पूरनमल एक स्वादिष्ट साधु पार्ट 1

अध्याय – 1 कहानी की पृष्ठभूमि

यह कहानी एक सत्य घटना पर आधारित है। भारतीय संस्कृति में कई ऐसी जादुई और अमर कहानियों का वर्णन है जिसके बारे में युवाओं को कोई जानकारी नही है। यह बात काफी निराशाजनक भी है लेकिन इसमें सारी गलतियां हमारी शिक्षा प्रणाली की है जो की शेक्सपियर का रोमियो जूलियट तो पढ़ाता है लेकिन बाजीराव मस्तानी को नही। खैर सीखो फॉउंडेशन का कार्य ऐसी ही कथाओं को पुनः युवाओं में जीवंत करना है।

religious stories in Hindi

बहुत समय पहले की बात है सियालकोट जो की अब पाकिस्तान में पड़ता है वंहा के राजा थे शंखपति। वह काफी वैभवशाली राजा थे और उनकी पत्नी का नाम था अम्बादी। अम्बादी काफी दयालु और धार्मिक थी। इसलिए उनकी जनता अपने राजा और रानी से काफी खुश रहती थी। लेकिन राजा और रानी का कोई पुत्र ना होने के कारण दोनों बेचैन रहते थे। दोनों ही पुत्र प्राप्ति के लिए काफी प्रयत्न कर चुके थे लेकिन सभी विफल नजर आ रहे थे। एक दिन रानी अम्बादी इसी बेचैनी में बैठी अपनी चौखट पर रो रही थी तभी वंहा उनकी एक पुरानी सखी चम्बा आई। जो कि एक बगीचे की मालिन थी।

क्यो क्या हुआ सखी अम्बादी तुम रो क्यो रही हो? चम्बा ने बेचैन होते हुए पूछा।

क्या बताऊँ सखी! पुत्र ना होने के कारण मेरे और मेरे पति की सभी देशों में बेज़्ज़ती होती है कोई मेरे पति को निर्बल बताता है और कोई मुझे बांझ बोलता है समझ नही आता कि क्या करे? अम्बादी इतना कहकर रोने लगती है।

religious stories in Hindi

सखी मै भले ही तुम्हारी मदद नही कर सकती हूं लेकिन यंहा भैरव भक्त गोरखनाथ आये हुए है कहते है ये साधु मरे हुए लोगो तक को जिंदा कर सकते है तो अगर इनका तुम्हे आर्शीवाद मिल जाये तो तुम पुत्रवधु बन सकती हो! चम्बा ने अम्बादी के आंसू पोछते हुए कहा।

लेकिन यह रहते कँहा है? अम्बादी तुंरन्त ही खड़ी हो जाती है ये सुनकर।

ये मेरे बगीचे में ठहरे हुए है तुम उनसे मिल सकती हो कल वह यंहा से प्रस्थान कर जाएंगे! चम्बा इतना कहकर चली जाती है।

अगले दिन रानी अम्बादी अपनी दासियों के साथ चम्बा के बगीचे में जाती है जंहा पर गुरु गोरखनाथ अपने चेलों के साथ ध्यान में मग्न थे तभी रानी अम्बादी गोरखनाथ के पैर पकड़ लेती है जिसके कारण गोरखनाथ का ध्यान भंग हो जाता है और वह तुंरन्त ही खड़े हो जाते है।

कौन हो तुम? और हमारे ध्यान में विध्न डालने का क्या कारण है तुम्हारा? गोरखनाथ गुस्से मे थे।

महाराज मै रानी अम्बादी हूँ कृपया मुझ पर कृपा करें मेरा कोई पुत्र नही है जिसकी वजह से मै काफी चिंतित रहती हूं! अम्बादी ने रोते हुए अपनी सारी व्यथा बता दी।

religious stories in Hindi

रानी अम्बादी तुम्हारा कभी भी कोई पुत्र नही हो सकता है क्योंकि ये तुम्हारे और तुम्हारे पति के पुराने पाप की सजा है जो कि विधि का विधान है! गोरखनाथ इतना कहकर अपनी कुटिया में जाने लगते है।

रुक जाइये महाराज अगर आपने मुझे पुत्रवधु होने का आर्शीवाद नही दिया तो अभी अपनी जान दे दूंगी! रानी अम्बादी एकदम से रोते हुए खड़े हो जाती है।

तुम समझ क्यो नही रही हो रानी अम्बादी! तुम्हारा पुत्रवधु होना नियति का विधान नही है और इसमें हम भी कुछ नही कर सकते है! गोरखनाथ ने रानी को समझाते हुए कहा।

तो ठीक है आज ये दुखियारी यंही अपनी जान दे देगी आप के सामने! रानी अम्बादी ने एक चाकू निकाल कर अपनी छाती पर रख लेती है।

रुक जाइये रानी अम्बादी! इतना कहकर तभी गोरखनाथ के चेला यशुतनाथ खड़ा हो जाता है।

गुरु जी क्या हम किसी भी तरह इनकी मदद नही कर सकते!

