पनघट किया होगा – Purab “निर्मेय”

चलो सोचों कि उस पल ,पल ने भी क्या-क्या सहा होगा _
अचानक सामने आकर ,कहीं “रूखसत” कहा होगा ।
जताये भी नहीं जाते ,सभी बातों पे हर किस्से _
किसी कान्हा ने उसको भी ,जरा पनघट किया होगा ।।

तुम्हारी बात में बातें बहोत हैं ,बात जाने दो_
अभी तुम सारे स्वर छोड़ो ,इक तेरी आवाज आने दो _
मिलेंगे कल सवेरे फिर से हम, तुम “चाय” हो मेरी 😊
सितारे जग रहे रहे हैं ,अब मुझे भी जाग जाने दो ।।

मिले कुछ सीप में मोती ,उन्हीं जैसै हैं शायद हम _
जरा से आसमानों के ,सभी तारों से शायद हम _
हमें भी क्या पता ,कैसी रही किस्मत हमारी है 🤔
पिघलकर बर्फ होती बर्फ का पानी हैं शायद हम ।।

उन्हीं वादों से उकरा जो ,भला वो इक पल होगा
हृदय के द्वार पर कुछ तो, कहीं खटपट किया होगा ।।1।।

@”निर्मेय
(by-Purab”निर्मेय”)

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