” गुपचुप वाले की वापसी – shivanand soni

” गुपचुप वाले की वापसी ”
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चूँकि इस राक्षस रूपी कोरोना महामारी से सभी का जीवन उथल – पुथल हो गया था । लेकिन धीरे – धीरे अब सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान , ठेले , हॉटल खुलने लगे है। इसी के साथ गुपचुप ठेले वाले वाले जो लॉक डाउन में सब्जी बेचा करते थे वे अपनी गुपचुप ठेला को चलाने लगे है ।

लड़कियों के चेहरो में एक अलग ही खुशियाँ देखने को मिल रही है । वैसे गुपचुप वाला भी सब्जी बेच बेच कर परेशान वो गया था । गुपचुप ठेला खुलने के साथ अब उसके दुकान में भारी संख्या में लड़कियों का आना व उसके अर्थव्यवस्था में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी ।

लड़कियों का ” गुपचुप प्रेमियों का संघ ” ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है व सरकार का आभार व्यक्त किया है। नेता भी कह रहे है कि अगली बार आप लोग हमें जरूर वोट दे । हम लोग ‘ गुपचुप योजना ‘ लाने पर भी विचार कर रहे है ।

लड़कियाँ गुपचुप खाते हुए उसकी सेल्फ़ी लेकर अपने सोशल मीडिया स्टेटस में डालकर खुशियों का इजहार कर रही है। कुछ लड़कियों ने तो ” ठेला से आया गुपचुप वाला , मेरे लिए लिए गुपचुप लाया ” वाले गाने में डांस करके खुश हो रही है ।

कुछ लड़कियों ने तो अपने बॉय फ्रेंड को यहाँ तक बोल दिया है कि 3 महीनो में जो तुमने हमें पिज्जा , गुपचुप , मोमोस आदि ना खिलाकर अपने पैसे बचाये है उस पैसो का हमे प्रतिदिन गुपचुप खिलाना और वो भी ब्याज के साथ .. बॉय फ्रेंड भी गुस्से को काबू में रखकर कह रहे है तुम लोग तो गुपचुप वाले को भैया – भैया बोलकर एक्सट्रा गुपचुप खाते हो और अलग से सूखी पापड़ी मांगकर खा ही लेते हो , अब तुम लोगो को गुपचुप में क्या ब्याज चाहिए ।

कुछ लड़कियाँ अपने सहेलियों के साथ में जाकर ठेले में गुपचुप, चाट खा रही है । एक युवती जो अपने सहेली को गुपचुप खाने के लिए आमंत्रित की थी उसकी सहेली को तैयार होने में वक्त लग रहा था जैसे – मेकअप करना , कौन सा ड्रेस गुपचुप के साथ मैचिंग होगा आदि उसने भी अपनी सहेली को कह दिया – ” बहन तू चल , मैं आई आई आई , मैं जल्द ही आई ” ….

गुपचुप ठेला वाला भी अपने इर्द – गिर्द गुपचुप प्रेमियों को देखकर खुशी से झूम उठा जा रहा है ।
गुपचुप ठेले वालों की घर वालियों ने भी अपने पतियों को सख्त हिदायत दे रखा है कि तुम सिर्फ गुपचुप , चाट बेचने में ही ध्यान देना , लड़कियों को घूरने के चक्कर में उन्हें ज्यादा गुपचुप ना खिला देना

गुपचुप वाला भी कहता है तेरे महाभारत सुनने से अच्छा है मैं दिन रात गुपचुप ही बेचा करूँ। गुपचुप ठेले के पास एक फल ठेला वाला भी सोच रहा है कि अब मैं भी फल ठेले के साथ गुपचुप ठेला भी खोलूँगा …..

नोट – व्यंग्य लेख है , सीरियस ना लेवे ……

शिवानंद सोनी ( शिवा )

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