कलियुग – एक श्रापित राजकुमार पार्ट 14

अध्याय – 14 विनाशकालय 

सुबह का समय, चारो तरफ एक शांत वातावरण चिडियो की चहचाहट का शोर सुनाई दे रहा है।

कलियुग अपने बिस्तर पर लेते हुए कुछ सोच रहा था।

उसके दिमाग में बस पंखुड़ी के लिए ही बाते चल रही है।

तभी कलियुग को आवाजे सुनाई देती है जिसकी वजह से कलियुग कमरे से बाहर आ जाता है तो सामने कलियुग के डेड बैठे होते है। 

कैसे हो बेटा? 

मै अच्छा हूँ डेड 

तुम मुझे बेचैन क्यों दिखाई दे रहे हो?

कुछ नहीं डेड 

क्या ये उस नई आई लड़की की वजह से है?

हाँ लेकिन आपको कैसे पता? 

हाहाहा पिता हूँ मै तेरा। 

कलियुग फिर सबकुछ अपने पिता को बता देता है। 

तो इसमें बेचैन होने की क्या ज़रूरत है उसको सच बता दो अगर वो तुम्हे पसंद करती होगी तो वह तुम्हारी आँखों में देख पायेगी की तुम बदल चुके हो! कलियुग के डेड ने जबाब दिया। 

क्या वो सच में ये समझ पायेगी? 

अक्सर हम जब चुप रहते है तो उससे चीज़े और बिगड़ जाती है इसलिए बात करना किसी समस्या को हल करने का पहला कदम होता है अब तुम नाश्ता करके जाओ और उसे सच बताओ! कलियुग के डेड इतना कहकर चले जाते है। 

कलियुग भी नाश्ता खत्म करके स्कूल की तरफ निकल जाता है

जैसे ही वो स्कूल में प्रवेश करता है तो पूरा स्कूल ही खाली होता है

मानो वंहा पर कोई भी ना हो। 

कलियुग बस चुपचाप स्कूल में जाने लगता है

तभी उसे महसूस होता है की एक हवा उसके चारो तरफ भवंडर बना रही है और जैसे ही वो भवंडर खत्म होता है

कलियुग एक मजबूत रस्सी में बंधा हुआ होता है।

साथ ही उसके पैर भी किसी पिंजरे में फंसे होते है।

कलियुग बस कुछ भी समझ नहीं पाता है की आखिर ये सब क्या हो रहा है। 

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तभी उसे ग्राउंड में सामने से पंखुड़ी आते हुए दिखाई देती है और उसके पीछे सभी स्कूल के सभी स्टूडेंट्स आते हुए दिखाई देते है। 

पंखुड़ी ये सब क्या है? कलियुग ने चौंकते हुए पूछा। 

पंखुड़ी कुछ भी नहीं बोलती है बस स्टूडेंट्स की तरफ देखती है।

तभी उन स्टूडेंट्स के बीचो बीच में से रघु अपने दोस्तों के साथ बाहर निकलते है। 

देखो मै तुम लोगो को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहता हूँ! कलियुग ने अजीब नजरो से  देखते हुए कहा। 

कोई भी अपनी शक्तियों को एक्टिवेट नहीं करेगा बस इसको ऐसे ही पीटना है! रघु स्टूडेंट्स की तरफ देखते हुए कहता है। 

इतना सुनते ही सभी स्टूडेंट्स गुस्से में कलियुग पर टूट पड़ते है और मारने लगते है जैसे की कलियुग कोई राक्षस हो जिससे मारना ज़रूरी हो

सभी लोग थप्पड़ घुसे और लातो से कलियुग को पीटने लगते है। 

कलियुग के बंधे होने के कारण वो कुछ भी नहीं कर पाता है और इसी तरह सब उसको पीटते रहते है। कलियुग का पूरा शरीर लाल हो चूका था और मुंह से खून निकलने लगा था। 

पंखुड़ी बस उसे ऐसे ही देखती रहती है। रघु कलियुग के पीछे से बाल पकड़कर कलियुग का चेहरा ऊपर की तरफ उठाता है। 

कलियुग की आँखों में पंखुड़ी को देखते ही आँसू आने लगते है मानो वह पंखुड़ी को कह रहा हो की जैसा वो उसके बारे में सोच रही है ऐसा कुछ भी नहीं है। 

 कलियुग का चोटिल चेहरा देखकर भी पंखुड़ी नहीं पिघलती है बस एक अजीब नजरो से देखती रहती है। 

जैसे ही कलियुग की आंखे पंखुड़ी की आँखों से मिलती है वो हलके स्वर में कहता है “पंखुड़ी” 

इतना कहकर कलियुग रोने लगता है उसकी आँखों में आंसू आ रहे थे

क्योंकि आज पंखुड़ी ने उसका दिल बिलकुल तोड़ दिया था। 

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इतने में ही रघु दुबारा से कलियुग के चेहरे पर एक  मुक्का जड़ देता है

कलियुग के मुंह से खून निकलने लगता है और जमीन पर गिर जाता है रघु कलियुग के गिरते ही उसके सिर पर अपनी लात रख लेता है। कलियुग की आंख से आंसू जमीन पर गिरता है तभी कलियुग एक भयंकर स्वर में चीखता है और चारो तरफ हवा का भवंडर बना देता है। 

जैसे ही भवंडर खत्म होता है। तो पिंजरे में कलियुग गायब होता है जैसे ही एक लड़का पीछे देखता है तभी उसके चेहरे पर कलियुग उछल कर एक मुक्का जड़ देता है तभी एक गोला कलियुग के आकर लगता है लेकिन कलियुग पहले ही भवंडर बना कर बच जाता है। 

अरे बेबकूफो उसपर शक्तियों का प्रयोग मत करो वार्ना वो  हम सबको मार देगा! रघु गुस्से में सबको समझाता है। 

लेकिन तभी एक भवंडर में से कुछ गोले बाहर की तरफ निकलते है और सभी की तरफ जाते है जिससे बचने के लिए सभी अपनी शक्तियों का प्रोयग करते है तभी फिर से भवंडर गायब हो जाता है और अब एक खाली जगह पर कलियुग खड़ा होता है। 

एकदम से उसकी आंखे हरे रंग की हो जाती है। जिसे देखकर सभी के पसीने आने शुरू हो जाते है क्योंकि हो ना हो कलियुग ने अब सभी की शक्तिया महसूस कर ली होगी। 

कलियुग तेज़ी से हवा की तरह भागते हुए आता है और खुद आग का बनकर आग के गोले बरसा देता है। 

इससे पहले की सभी स्टूडेंट्स कुछ समझ पाते आसमान में बिजली चमकने लगती है ये देखकर सभी स्टूडेंट्स भागने लगते है लेकिन तभी बिजली सबके ऊपर गिरने लगती है साथ ही कलियुग भी हवा में उड़ जाता है और अपने हांथो में बिजली पकड़कर रघु के एक दोस्त के छाती में घुसा देता है। 

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सभी स्टूडेंट्स स्कूल के अंदर भागने लगते है कलियुग गुस्से में आसमान की तरफ देखता है और फिर आसमान से बिजली का एक बड़ा झटका स्कूल की छत पर जाकर गिरता है जिससे पूरा स्कूल तहस नहस हो जाता है। 

कलियुग के बाल उड़ रहे होते है वह रघु की तरफ देखता है तो रघु गुस्से में हाँथ से आग के गोले बनाता है लेकिन इससे पहले ही कलियुग उसको भवंडर में फंसा देता है और जैसे ही वह भवंडर से बाहर आता है तभी एक आग का गोला रघु को पीछे की तरफ फेंक देता है। 

रघु घायल गिरा हुआ था तभी सामने से कलियुग आते हुए दिखाई देता है। रघु के चेहरे पर माफ़ी के भाव थे लेकिन कलियुग अपने हाँथ में फिर भी एक आग का गोला बना लेता है पर जैसे ही कलियुग रघु पर वो आग का गोला फेकने वाला होता है तभी पेड़ो की कुछ टहनिया कलियुग का हाँथ जकड लेती है। 

कलियुग उन टहनियों को तुरंत ही आग से जला कर खत्म कर देता है और दूसरी तरफ देखता है तो सामने पंखुड़ी खड़ी होती है।

कलियुग एक भवंडर में गायब होते हुए सीधा एक झोंका पंखुड़ी को उठाकर फेंक देता है जैसे ही पंखुड़ी सामने देखती है तभी एक घुसा बना हुआ हाँथ पंखुड़ी की तरफ बढ़ता है। 

लेकिन कलियुग पंखुड़ी का चेहरा देखकर रुक जाता है। कलियुग पंखुड़ी का चेहरा देखकर रुक जाता है। 

कलियुग की आँखों में आंसू थे वो एक जानवर की तरह ही लग रहा था। 

देखो खुद को कलियुग तुम एक जानवर की तरह ही हो तो कोई कैसे तुम्हारा दोस्त बन सकता है? पंखुड़ी ने रोते हुए कहा। 

कलियुग चारो तरफ देखता है तो सब लोग घायल पड़े हुए थे और स्कूल पूरा तहस नहस हो चूका था। 

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सही कहा मै एक जानवर ही हूँ! इतना कहकर कलियुग बस शांत चेहरे के साथ वापस चला जाता है। 

दो दिन बाद, 

कलियुग अपने बिस्तर से उठता है और चुपचाप नाश्ते की मेज के पास आकर बैठ जाता है। तभी कलियुग के पिता नाश्ता लेकर आते है। 

