कहानी – नाबालिग विवाह

नितिन अग्रवाल

   कहानी का भाग पहला

पलक बचपन के उस पड़ाव से निकल 15 की हो चुकी थी ! जहाँ कुछ समय पहले सब पलक को एक बच्ची की नज़रों से निहारा करते थे ! वही कुछ लोग ने अपनी उन आँखों को  आज हैवानियत की चादर से ओढ़ रखा था ! इन सब में गलती पलक की एक दम ना थी ! पलक थी ही इतनी सुन्दर ! जो उसे पहली बार देख ले ! वह उसके मन मेँ बस जाती थी !

सुबह स्कूल की यूनिफार्म उसको और भी सुन्दर बना देती थी !प्यूर सफ़ेद रंग की यूनिफार्म उसके शरीर की शोभा बड़ा देता था !

पलक के पिताजी उसके इस स्वाभाव को मन ही मन महसूस करते थे ! भविष्य की कुछ उच नीच उनको परेशान करने लगी थी ! पलक के पिताजी रात दिन उसके बारे मेँ सोचते रहते थे !उनके मन का दुख भी लाजमी था !

कुछ साल पहले अपने पुराने गाँव को छोड़ने का एकमात्र कारण वही था ! अपने भाई की बेटी के संग हुआ बलात्कार !

यही बात सोच सोच सूरज भान रात दिन  जल रहे थे !

उसी वक़्त एक दिन सूरज को गाँव से बहार जाना था  ! सूरज भान की चिंता थी कि वह अपनी जान से प्यार करने वाली बेटी को किसके हाथ सौप करके जाये ! पलक की माँ का देहांत पलक के जन्म के दो माह बाद टीवी की बीमारी से हो गया था ! सूरज को गाँव मेँ किसी के ऊपर भरोसा ना था ! लेकिन घर के बिलकुल बगल मेँ एक ललिता मौसी रहा करती थी जिन्हे सब प्यार से लाली लाली मौसी कह कर पुकारते थे !

सूरज पलक को उनकी देख रेख में छोड़ गए !

पलक को जो गन्दी नज़रो से देखा करते थे ऐसा लग रहा था उन्ही को सूरज खुद अपनी बेटी छोड़ गया हो ! लाली मौसी का पति भी इस सूची मेँ गिना जाता था ! लेकिन सूरज इस बात से बिलकुल अनजान था !

ज़ब मौसी के पति अमर नाथ को इस बात का पता लगा ! वह दौड़ा दौड़ा घर आया !वह  पलक को देख, ऐसा लगा सब कुछ भूल गया हो ! पलक इस बात से बिल्कुल अनजान थी ! पलक उनको मौसाजी की नज़रों से उनका स्वागत करती थी ! लेकिन अमर नाथ उसको अपना हवस का एक मोहरा समझते थे ! अमर के घर खुद 10 साल की बेटी रहती थी !

दिन ने भी अपना समय पूरा कर रात को अपनी जगह दे दी थी ! छत की जमीन गर्मी होने से सबको अपनी जगह सुबह होने तक परिबार के सभी सदस्य को दे चुकी थी ! मगर अमर नाथ की करबट पलक के शरीर से हटाने को तैयार ना थे ! अमर नाथ सुबह से शाम उसको छूने को बेताव था ! रात का अंधेरा उसको अपनी इस इच्छा पूरी करने का एक मात्र सहरा दिखा !

                         कहानी का भाग दूसरा

पलक छत पर तारों की रौशनी और चन्द्रमा की लाली से आँखों के इशारो से बात कर रही थी ! दूसरी तरफ उसका मन काफ़ी बेचैनी से धड़क रहा था ! या यह कहिये आज से पहले वह कभी अपने पिताजी के बिना ना रही थी ! सब गहरी नींद मेँ जा चुके थे ! पलक अपने पापा के लिए और अमर नाथ पलक के लिए सोये नहीं थे !

काफ़ी रात होने के कारण पलक को नींद आ गयी थी ! कुछ इंतज़ार के बाद अमर नाथ अपनी जगह से उठ पानी पिने नीचे चला जाता हैँ !  तभी अचानक अमर नाथ की बेटी की आवाज़

पानी की पुकार आती हैँ ! जिसके लिए पलक भी उसको नीचे ले जाती हैँ ! तभी अमर नाथ को वहां पाकर पलक कहती हैँ मौसाजी यदि आप को पानी चाइये था ! तो आप हम से कह देते !

पलक यदि हम मांगते तो तुम हम को दे देती ! हाँ मौसा जी !

पलक उसकी इस अश्लीलता से बिल्कुल अनजान थी ! अमर

नाथ के शब्दों का कमीना पन पलक समझ ना पायी थी ! तभी अचनाक अमर नाथ ने पलक के पास जा कर उसको अपने गले लगा लिया ! और उसको गलत इरादों से छूने लगा !

मौसाजी छोड़ो मुझे लग रहा हैँ ! पलक ने कहाँ ! दीदी चलो ना ऊपर नींद आ रही हैँ ! 10 साल की बच्ची ने कहाँ ! जैसे तैसे पलक को सुबह का इंतज़ार था ! नींद का तो कही नाम ओ निशान था ! कुछ देर बाद नया सवेरा का आगमन उस काली रात का समापन हुआ !

पलक अपने शरीर से उस एहसास को अपने से दूर नहीं कर पा रही थी ! अपना ही शरीर उसको कोयले की काली राख़ जैसा लग रहा था ! पापा के प्यार और उनकी इज्जत रात के काण्ड को भूल जाने पर मजबूर कर रही थी !

अमर वही दूसरी तरफ गाँव के कुछ अपने दोस्तों को रात को हुए बाकया को बता रहा था ! धीर धीरे बात आग की तरह गाँव मेँ फैलने लगी ! सूरज जब शहर से बापस आया तो, इस बात ने उसको रोने पर मजबूर कर दिया ! तभी उसने उसकी शादी कराने का फैसला लिया !

गाँव मेँ फैली इस बात को वो नहीं रोक सकता था !इसी वजह से  पलक का रिश्ता पास के गाँव मेँ ही तय कर दिया !जिसे आज खेलने, अपनों के संग रहना चाइये था ! वो आज किसी पुरुष की हैवानियत की शिकार की वजह से ससुराल का चुला और अपने शरीर को दूसरे मर्द से नुचवा रही थी !

जिसे उसके बाप ने पास के गाँव मेँ शादी करवा अपना बोझ खत्म कर दिया था !जिस वजह उसके पेट मेँ एक नन्हे से बच्चे को खुद एक नाबालिग बच्ची ले घूम रही थी !! जो मर के भी नहीं मर रही थी !

समाप्त

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