पूरनमल एक स्वादिष्ट साधु पार्ट 3

   अध्याय – 3 पूरनमल का साधु बनना


अगले दिन राजा शंखपति ने सभा बिठाई जंहा पर रानी अम्बादी भी मौजूद है वह फुट फुटकर रो रही थी और महाराज से आने बच्चे की जीवन दान की भीख मांग रही थी।

पूरनमल आज तुम्हे एक बलात्कार के रूप में मृत्यु दंड दिया जा रहा है इसपर तुम्हे कुछ कहना है? महामंत्री ने पूरनमल से पूछा।

मुझे बस इतना कहना है कि ये सब झूठ है और अगर इस झूठ पर भी मुझे सजा आप दे रहे है तो मुझे मौसी फूलवती के आंगन में ही फांसी दी जाए! पूरनमल ने मुस्कराते हुए कहा।

लेकिन फूलवती के आंगन में ही क्यो? शंखपति ने गुस्से में कहा।

क्योंकि हो सकता है मेरी मृत्यु देख कर मौसी का आत्म परिवर्तन हो जाये और उन्हें अपनी गलती का अहसास हो जाये! पूरनमल ने एक उत्साह के साथ कहा।

ठीक है जैसा तुम चाहो! तुम्हारी आखिरी इच्छा पूरी की जाए! शंखपति ने गुस्से में कहा।

पूरनमल को सैनिक फूलवती के आंगन में ले जाते है और फांसी के फंदे तैयार किये जाते है फूलवती की नजर पूरनमल पर पड़ती है लेकिन पूरनमल की मुस्कराहट देखकर फूलवती का गुस्सा ओर बढ़ जाता है।

रुको सैनिको इसको फांसी के बाद इसका दिल और आंखे निकाल कर मुझे दी जाए! फूलवती की आंखों में गुस्सा था।

फूलवती की आंखों के सामने पूरनमल को फांसी दे दी जाती है और अम्बादी को तब तक एक कमरे में कैद करके रखा जाता है अम्बादी रो रो कर बेहोश हो जाती है।

फूलवती के आंखों के सामने ही पूरनमल की लाश में से दिल और आंखे निकाल कर फूलवती के पास लाई जाती है जिसे फूलवती अपने पैरों से ठोकर मारकर फेंक कर चली जाती है।

बाद में पूरनमल की लाश को एक नदी में बहा दी जाती है।

पूरनमल की लाश दो दिन तक उसी नदी में बहती रहती है। और बहते बहते एक घाट पर आकर रुक जाती है उसी घाट के पास गुरु गोरखनाथ अपने चेलों के साथ आश्रम डाले बैठे थे तभी उनके चेले ने गोरखनाथ से कहा।

देखिए गुरुजी लगता है वो लाश अपने भइया पूरनमल की है! एक चेले ने गुरु गोरखनाथ का ध्यान लाश की तरफ किया।

हां ये तो मेरे परम् शिष्य पूरनमल की ही लाश है चलो देखते है मेरे शिष्य की ये दशा किसने की! गोरखनाथ इतना कहकर लाश को बाहर निकाल कर पूरनमल को देखने लगते है।

जैसे ही गोरखनाथ पूरनमल के माथे को स्पर्श करते है उन्हें सारी बाते पता चल जाती है जिसे देखकर गोरखनाथ को आंखों में आंसू आ जाते है! हे भगवान मेरे शिष्य ने अपनी जान दे दी अपने धर्म को बचाने के लिए! गोरखनाथ इतना कहकर रोने लगते है।

गोरखनाथ अपनी मंत्र शक्तियों से दुबारा पूरनमल में जान फूंक देते है और पूरनमल पुनः जीवित हो जाता है। लेकिन उसे कुछ भी याद नही होता है इसलिये गोरखनाथ उसे सारी बाते याद करवाते है।

पुत्र पूरनमल अब तुम वापस अपने देश मे जाकर रह सकते हो! गोरखनाथ ने पूरनमल  को आर्शीवाद देते हुए कहा।

गुरु जी ये आप क्या कह रहे है अगर मैं वापस गया तो मुझे दुबारा मृत्यु दंड दिया जाएगा इसलिए मुझे वापस नही जाना कृपया करके आप मुझे अपना शिष्य बना लीजिए। मै भी आपकी तरह ही साधु बनकर अपनी जिंदगी काटना चाहता हूं! पूरनमल ने गुरु गोरखनाथ के पैर पड़ते हुए कहा।