गुड मॉर्निंग! कलियुग के पिता एक मुस्कराहट के साथ कहते है। 

मुझे माफ़ कर दीजिये डेड! कलियुग ने सिर नीचे करते हुए कहा। 

लेकिन किसलिए? कलियुग के डेड कलियुग के बालो को सहलाते हुए पूछते है। 

कलियुग सोचने लगता है की उस घटना के अगले दिन क्या हुआ था। 

अगले दिन, कलियुग को और उसके डेड को स्कूल के प्रिंसिपल ऑफिस बुलाया गया था। सभी स्कूल के बच्चे घायल थे और ज्यादातर तो इतने जोखिम में थे की स्कूल आने की हालत में ही नहीं थे। स्कूल की आधी ईमारत गिर चुकी थी। 

कलियुग और उसके डेड जब प्रिंसिपल ऑफिस जाते है। तो प्रिंसिपल चुपचाप बैठा होता है। 

आइये अजय विश्नोई जी! प्रिंसिपल ने कलियुग के पिता को देखते हुए कहा। 

जी आपने बुलाया था मुझे! कलियुग के पिता ने पूछा। 

जी दरअसल ये स्कूल का हाल जो आप देख रहे है वो आपके  लड़के ने ही किया है आप मेरे दोस्त थे इसलिए मै कलियुग को बचा रहा था लेकिन अब कमेटी का फैसला है की वो कलियुग को उग्र हिंसा करने की वजह से स्कूल से निकाल रहे है! प्रिंसिपल ने जबाब दिया। 

मै समझ सकता हूँ! कलियुग के पिता एक लिफाफा लेकर चले जाते है। 

कलियुग और उसके पिता  स्कूल की गैलरी से जा रहे थे

तभी उन्हें पंखुड़ी दिखाई देती है जो की कलियुग को एक नरम भाव से देख रही थी

लेकिन कलियुग के मन और दिमाग में बस पंखुड़ी की ही बाते चल रही थी की वो एक जानवर है। 

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कलियुग बस अपना सिर निचा करके अपने पिता के साथ चला जाता है उसके पिता उसका हाँथ जोर लगाकर पकड़ लेते है।

पंखुड़ी की आँखों में आंसू और कलियुग के लिए गुस्सा दोनों था। 

कलियुग बस यही सब सोचते हुए अपने पिता से कहता है की 

“की  क्या मुझे अपनी पढाई का यही अंत करना होगा?

नहीं मेरे बच्चे! मैने शहर से दूर एक अच्छे स्कूल में तुम्हारा एडमिशन करवा दिया है और वंहा पर हमारा पुराना घर भी है जंहा तुम रह सकते हो लेकिन मै अपने काम की वजह से नहीं आ पाउँगा! कलियुग के पिता ने मुस्कराते हुए जबाब दिया 

लेकिन मै आपको छोड़कर कंही नहीं जाने वाला हूँ! कलियुग ने अपने पिता को गले लगाते हुए कहा। 

मै बीच बीच में आता रहूँगा मेरे बच्चे तुमसे मिलने! कलियुग के पिता ने जबाब दिया। 

अगले दिन, 

सुबह का समय, कलियुग अपने बैग पैक कर रहा है और दूसरी तरफ कलियुग के पिता उसे आवाज देते है। 

कलियुग तुम्हे देर हो जाएगी! कलियुग के पिता ने कहा। 

जी डेड, बस आया! इतना कहकर कलियुग अपना बेग उठा कर घर से बाहर आता है जंहा पर बाहर कलियुग के पिता और एक टेक्सी खड़ी होती है। 

तो समय आ गया है की जब तुम अकेले रहोगे एक आजाद पंछी की तरह! कलियुग के पिता ने कहा। 

जी डेड! कलियुग ने मुस्कराते हुए कहा। 

मुझे आशा है की तुम अपने नए स्कूल की इमारत नहीं गिराओगे! कलियुग के पिता ने हँसते हुए कहा। 

उसके लिए मुझे माफ़ कर दीजिये डेड! कलियुग ने उदास होते हुए कहा। 

एक बात हमेशा याद रखना कलियुग की तुम एक जानवर नहीं हो क्योंकि तुम्हारे पास एक खूबसूरत दिल है जैसा की और लोगो के पास होता है! कलियुग के पिता ने कलियुग के सिर पर हाँथ फेरते हुए कहा। 

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कलियुग इतना सुनते ही वापस अपने घर के अंदर जाता  है और अपनी मां की फोटो फ्रेम को उठाकर अपने सीने से लगा लेता है। 

मै अब अपनी शक्तियों का इस्तेमाल तब तक नहीं करूँगा जब तक मुझे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है! इतना कहकर कलियुग वापस बाहर आकर टेक्सी में बैठ जाता है और जब टेक्सी चलने लगती है तब बस पीछे वाले शीशे से अपने पिता को देखता रहता है। 

तो बस यही थी मेरी बीते हुए कल की कहानी की क्यों मै अपनी शक्तियों का प्रयोग नहीं कर रहा था और कमजोर लोगो की तरफ जिंदगी जी रहा था! इतना कहकर कलियुग खड़ा हो जाता है। 

उसे देखकर रूमी, जीवा  कुणाल भी खड़े थे। 

मै तुम्हारे साथ हमेशा रहूंगी कलियुग! जीवा कलियुग को गले लगा  लेती है।

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