उसकेके दोनों दोस्त भी हंसने लगते है।

दूसरी तरफ, 

जैसे ही कपड़े बदलकर पंखुड़ी बाहर निकलती है तभी उसकी नजर रघु पर जाती है। जो कि बिल्कुल शांत खड़ा हुआ था।

अरे रघु तुम यंहा? पंखुड़ी ने रघु को देखते हुए कहा।

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मुझे तुमसे बहुत ही महत्वपूर्ण बात करनी है पंखुड़ी क्योंकि अब मै तुमसे और नही छुपा सकता हूँ! रघु इतना कहकर सिर झुका कर खड़ा हो जाता है।

क्या बात है रघु? पंखुड़ी ने अजीब नजरो से रघु को देखते हुए कहा। 

दरअसल कलियुग ने तुमसे झूठ बोला है और वो तुम्हे धोखा दे रहा है! रघु ने कहा। 

क्या मतलब है तुम्हारा? पंखुड़ी ने चिड़ी हुई नजर से देखते हुए पूछा 

मतलब ये है की कलियुग अपने आप को जैसे दिखाता है वो वैसा नहीं है वो एक जानवर की तरह है जो सिर्फ कमजोरो को पीटना जानता है

क्या बकवास कर रहे हो? पंखुड़ी ने चौंकते हुए कहा। 

ये ही सच है पंखुड़ी पूरा स्कूल उससे परेशान है! रघु ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा। 

लेकिन फिर किसी ने अभी तक मुझे ये बात क्यों नहीं बताई? पंखुड़ी ने झल्लाते हुए कहा। 

क्योंकि सब उससे डरते है यही नहीं सब उससे घृणा करते है! रघु ने कहा। 

मै ये बिलकुल भी नहीं मान सकती की कलियुग ऐसा है! पंखुड़ी इतना कहकर जाने लगती है। 

लेकिन अगर मेने ये बात साबित कर दी तो? रघु ने अजीब नजरो से देखते हुए पूछा। 

तो साबित करो फिर! पंखुड़ी ने गुस्से में कहा। 

 ठीक है तो चलो मेरे साथ! इतना कहकर रघु स्कूल की दूसरी तरफ ले जाता है जंहा पर पहले ही कलियुग और वो तीन लड़के खड़े होते है। वंहा जाकर पंखुड़ी और रघु बस चुपचाप देखने लगते है। 

दूसरी तरफ, 

कलियुग उन लड़को के सामने खड़ा हो जाता है उसकी आँखों में गुस्सा था। सभी लड़के कलियुग को देखकर चौंक जाते है। 

हमे माफ़ करदो कलियुग! उन लड़कियों ने गिड़गिड़ा कर कहा। 

लेकिन कलियुग उन्हें एक एक करके दूसरी तरफ फेंक देता है और उनके ऊपर लात रखकर गुस्से में देखता है। 

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अगर आज के बाद पंखुड़ी! इतना कहते ही कलियुग को पंखुड़ी की आवाज सुनाई देती है। 

कलियुग! मुझे नहीं पता था की तुम भी वैसे ही हो जिनसे में नफरत करती हूँ और साथ ही तुमने मुझे धोखा दिया है। 

लेकिन पंखुड़ी ये सब तो! कलियुग  इतना कह ही पाता है की पंखुड़ी उसकी बात फिर से बीच में काट देती है। 

कुछ मत बोलो तुम! इतना कहकर पंखुड़ी रोते हुए चली जाती है। 

कलियुग एक उदास चेहरे से बस उसे जाते हुए देखता रहता है। 

कलियुग बस दुखी होकर अपने घर चला जाता है और पंखुड़ी बस रोते हुए बैठ जाती है। तभी पूरा स्कूल के स्टूडेंट्स रघु के साथ उसके पास आते है। 

पंखुड़ी उसको छोड़ दो! रघु ने पंखुड़ी के कंधे पर हाँथ रखते हुए कहा। 

लेकिन उसने मुझे धोखा दिया है! पंखुड़ी इतना कहकर खडी हो जाती है। 

वो ऐसा ही है जिसे चाहे उसे पीट देता है। अपने राजा होने का और अपनी शक्ति का गलत फयदा उठाता है। 

लेकिन हम ऐसा अब नहीं होने देंगे। हम सभी बच्चो को उसके खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा वो एक साथ पुरे स्कूल से नहीं लड़ सकता है! पंखुड़ी ने जोश में कहा। 

 स्कूल के ऑडिटोरियम में पंखुड़ी और रघु पुरे स्कुल को इक्क्ठा करते है। 

सभी एक साथ बोलते है “बिलकुल सही कहा पंखुड़ी ने”

तो अब हमे क्या करना चाहिए? एक लड़के ने पूछा। 

कल हम सभी कलियुग से लड़ेंगे और उसको बताएँगे की वो सबसे शक्तिशाली नहीं है! अगर हम सब एक साथ हो जाये तो दुनिया की किसी भी ताकत को हरा सकते है। 

सभी खुश होकर पंखुड़ी के साथ चले जाते है लेकिन रघु और उसके साथी दोस्त एक शैतानी मुस्कराहट के साथ वंही खड़े होते है। 

हमारा काम हो गया। एक लड़के ने कहा। 

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असली काम तो कल होगा जब कलियुग हमारे सामने घुटनो पर होगा! रघु ने हँसते हुए कहा। 

क्या खेल खेला है सच में! सभी लड़के रघु की तारीफ करते है। 

रघु बस एक शैतानी मुस्कराहट के साथ कहता है

 “स्वागत है कलियुग” 

दूसरी तरफ, 

कलियुग बस चुपचाप सड़क पर चल रहा है। बारिश बहुत तेज़ हो रही है और बौछार कलियुग के चेहरे पर लगातार पड़ रही है लेकिन कलियुग बस चले जा रहा है। 

शायद ये सब मेरी गलती है! कलियुग अपने मन में ही अपने आप से कहता है। 

तभी एक छोटी बच्ची अपने छोटे से छाते के साथ उसके सामने खड़ी हो जाती है और नीचे झुकने के लिए कहती है। 

कलियुग बस कुछ बिना कहे नीचे झुक जाता है और वो बच्ची अपना छाता कलियुग के ऊपर कर देता है। 

कलियुग बस मुस्करा जाता है और  उस बच्ची को धन्यवाद कहकर चला जाता है। 

तुम कलियुग हो ना? उस बच्ची ने पीछे से आवाज लगाते हुए कहा। 

जी हाँ! कलियुग ने उस बच्ची को देखते हुए कहा। 

धन्यवाद! उस बच्ची ने कहा। 

लेकिन क्यों?  कलियुग ने अजीब नजरो से देखते हुए पूछा। 

क्योंकि तुमने मेरे छोटे भाई को उन गुंडों से बचाया था! तुम सच में बहुत अच्छे लड़के हो! इतना कहकर वो बच्ची चली जाती है। 

कभी कभी हमे झुक जाना उन रिश्तो के लिए जो हमसे भी ऊपर है! आज इस बच्ची ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। कल जाकर स्कूल मै पंखुड़ी से माफ़ी मांगूंगा! इतना कहकर कलियुग चला जाता है। 


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