जैक द रिपर एक अज्ञात सीरियल किलर लास्ट पार्ट

आपराधिक रूपरेखा

अक्टूबर अंत में रोबर्ट एंडरसन ने पुलिस सर्जन थॉमस बांड से कातिल की शल्य कौशल और ज्ञान के बारे में उनकी राय माँगी |

बांड द्वारा वाइटचैपल के कातिल की जो छवी पेश की गयी

वह सबसे पहली आपराधिक रूपरखा थी |

बांड का आंकलन उसके द्वारा किये गए एक शिकार की जाँच

और पहले के ४ कैनोनिकल कत्लों के पोस्ट मोर्टेम रिपोर्ट से बनाया गया था |

उसने लिखा :

पाँचों क़त्ल बिना किसी शक के एक ही आदमी का काम हैं |

पहले चार कत्लों में गर्दन को उलटे से सीधे हाथ की तरफ को काटा गया ,

आख़िरी के क़त्ल मं ज्यादा ज़ख्म दिए जाने के कारण ये पता कर पाना मुश्किल है

की जान लेवा ज़ख्म कहाँ दिया गया लेकिन जहाँ औरत का सर गिरा था

वहां पास की दीवार पर खून के छींटे गिरे हुए थे |

इन सब परिस्थितियों से में ये मानता हूँ की ये औरतें क़त्ल के वक़्त लेटी हुईं थी

और हर मौके पर पहले गले को काटा गया है |

बांड इस विचार के खिलाफ थे की कातिल को किसी तरह का शल्य ज्ञान है

या फिर वह कोई कसाई या घोडा मारने वाला है |

उनकी राइ में कातिल कोई अकेलेपन से त्रस्त आदमी था ,

जिसको मन में कभी कभार हिंसक और कामुक उन्माद जन्म लेते थे

उसके द्वारा की गयी त्रासदी उसकी कामिक्छा का चरित्र दर्शाती है |

बांड ने ये भी कहा की ये हिंसक उन्माद मन में बदले की भावना से उत्पन्न हो सकती है

या फिर धार्मिक पागलपन भी बीमारी हो सकती पर मेरा ऐसा मानना हे

की ये दोनों ही संभावनाएं गलत हैं |

किसी भी शिकार के साथ योन उत्पीरण के कोई सबूत नहीं मिले हैं

फिर भी मनोवैज्ञानिकों का मानना है की शिकार को चाकू से काटना

और उन्हें अपमानजनक स्थिती में घावों को दर्शाते हुए छोड़ना

jack the ripper victims book

ये साबित करता है की कातिल इन हमलों से योन सुख हासिल करता था |

इस विचार को कई लोगों ने बेबुनियादी मान ख़ारिज कर दिया |

विरासत

कत्लों के चरित्र और शिकारों की अवस्था ने ईस्ट एंड के बुरे हालातों की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित किया

और इन भीड़, और मलिन बस्तियों की तरफ लोगों का रवैय्या बदल दिया |

कत्लों के दो दशकों के बाद इन बस्तियों को नष्ट कर दिया गया ,

पर कुछ गलियां और इमारतें अभी भी सलामत हैं और रिपर की कहानी पर्यटकों को बताने में मददगार साबित होती हैं |

कमर्शियल स्ट्रीट में स्थित टेन बैल्स में एक शिकार का आना जाना रहता था

और कई सालों तक वह शहर के टूर का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा |

२०१५ में ईस्ट लन्दन में जैक थे रिपर संघ्रालय की शुरुआत हुई |

कत्लों के एक दम बाद ” जैक द रिपर” बच्चों का बोगीमैन बन गया |

उसक स्वरुप भयानक और राक्षसीय होने लगे |

१९२० और १९३० क दशकों में उसे रोज़ के कपडे पहने एक ऐसे आदमी की तरह दिखाया गया जिसका एक राज़ है और जो अपने मासूम शिकारों पर हमला करता था ; वातावरण और बुराई को रौशनी के बदलाव से दर्शाया गया |

१९६० के दशक तक रिपर को हिंसक अभिजात वर्ग के प्रतीक की तरह टोपी पहने और जेंटलमैन की तरह तैयार दिखाया जाने लगा |

संस्था दुश्मन बन गयी और रिपर उपरी वर्ग के शोषण का चिन्ह बन गया |

रिपर की छवि डरावनी कहानियां जैसे ड्राकुला का क्लोअक और विक्टर फ्रंकेंस्तींस के ऑर्गन हार्वेस्ट से मेल खाने लगी |

रिपर की काल्पनिक दुनिया शर्लक होम्स से लेकर जापानी कामुक और डरावनी कहानियां कई शैलियों के साथ फ्यूज कर सकते हैं।

विरोधाभासों और समकालीन खातों की अविश्वसनीयता के अलावा, जीवित फॉरेंसिक सबूत के अभाव के कारण असली हत्यारे की पहचान करने के प्रयास में बाधा उत्पन्न होती रही |

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मिली हुई चिट्ठीयों के डीएनए एनालिसिस से कुछ हासिल नहीं हुआ , ये जानकारी कई लोगों के हाथों में पड़ी और इसिलए वह सही नतीजे नहीं दे पायेगी |

कई ऐसे दावे हुए की डीएनए सबूत दो अलग अलग संदिग्ध बताते हैं, और दोनों ही की कार्यप्रणाली की आलोचना की गई है |

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