ठीक है पूरनमल तुम मेरे साथ ही साधु जीवन यापन करो! गोरखनाथ इतना कहकर पूरनमल को भी साधु बना देते है और देश विदेश घूमते है।

पूरनमल धीरे धीरे गोरखनाथ के ओर करीब आ जाते है। वह उनका परम् भक्त बन जाता है उसके लिए गोरखनाथ के आर्शीवाद के जरिए कई रहस्यमयी शक्तियां भी आ जाती है। पूरनमल जिस देश और नगर में जाता था वंहा की जनता पूरनमल के सौंदर्य को देखकर उसपर मुग्ध हो जाती थी। ये देखकर अन्य गोरखनाथ के चेले पूरनमल से चिढ़ने लगे थे।

एक दिन गोरखनाथ के पैर पूरनमल दबा रहा था तभी पूरनमल के मन में विचार आता है।

गुरु जी क्या मैं एक सवाल पूछ सकता हूँ! पूरनमल ने बढ़े आदर रूप में पूछा।

पूछो पूरनमल! गोरखनाथ ने मुस्कराते हुए कहा।

मेरी माँ, मौसी और मेरे पिता का क्या हाल है अब? पूरनमल ने बेचैन होते हए पूछा।

तुम्हे मृत्यु की सजा देने के पाप में मैने तुम्हारे पिता को आजीवन कोढ़ हो जाने का श्राप दे दिया था इसलिए तुम्हारे पिता दर्द में जिंदगी यापन कर रहे है और तुम्हारी मौसी की खूबसूरती बदसूरती में बदल चुकी है अब तुम्हारी माँ उस राज्य को चला रही है लेकिन तुम्हारे वियोग में हर रात वह घुट घुट कर रोती है! ये सब तब तक ठीक नही होगा जब तक तुम्हारे पिता तुमसे माफी ना मांगे और तुम्हारी मौसी अपनी गलती के बारे में सब सच नया बता दे इस दुनिया को! गोरखनाथ इतना कहकर चले जाते है।

पूरनमल इतना सुनकर बेचैन होकर बैठ जाता है और समय बीत जाता है और गोरखनाथ की मंडली चीन देश पहुंच जाती है।

अन्य शिष्य पूरनमल को मरवाने की योजना सोचते है।

हम पूरनमल को कैसे मरवाये! एक शिष्य ने बेचैन होते हुए पूछा।

सुना है चीन की  राजकुमारी सुंधाधि ऋषि मुनियों से चिढ़ती है और अब तक उसने कई ऋषियों को मरवा दिया है हमे आज की भिक्षा के लिए पूरनमल को वंहा भेजना होगा। वह राजकुमारी पूरनमल को मरवा देगी! एक शिष्य ने योजना बताते हुए कहा।

सभी शिष्य पूरनमल के पास जाते है।

पूरनमल ये चीन देश है और इसकी राजकुमारी सुंधाधि नाम की राजकुमारी है जो कि ऋषि मुनियों को मन चाही भीख देती है और आज की भिक्षा का दिन तुम्हारा है! सभी शिष्यों ने एक साथ कहा।

ठीक है! इतना कहकर पूरनमल चीन की राजधानी में भीख मांगने लगता है। जंहा पूरनमल को देखकर सभी नगर के लोग पूरनमल को देखते रह जाते है।

इतना सुंदर साधु तो मैने पहली बार देखा है! एक व्यक्ति ने कहा।

सभी नगर के लोग पूरनमल के गाये गीतों को सुनने के लिए पूरनमल को घेर लेते है और आत्म मुग्ध होकर सुनने लगते है।

क्या आप लोग बता सकते है की राजकुमारी सुंधाधि का महल किस तरफ है! पूरनमल ने बढ़ी विनम्रता के साथ पूछा।

हे सुंदर नवयुवक क्यों अपनी मौत को ढूंढ रहा है वह राजकुमारी नही है एक डायन है जो किसी भी साधु को जिंदा नही छोड़ती है! नगरों के लोगो ने पूरनमल को चेतावनी दी ।

अगर किसी के दरवाजे से भिक्षा में मुझे मौत भी मिले तो मुझे मंजूर है लेकिन अपने गुरु गोरखनाथ के लिए मुझे भिक्षा लेकर ही जानी है! पूरनमल इतना कहकर राजकुमारी सुंधाधि के महल के बाहर खड़ा हो जाता है।

सवाल – ईष्र्या अक्सर ही इंसान की मति भर्म कर देती है इसमें जो भी चेलों ने किया वह ईष्र्या थी या किस्मत दुवारा ली गई परीक्षा?

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