जोकर एक शिकारी जासूस सीजन 2 पार्ट 1

अध्याय – 1 शिकारी जाल

1 फरवरी 1998, 

लंदन, ब्रिटिश असेम्बली 

ठंड का मौसम है। चारो तरफ पतझड़ है और हल्की नई कलिया खिल रही है। ठंडी ठंडी हवाएं चल रही है। भारत से लंदन आने वाली फ्लाइट लंदन सिटी एयरपोर्ट पर आ चुकी है। विशाखा विदूषक रोनित कौशल और जिया सभी अपना बैग तांगे एयरपोर्ट से बाहर निकलते है। 

चलो आखिरकार हम जोकर को देखने मे कामयाब तो होंगे! जिया ने खुश होते हुए कहा।

हां जोकर वैसे आज तक छुप कर रहा है लेकिन कम से कम आज वो हमपर विश्वास करके हमसे मिलने आ रहा है! कौशल ने खुश होते हुए जबाब दिया।

लेकिन जोकर हम सबको लेने के लिए गाड़ी भेजने वाला था है ना! रोनित ने बाहर गाड़ी ना देखते हुए चोंकते हुए पूछा।

कोई बात नही रोनित हम थोड़ी देर बाहर इंतज़ार कर लेते है! विशाखा चुपचाप दूसरी तरफ बाहर बैठने वाली कुर्सी की तरफ इशारा करती है।

दूसरी तरफ, 

एक घर जिसके सामने एक छोटा सा पार्क है। पार्क के बगल से एक गली जा रही है। जंहा छोटी ठेलो ने अपना व्यवसाय जमा रखा है। घर के अंदर एक नीचे एक गोदाम है। जंहा पर बस एक ही बल्ब लगा हुआ है। जिसके नीचे एक टेबल रखी हुई है। उस टेबल पर कई तरह की चीज़ें रखी हुई है जैसे कि ट्रांसमीटर, बन्दूक और दूसरी जरूरी चीज़े। जोकर अपना नकाब साफ कर रहा है। 

तभी एक फोन बजता है। जोकर उस फ़ोन को उठाता है। 

काम हो गया है सर! उधर से आवाज आई।

जोकर एक शिकारी जासूस

बहुत बढ़िया! अब उस जगह से सौ मीटर की दूरी पर है एक चर्च है जंहा पर पादरी के पास पैसों से भरा ठेला होगा वंहा से वो ठेला लेकर लंदन के क्लॉक हाउस के सामने वाले पार्क में बेंच नम्बर 34 पर एक आदमी बैठा होगा। तुम वो ठेला उसे दे देना! इतना कहकर जोकर चुप हो जाता है।

ठीक है सर! उधर से इतनी आवाज आते ही जोकर कॉल कट कर देता है। 

जोकर एक मुस्कान के साथ अपना नकाब पहनता है और फिर एक शैतानी मुस्कराहट के साथ कहता है।

“ताश के पत्तो में बादशाह गुलाम बेगम और इक्का होते है लेकिन सिर्फ जोकर ही है जो किसी भी पत्ते का भेष बदल लेता है”

जोकर इतना कहकर खड़ा हो जाता है और कपड़े पहनने में व्यस्त हो जाता है। 

दूसरी तरफ, 

विशाखा, जिया, रोनित, कौशल और विदूषक के सामने एक गाड़ी आकर रुकती है और उसमें से एक ड्राइवर निकलता है जिसके हाँथ में विशाखा के नाम वाली नाम प्लेट थी।

सभी लोग उस गाड़ी की तरफ बढ़ जाते है और उसे अपनी आईडी दिखा कर गाड़ी में बैठ जाते है।

लंदन काफी खूबसूरत लग रहा है। सूरज डूब रहा था। जो कि लंदन को खूबसूरती को और निखार रहा था। सभी गाड़ी में बैठे लंदन की सड़कों को देख रहे थे।

फिर गाड़ी नार्थ हिल की तरफ बढ़ जाती है। विशाखा को थोड़ा अजीब लगता है इसलिए वह धीरे से अपनी बन्दूक निकालती है। गाड़ी अपनी रफ्तार से चल रही थी। फिर एक रेस्टोरेंट के सामने रुक जाती है। 

गाड़ी दो मिनट तक ऐसे ही रुकी रहती है फिर एकदम से जोरदार धमाका होता है और गाड़ी के चिथड़े उड़ जाते है। 

तभी जोकर के पास फ़ोन आता है जोकर अपना नकाब पहने शीशे में देखता है। 

जोकर एक शिकारी जासूस

काम हो गया सर! उधर से फिर आवाज आई।

इतना सुनकर जोकर फ़ोन काट देता है और एक हंसी के साथ कहता है

“सब जानते मै कैसा, ना जानते की क्यों है

चाहिए ना पैसा, कत्ले आम करता क्यों मैं

जेंटलमैन था मै, कैसे लोफर बना

शरीफ लड़के से मै, कैसे जोकर बना?” 

दूसरी तरफ, 

1 फरवरी, 1998

त्रिनेत्रा हेडक्वार्टर, मुंबई

चारो तरफ बारिश हो रही है। त्रिनेत्रा के हेडक्वार्टर में चारो तरफ चहलकदमी का माहौल है। सब तरफ लोग फैले हुए है। डायरेक्टर सुधीर अपने केबिन में बैठे हुए है। तभी केबिन में एक शख्स अपना लैपटॉप लिए आता है।

सर ये देखिए! वो शख्स सुधीर को उस गाड़ी का बम ब्लास्ट दिखाता है।

इसमे क्या हुआ? सुधीर चोंकते हुए पूछा।

सर हमारे सूत्रों से पता चला है कि उसमें विशाखा, विदूषक, जिया, रोनित ओर कौशल थे जो कि इस बम ब्लास्ट में मारे गए! उस शख्स ने जबाब दिया।

लेकिन हमारे सभी बेहतरीन जासूस एकदम से लंदन क्यो गए? सुधीर ने चोंकते हुए पूछा।

हमारे जासूसों ने पता लगाया है कि उनको जोकर ने बुलाया था! उस शख्स ने उदास होते हुए जबाब दिया।

इसका मतलब जोकर ने हमारे साथ गद्दारी की है उसने अपनी वफादारी बदल दी है वो जानता था कि सिर्फ यही टीम है जो उसे पकड़ सकती थी लेकिन ये उसकी बहुत बड़ी गलती है। रॉ, आईबी और दूसरी सभी खुफिया जासूसों को की आधिकारिक तौर पर अब जोकर भारत का गद्दार है और अभी तुरंत ही एक बेहतरीन जासूसी टीम बनाओ और लंदन भेजो! सुधीर ने गुस्से में अपने हाँथ पकटकते हुए कहा।

लेकिन सर वो जोकर है! उस शख्स ने घबराते हुए जबाब दिया।

जोकर एक शिकारी जासूस

मुझे जोकर चाहिए अब या तो जिंदा या मुर्दा क्योंकि उसके पीछे पाकिस्तानी जासूसी संघठन भी पड़े हुए इससे पहले वो उनके हाँथ लगे और भारतीय खुफिया जानकारी भी उनके हाँथ लगे उसे खत्म कर दो! इतना कहकर सुधीर अपनी कुर्सी से खड़ा हो जाता है।

ठीक है सर हम एक टीम बना कर लंदन भेज रहे है! इतना कहकर वो शख्स जाने लगता है।

सुनो जो टीम जोकर को मारने जाएगी उनकी पूरी जानकारी मुझे लाकर देना! सुधीर इतना कहकर जोकर को फ़ाइल ढूंढने लगता है।

2 फरवरी 1998, 

क्लॉक रॉड, लंदन 

तारीख इस्लाम की लड़की आयत इस्लाम क्लॉक रॉड पर घूम रही है। वह फ़ोटो खींच रही है। चारो तरफ लोगो की भीड़ है। उसके लम्बे बाल, आंखों में काला सुरमा और होंठो में एक प्यारी सी लाली, चेहरा एकदम गोरा शायद ये इसलिए था क्योंकि वो कश्मीरी थी। 

आयत लोगो को देख रही थी उसे इतने सारे गोरे लोग देखकर एकदम से हंसी आ जाती है।

हाय रब्बा इतने सारे गोरे बिच्छू पता नही इनकी अम्मी कोनसी मलाई खाकर उनको जन्म देती है! आयत फ़ोटो खींचते हुए कहती है।

इतना कहकर आयत अपने घर जाने लगती है। धीरे धीरे उसे महसूस होता है कि कुछ लोग उसका पीछा कर रहे है इसलिए वो उन्हें चकमा देने के लिए एक पतली गली में भाग जाती है और वो लोग भी उसका दौड़ कर पीछा करने लगते है। आयत भागते हुए एक सुनसान सड़क पर पहुंचती है तो वह पाती है कि वो उन्ही लोगो से घिरी हुई है। 

कौन है आप लोग और मेरा पीछा क्यो कर रहे है? आयत ने घबराते हुए पूछा।

बहुत दिन हो गए प्यार किये हुए जानेमन आज तो तुझसे ही अपनी भूख मिटायेंगे! इतना कहकर एक लड़का आयत को छूने की कोशिश करते है

जोकर एक शिकारी जासूस

तभी एक जोरदार लात उस लड़के को पड़ती है और वह दूर जाकर गिरता है। 

सामने एक गोरा लड़का, लम्बा और आंखों में एक अलग ही चमक, साथ ही बालों का एक अलग तरह से काड़ा हुआ और हाँथ मानो किसी तरह की लोहे की सलाखें हो।

कौन है बे तू? एक लड़के ने गुस्से में पूछा।

तुम लोगो के लिए बुरा इंसान और अच्छे लोगो के लिए अच्छा! इतना कहते ही वो लड़का एक गुंडे के पेट मे घुसे मारता है जिससे उस लड़के के मुंह से खून निकल जाता है और सभी उस गुंडे का हाल देखकर उस लड़के को पीटने के आगे बढ़ते है।

लेकिन वो लड़का पलक झपकते ही उन लड़कों को चारों खाने चित्त कर देता है और आयत की आंखे फ़टी हुई थी और उसका मुंह खुल चुका था। 

आप ठीक तो है! उस लड़के ने आयत से पूछा।

जी मै ठीक हूँ! आयत ने हल्का शर्माते हुए जबाब दिया।

आप इस शहर में नए है क्या? उस लड़के ने अपने कपड़े उठाते हुए कहा जो कि लड़ते समय नीचे गिर गए थे।

जी हाँ मै अपने परिवार के साथ घूमने आए हो और मेरा नाम आयत इस्लाम है! आयत ने अपना हाँथ हेलो करने के लिए आगे बढ़ा दिया।

जी मेरा नाम अलमुहराम ख़िलजी है! उस लड़के ने भी मुस्कराते हुए हाँथ मिला लिया। 

आपसे मिलकर अच्छा लगा अलमुहराम! इतना कहकर आयत वंहा से चली जाती है।

अलमुहराम हल्का से मुस्कराता है फिर शैतानी मुस्कराहट के साथ कहता है 

“कोई अस्तित्व नही, निरंकारी हूँ

शिकार के भेष में, शिकारी हूँ” 

नोट – अगला दूसरा अध्याय इंडियन पेपर इंक पर मुफ्त पढ़ने के लिए 21 तारीख को आएगा तो उससे पहले पढ़ने के लिए इंडियन पेपर इंक ईबुक स्टोर पर पढ़िए 

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