कुछ तेरे मेरे पल – अभिषेक कुमार ‘अवनि’

मुक्तक

(1)
कि बादल रोज गरजते हैं मगर बरसात नहीं करते,
सुरों के साज भी दिल में…..कोई राग नहीं भरते,
यह कैसी मुश्किलें मुझको अता कर दी मेरे मौला,
वो हमसे प्यार करते हैं, मगर इजहार नहीं करते।।

(2)
मेरे दिल के दर्दों को अब में सह नहीं सकता,
मगर हालात ऐसे हैं कि कुछ कह नहीं सकता,
न कर सका तुमसे में इज़हार मुहोब्बत का,
तुम्हारे बिन मगर इक पल भी अब मैं रह नहीं सकता।।

(3)मेरा इंतजार करती है मेरा एतवार करती है
सदा रब से भी पहले जो मेरा दीदार करती है
मुझी पर मरती है वो,पागल है दीवानी है
तय है कि खुद ज्यादा मुझसे प्यार करती है।।

(4)कि कैसे भूल जाऊँ मैं, तुम्हें सरकार मेरे ओ!
मेरे दिल में धड़कते हो,तुम्ही दिलदार मेरे ओ!
मेरी माँग का सिंदूर, तुम्हीं माथे की बिंदी हो,
मेरे प्राणों में बसते हो,तुम्हीं भरतार मेरे ओ!

अभिषेक कुमार ‘अवनि’

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