क्योंकि अगर हम इसकी मदद नही करते तो इसकी मृत्यु का पाप आपको ही लगेगा जो की मै नही देख सकता! यशुतनाथ ने गुस्से में अपने गुरु गोरखनाथ से कहा।

religious stories in Hindi

हो सकता है अगर तुम अपनी आत्मा रानी अम्बादी को दे दो ! बताओ क्या तुम एक माँ के आंसू पोछने के लिए अपनी आत्मा का दान कर सकते हो यशुतनाथ? गोरखनाथ ने मुस्कराते हुए पूछा।

ठीक है गुरु जी जैसा आप सही समझे मै इस माँ का बेटा बनकर दुबारा जन्म लेने को तैयार हूं! यशुतनाथ इतना कहकर अपनी आत्मा का दान गोरखनाथ को दे देता है।

गोरखनाथ उस आत्मा को अपनी मंत्र शक्तियों से रानी अम्बादी के कोख में डाल देते है।

रानी खुशी खुशी वंहा से चली जाती है और गोरखनाथ अपने नगर गोरखपुर में वापस चले जाते है।

कुछ समय बाद ही रानी अम्बादी गर्भावस्था को धारण कर लेती है

और चारो तरफ नगर में खुशियों का पर्व मनाया जाता है।

कुछ महीनों बाद रानी अम्बादी एक बच्चे को जन्म देती है और उसका नाम रखती है पूरनमल।

पूरनमल धीरे धीरे बड़ा होने लगता है शुरू से ही वह गुरु गोरखनाथ की पूजा करने लगता है और साथ ही साथ अपनी शिक्षा भी पूरी करता है तब उसकी मित्रता होती है अपनी मालिन चम्बा के पुत्र शिशुपाल से जो कि गोरखनाथ का चेला था और गुरु गोरखनाथ से धर्मिक शिक्षा लेने जा रहा था।

अपने मित्र के साथ जाने और गोरखनाथ से शिक्षा लेने का पूरनमल भी अपने माँ बाप से आग्रह करता है।

राजा शंखपति और रानी अम्बादी पूरनमल को जाने देते है। पूरनमल गुरु गोरखनाथ से गोरखपुर में शिक्षा लेने लगता है।

religious stories in Hindi

काफी समय बीत जाता है और राजा शंखपति अब बूढ़े हो चुके थे। और दूसरी तरफ कुसुमनगर के राजा फुलचक्र को पुत्री फूलवती के विवाह का स्वंयम्बर रखते है। राजकुमारी फूलवती की सुंदरता के चर्चे पूरे भारतवर्ष में फैले हुए थे। स्वंयम्बर का निमंत्रण राजा शंखपति के पास भी आता है।

राजा शंखपति कामवासना में उस स्वंयम्बर मे हिस्सा लेने चले जाते है। रानी अम्बादी उन्हें काफी समझाती है कि ये पाप है। लेकिन राजा शंखपति नही मानते।

स्वंयम्बर की शर्त थी कि जो भी धनुष चलाकर नीचे पानी मे देखकर मछली पर निशाना लगा देगा वही स्वंयम्बर जीत जाएगा। सभी वंहा आये राजा और राजकुमार स्वंयम्बर नही जीत पाते है फिर बाजी आती है राजा शंखपति की जो कि गलती से इत्तिफाकन स्वंयम्बर जीत लेते है और रानी फूलवती की शादी राजा शंखपति से हो जाती है।

जिस दिन राजा शंखपति अपनी नई पत्नी फूलवती के साथ महल में आते है उससे पहले ही उनका पुत्र पूरनमल वापस महल में आ जाता है जो कि दिन में राजपाट देखता और रात में अपने गुरु गोरखनाथ की पूजा करता था। वह एक धार्मिक ग्रहस्थऋषि की तरह था लेकिन पूरनमल की सुंदरता के चर्चे पूरी दुनिया भर में मशहूर थे लोग ये तक मानते थे को वह कामदेव का अवतार है जिन्होंने रानी अम्बादी की कोख से जन्म लिया है।

पूरे शहर की लड़कियां उसे पाने के सपने देखती थी लेकिन पूरनमल ने गोरखनाथ की पूजा और वैराग्य आश्रम को अपना धर्म बना लिया था।

Wrote By Author Pawan Singh Sikarwar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *