पलक – Krishna Tawakya Singh

पलक

पलक तो पलक है
झपकते देर नहीं लगती
पलकों में तुझ रख लूँ
यह आजकल शेर नहीं लगती
कोशिश बहुत की
पलक को देखने की
पर आँखें धोखा खाती रहीं
पलकों के बीच रहकर
ऊपर नीचे जाती रही |
पलक छुपाती भी है
रोशनी से बचाती भी है
पलक झुक जाने का मतलब
पूछने की बात नहीं
हर कोई जानता है |
शरमाने का मतलब
हर कोई जानता है |
उठने और गिरने का सबब
ये दिल ही पहचानता है |

कृष्ण तवक्या सिंह
27.07.2020.

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