कोरोना Vs शराब भट्ठी – shivanand soni

” कोरोना Vs शराब भट्ठी ”
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शराब भट्ठी में जबरदस्त भीड़ लगी हुई थी। हर वर्गो के लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर व दारू पीकर अपने – अपने गले को गीला करना चाह रहे थे। जिसे वो कोरोना से बचने के लिए दवाई के समान मानते है।

सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर अफरा – तफरी का भव्य नजारा देखने को मिल रहा था। भट्ठी में आसपास गिरे हुए बाँस भी ऐसे प्रतीत लग रहे थे कि बाँस भी काँप रहा था और कपकपाते हुए जैसे कह रहा हो – ए बेवड़े लोग मुझे जमीन में गाड़कर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन तो करो।

सभी दरूहा , बेवड़े लोग अपना दारू लेकर उस पल का सुखद अनुभव लेना चाहते थे जो उन्हें शराब पीने के बाद मिलने वाली थी। शराबियों का काउंटर में भव्य नजारा था ।
पहले दारू लेने को लेकर एक – दूसरे से छीना झपटी का बाजार सजा हुआ था। कोई बाइक से आया था तो कोई सायकल , कार , पैदल से आया था।

दारू लेने के लिए कोई थैला लाया था तो कोई प्लास्टिक वाली कैरी बैग तो कुछ लोग अपने – अपने गमछे में शराब की बोतल को बाँध रहे थे और अपने गले में किसी नाग साँप के समान लटका रहे थे जिसे वो अपना ” कोरोना कवच ” समझ रहे थे ।

कोई मास्क बाँध के आया था तो कोई रूमाल , गमछा बाँध कर तो कोई बिना मास्क लगाए हुए अपनी बत्तीसी दिखाते हुए अर्थव्यवस्था में योगदान हेतु बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे थे।

कई शराबी तो भट्ठी के पास चखना , पानी लेकर वही पर अपने गले को गीला कर रहे थे। एक शराबी तो गाना गा रहा था – चखना वाले बाबू मेरा चखना दे दो , चखना दे दो।

दूसरे शराबी भी गाना गुनगुनाते हुए व्यस्त थे । भांचा मैं शराबी बन गया , भांचा मैं शराबी बन गया – चखना मेरा दे दो , पानी पाउच दे दो , डिस्पोजल दे दो , भांचा मैं तो शराबी बन गया ।

तीसरा शराबी – M बोले तो बोले तो M बोले तो महुआ रे महुआ , B बोले तो बोले तो B बोले तो बेवड़ा मैं बेवड़ा .. C बोले तो बोले तो C बोले तो चखना रे चखना , D बोले तो बोले तो D बोले दरूहा मैं दरूहा ।

अन्य शराबी – इधर पिया मैं उधर पिया जाने कहाँ मैं किस भट्ठी में पिया , लेकिन मैं दारू पी ही लिया।

वहाँ खड़े हुए स्थानीय संवाददाता ने जब उनसे कोरोना से बचने हेतु सलाह दिया कि आप लोग शराब खरीदते समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन तो करे , आप लोगो को कोरोना से डर नही लगता क्या ?

तो वहाँ पे खड़े हुए ” क्षेत्रीय शराबी संघ ” के सदस्य ने ऊँचे स्वर में चिल्ला कर कहा –
ओए कौन सा कोरोना …
अबे ओ कोरोना तू हमको ना होना
जा बे कोरोना , पतली गली से तू निकल ही जाना ।

” क्षेत्रीय शराबी संघ ” के अन्य सदस्यों ने स्थानीय संवाददाता को समझाया – देख भांचा , हमन दारू पी कर देश , प्रदेश के अर्थव्यवस्था म योगदान देथन , अउ तोला का चाही , तै काबर शराबी लोग के पाछू पड़े हस ?
संवाददाता ने कहा – जनता की माँग है कि शराब बन्द होना चाहिए ।

यह सुनकर एक शराबी का दिमाग गर्मा गया उसने कहा देख भांचा फालतू के सवाल मत कर , तुम लोग अपने चैनल में शराब के नुकसान ही दिखाते रहते हो , कभी एक्सपर्ट पैनल में हम शराबियों को बुलाओ तो हम वहाँ आकर शराब के फायदे ही फायदे बताएंगे।

आप भी देख रहे हो शराब भट्ठी खुलने से अर्थव्यवस्था में किस प्रकार की तेजी आई है। शराब बन्द नही होना चाहिए ।

अगर शराब बन्द हुआ तो ” क्षेत्रीय शराबी संघ ” सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए कोने – कोने तक आंदोलन व एतिहासिक रैलियाँ करेंगी । सुनो पत्रकार बंधु लो आप भी शराब ( दारू ) पियो व कोरोना से बचो ।

नोट – व्यंग्य लेख है , कृप्या शराबी इसे
पढ़कर अपना दिमाग गर्म ना करें ।
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शिवानंद सोनी ( शिवा )

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