नारी जाती को श्राप क्यों लगा – अनिल प्रजापति

बात उस समय की है जब महाभारत का युद्ध छेड़ा हुआ था और इस महासंग्राम में अनेकों महारथियों ने अपने प्राण त्याग दिए थे और महाभारत के सभी योद्धाओं में जो सबसे तेज प्रबल कौरव पांडवों के इस बीच महायुद्ध में जो कौरवों की तरफ से लड़े थे महान योद्धा कर्ण जैसे दानवीर कर्ण के नाम से भी जाना जाता हैं! जब इस महासंग्राम में अर्जुन द्वारा कर्ण का वध हो गया तो सभी पांडव माता कुंती और मुरली मनोहर यदु राई कन्हैया जी भी साथ में करण के अंतिम संस्कार पर पहुंचे सभी अपने अपने मतानुसार करण की बात कर रहे थे और जैसे ही करण की चिता जलने लगी तो माता कुंती रोने लगी बिलखने लगी बिलाप करने लगीं तो पांडवों देखा कि माता कुंती रो रही हैं और सभी उनके करीब आ गए पांचों भाई अर्जुन भीम नकुल सहदेव युधिष्ठिर भगवान मुरली मनोहर जी पास में आ गए पांडवों ने कहा क्या हुआ माता आप रो क्यों रही हो क्या हुआ तब माता कुंती ने कहा कर्ण तुम्हारा शत्रु नहीं बल्कि तुम्हारा जेष्ठ भ्राता था जिसे मैंने कुंवारे में जन्म दिया था लोक लाज की वजह से मैंने यह राज राज ही रहने दिया मैंने बचपन में उसे जल में बहा दिया था तभी सभी पांडव बोले क्या कह रही हो मां आप होश में तो हो आप, तभी मुरली मनोहर घनश्याम ने उनको समझाया कि यह बात बिल्कुल सत्य है करण तुम्हारा ही भाई था! इतना सुनते ही सभी पांडव व्याकुल हो उठे और युधिष्ठिर बोले माता यह आपने क्या किया भाई के हाथों ही भाई के प्राण चले गए यदि मां आप यह बात पहले बता देतीं कोई ऐसा अनर्थ कभी नहीं होता हम पांचो पांडव वन को चले जाते और कर्ण को राजा बना देते, और युधिष्ठिर ने अपनी माता को श्राप दिया के आज के बाद कोई नारी कोई बात नहीं छुपा पाएगी उसे कोई कोई भी राज नारी जाति नहीं छुपा पाएगी यह मेरा श्राप है इस प्रकार से नारी जाति को श्राप लगा कि वह कोई सी भी बात छुपा नहीं पाएगी

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