पूरनमल एक स्वादिष्ट साधु लास्ट पार्ट

  अध्याय – 5 पूरनमल की अमरता


एक दिन पूरनमल और सुंधाधि भगवान की पूजा में लीन थे तभी सुंधाधि पूरनमल से उसके माता पिता के बारे में पूछती है और पूरनमल अपनी पूरी कथा सुंधाधि को बता देता है।

मुझे माता से मिलना है पूरनमल! सुंधाधि जिद करती है।

लेकिन बहन सुंधाधि मै वापस उस देश नही जाना चाहता हूं! इतना कहकर पूरनमल चला जाता है।

लेकिन सुंधाधि हर बार यही जिद करती रहती है लेकिन पूरनमल उसे नजर अंदाज कर देता है।

एक दिन सभी शिष्य अपने गुरु गोरखनाथ के साथ भोजन कर रहे थे तभी सुंधाधि फिर कहती है।

देखिए ना गुरु जी मेने भइया पूरनमल से माता को मिलवाने को कहा तो मना कर रहे है! सुंधाधि ने गोरखनाथ की तरफ देखते हुए कहा।

मुझे लगता है पूरनमल तुम्हारे पिता और तुम्हारी मौसी को तुम्हारी मृत्यु की काफी सजा मिल चुकी है और तुम अपनी भक्ति को लेकर विश्वभर में प्रसिद्ध हो चुके हो देवी देवतायें भी तुम्हारे धर्म की मिसाल देने लगे है! अब तुम्हे अपना राजपाट सम्भाल कर अपना वैराग्य जीवन लोक कल्याण में लगा सकते हो! गोरखनाथ खाते हुए कहते है।

जैसी आपकी इच्छा गुरुजी! पूरनमल जबाब देता है।

अगले दिन पूरनमल वापस अपने देश की तरफ प्रस्थान कर जाता है उसके साथ सुंधाधि भी है। कुछ ही सालो में वह अपने बगीचे में आ जाता है जंहा उसका मित्र शिशुपाल रो रहा था लेकिन जैसे पूरनमल जैसा दिखने वाला साधु अपने बगीचे में देखा वह तुंरन्त ही प्रणाम करता है।

अरे मित्र शिशुपाल मित्र प्रणाम करके नही गले मिलकर मिलते है! पूरनमल मुसकराते हुए कहता है।

अपने मित्र को जिंदा देखकर शिशुपाल भागकर पूरे नगर में और रानी अम्बादी को बताता है की कैसे पूरनमल ने अपने धर्म को बचाये रखा।

रानी अम्बादी अपने पुत्र को जीवित देखकर फुट फुटकर रोने लगती है।

हाये मेरे बच्चे इतने दिनों से कँहा था मुझे छोड़कर! अम्बादी पूरनमल को अपने सीने से लगा लेती है।

तभी फूलवती और राजा शंखपति वंहा आ जाते है। फूलवती जैसे ही पूरनमल को जिंदा देखती है वह पूरनमल के चरणों मे गिर जाती है।

अरे माते आप ये क्या कर रही है! पूरनमल उस कुरूप फूलवती को उठा लेता है।

मैने बहुत बडी गलती कर दी थी पूरनमल! इतना कहकर फूलवती सभी सच्चाई पूरे नगर के सामने बता देती है और वैसे ही फूलवती दुबारा से अपने असली खूबसूरत चेहरे में आ जाती है।

राजा शंखपति भी पूरनमल से अपने किये की माफी मांगते है। पूरनमल जैसे ही उन्हें छूता है उनका कोढ़ वैसे ही ठीक हो जाता है।

पूरनमल के ये कहानी, उसकी धर्म के प्रति आस्था और भक्ति की दूर दूर के देशों में भी चर्चे होने लगते है।

पूरनमल सियालकोट का राजा बन जाता है और धर्म कर्म से अपना राजपाट चलाता है।

गोरखनाथ की कृपा से पूरनमल के नाम को अमरता मिल जाती है और ऐसी भक्ति की मिसालें दी जाने लगती है।

पूरनमल हर रात अपने गुरु को पूजा करता और दिन में राजपाट का कार्य देखता उसके राज्य को प्रसद्धि उसके नाम की तरह बढ़ने लगी थी।

सुंधाधि वापस अपने चीन चली जाती है और राजपाट को आगे बढ़ाती है।

तो यह थी कथा पूरनमल की जो कि मेरे ह्रदय के काफी करीब रही है मै अक्सर इस कहानी को अपनी दादी से सुनता था। जैसा कि मैने कहा कि सत्य घटना है ना कि काल्पनिक कहानी क्योंकि ऐसी समाजिक घटनाये अक्सर आज भी हमारे वर्तमान परिवेश में देखने को मिलती है। ये सामाजिक घटनाये पहले भी विद्यमान थी और आज भी है।

समाज मे लोक कथाओं के प्रति जागरूकता ही एकमात्र मेरा लक्ष्य है मै पवन सिंह सिकरवार अक्सर समाज में उन बूढ़ी नानी और दादी को ढूंढता हूँ जिन्हने अपनी स्मृतियों में कई ऐसी जादुई और प्रेणा स्त्रोत कहानियों का भंडार छुपा रखा होता है।

अगर आपके पास भी कोई ऐसी लोक कथा से जुड़ी जानकारी है या दादी ओर नानी की कुछ चटपटी , या मनोरंजन कहानियां याद है तो मुझे जरूर बताएं आप मुझे व्हाट्सएप कर सकते है या ईमेल भी कर सकते है।

व्हाट्सएप – 8376873801

ईमेल – sikarwar13579@gmail.com

Note – IndianPaperInk application को डाउनलोड करना ना भूले याद रखे और इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ साझा जरूर करे हर हफ्ते हम ऐसी ही कुछ मनोरंजक कहानियां आपके समक्ष प्रसतुत करते राहयँगे तब तक के लिए अलविदा । ।।

2 Replies to “पूरनमल एक स्वादिष्ट साधु लास्ट पार्ट”

  • बहुत सुंदर प्रयास किया है आपने
    इसी तरह सीखो फाउंडेशन की एक पुरानी रचना मेरा ड्रेगन ब्वाय फ्रेंड भी एक बार पूरी डालने की दया करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *