प्यार का गठबंधन – रुचि गोपाल रूचिर

रुचि गोपाल रूचिर


खूबसूरत फूलों से महकते हुए बगीचे में बैठी हुई

पवित्रा हाथों में कलम लिए अपने खयालों को कोरे कागज़ पर उतार रही थी,

अपना नाम सुन कर खयालों से बाहर आई और पलट कर देखा

सामने पुनीत खड़ा था।

पवित्रा ने हाथ मे लिए हुए कागज़ को पीछे छुपाते हुए खुद को संम्भाला और होंठों पर हल्की सी मुस्कुराहट लिए हुए झुकी हुई पलकों के साथ पुनीत से पूछा आप यहाँ!!? 

पुनीत ने भी शरारती मुस्कुराहट के साथ जवाब में सवाल पूछा,

क्योँ मैं यहां नही आ सकता क्या!

नही नही….मेरा वो मतलब नही था,पवित्रा ने लड़खड़ाती हुई जुबान से कहा।

न जाने वो इतनी घबराई हुई सी क्यों लग रही थी।

ऐसा लग रहा था जैसे सामने पुनीत नही पुलिस खड़ी हो और चोर पकड़ लिया गया हो।

पुनीत ने पवित्रा के हाथ को थामते हुए कहा,मुझे तुम्हे कुछ बताना है।

लेकिन पुनीत क्या कह रहा था इस पर पवित्रा का ध्यान ही नही गया।

उसके हाथों के स्पर्श मात्र से उसके गाल गुलाब की तरह सुर्ख हो गए और हाथ में छुपाये हुए कागज़ पर उसकी पकड़ और मज़बूत हो गई।

पवित्रा को यूं खोया हुआ देख कर पुनीत ने उसके हाथों को और मजबूती से थामते हुए और अपने शरारती अंदाज़ में उसे छेड़ते हुए कहा-कहाँ खो गई हुज़ूर!!!

पवित्रा ने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा….

नही नही कुछ नही आप कुछ कह रहे थे?

हाँ!मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूँ।…………….

मुझे प्यार हो गयाहै पवित्रा…….

और तुमसे ये बात में इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि तुम मेरी बहुत अच्छी दोस्त हो।

तुमसे ज़्यादा शायद ही कोई मुझे कोई जानता होगा,…..

बोलो न पवित्रा,जिस लड़की को मैं प्यार करता हूं उसे अपने दिल की बात कैसे बताऊँ?

प्यार की एक कहानी

कैसे सुनाऊँ उसे अपना हाले दिल पुनीत की यह बात सुन कर पवित्रा के दिल की धड़कन धीमी पड़ गई कागज़ पर कसे हुए हाथों की पकड़ ढीली पड़ गई।

अपनी झुकी हुई पलकों को उसने धीरे से ऊपर उठाया।

उसकी पलकें आसुओं से नम थीं और इन सब बातों से अन्जान पुनीत उधर अपने इश्क़ की दास्तान सुनाने में व्यस्त था…….

तुम्हे पता है पवित्रा, वो बेहद खूबसूरत है।

मानो ख़ुदा ने उसे फुर्सत से गढ़ा हो,

और जितनी खूबसूरत वो तन से है उतनी ही मन से भी है मुझे पूरा यकीन है कि वो एक बेहतरीन जीवन साथी साबित होगी।….

अपनी बात कहते कहते पुनीत पवित्रा की तरफ मुड़ा….

पवित्रा जो एकटक पुनीत को निहार रही थी भरी हुई आंखों को लेकर सकपका कर पीछे मुड़ गई और अपने दुपट्टे से अपनी पलकों पर छाए हुए आंसुओं की बूंद को पोछ अपने होंठों पर झूठी मुस्कान रख पुनीत की तरफ मुड़ी और धीरे से बोली………

तो कह दीजिये न उनसे अपने दिल की बात बता दीजिए उन्हें की आप कितनी मोहब्बत करते हैं उनसे……..

पवित्रा के दोनों कांधों पर हाथ रखते हुए पुनीत ने लंबी सांस लेते हुए कहा……

अरे हुज़ूर हम भी बेताब हैं अपने दिल की बात उन तक पहुचाने के लिए पर न जाने क्यों दिल कुछ घबरा रहा है कि कहीं……..

कहीं क्या पुनीत?…….सवालिया नज़रों से पवित्रा ने उसे देखा!……..

अपने शरारती अंदाज़ में हंसते हुए पुनीत बोला….कहीं तोहफा रसीद कर दिया हमारे गाल पर तो!…….

प्यार की एक कहानी

उसकी ये बात सुन कर पवित्रा के खामोश लबों पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई और पुनीत को प्यार भरी झिड़की देते हुए वो बोली….ओफ्फो!आप भी न हद करते हैं बिल्कुल बिना अपने दिल की बात बताये आपने ये कैसे जान लिया!!!!…..क्या पता वो तोहफा इश्क़ का ही हो……इश्क़ तो कर लिया और अब इश्क़ के इम्तेहान से डर लग रहा है इन्हें।

पवित्रा की मीठी झिड़की सुन कर हाथ जोड़ते हुए वो बोला इसीलिए तो कह रहा हूँ कि मेरा साथ दीजिये हुज़ूर आपके बिना मेरे इश्क़ की गाड़ी एक कदम भी आगे नही बढ़ पाएगी।….मैं….भला….मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ,,?

तुम मेरे साथ रहोगी पवित्रा तो मैं अपने दिल की बात बेबाक कह पाऊँगा।….नही नही मेरा आपके साथ जाना ठीक नही होगा, दिल की बातें तन्हाई में ही अच्छी लगती हैं,यूँ किसी के सामने न…….पवित्रा के होंठों पर हाथ रखते हुए पुनीत ने उसे बीच में रोकते हुए बोला,तुम बस मेरा साथ दे दो मुझे यकीन है उसे बुरा नही लगेगा।पुनीत के बार बार कहने पर आखिरकार अपने दर्द को छुपाते हुए पवित्रा ने हामी भर दी, और सकुचाते हुए पूछा…चलिए कहाँ चलना है???

मेरे घर पर……घर!!!!!वो आपके घर पर आएंगी?

हाँ आज माँ पापा की एनीवर्सरी है तो उन्हें और उनके माँ पापा को इनवाइट किया है

वो सब आ रहे हैं।

पवित्रा हैरान सी पुनीत को देखती है और पूछती है,

उनके और आपके माँ पापा को ये सब पता है?……जी……..oh god पुनीत ,और आप मुझे वहां ले के जा रहे हैं!!!

प्यार की एक कहानी

अंकल आंटी क्या सोचेंगे मेरे बारे में?पवित्रा कर का दरवाज़ा खोलते खोलते पुनीत की ये बात सुन कर ठिठक गई और बोली,मुझसे नही होगा पुनीत।में अंकल आंटी का सामना नही कर पाऊंगी।ओहो पवित्रा!तुम तो ऐसे घबी रही हो जैसे माँ पापा से पहली बार मिल रही हो,…..पहले की बात और थी पुनीत और आज की बात और है।मैं नहीं जा सकती।…

plz पवित्रा…. रुक जाओ,तुम अगर नहीं गई तो बात अधूरी रह जायेगी और मैं अपने दिल की बात उससे कैसे कहूँगा।अपने दोस्त के लिए क्या तुम इतना भी नही करोगी?पुनीत के ये बात सुन कर पवित्रा ख़ामोश हो गई और न चाहते हुए भी वो गाड़ी में बैठ गई।गाड़ी सड़क पर दौड़ती जा रही थी और पवित्रा अपने खयालों में गुम थी,,वो कागज़ जिस पर वो अपने खयालात लिख रही थी अब तक उसके हाथ मे मौजूद था।

गाड़ी के हॉर्न से उसका ध्यान टूटा।

चलें हुज़ूर घर आ गया पुनीत ने कहा।….

दरवाज़ा खोलते ही गुलाब की भीनी भीनी खुश्बू ने उसके मन को रोमांचित कर दिया था कमरे में कैंडिल्स जल रही थीं,

ये सब देख कर पवित्रा के दिल की धड़कने बढ़ने लगी।

इस एहसास से उसकी पलके एक बार फिर नम हो गई की एक पल में उसकी मोहब्बत किसी और कि हो जाएगी।

पवित्रा

पुनीत की आवाज़ सुन कर उसने पलट कर देखा…….

उसके हाथों में गुलाब का फूल महक रहा था और वो धीमे कदमों से पवित्रा के नज़दीक आ रहा था,

और इधर पवित्रा बिना पलकें झपकाए एक टक उसे अपनी ओर आता है देख रही थी।

पुनीत के नज़दीक आते ही घबरा कर वो ज्यों ही उससे दूर हटी पुनीत ने उसके हाथों को अपने हाथ मे थाम लिया……

पवित्रा ने काँपते हुए होंठों से पूछा……वो…..वो अब तक आई नहीं????

“जिनको आना था वो आ चुके हैं।”

प्यार की एक कहानी

पर…..पर यहाँ तो मुझे मेरे और तुम्हारे सिवा कोई और नहीं दिख रहा!!!!!

मेरी आँखों मे देखो पवित्रा….

.तुम्हें उसका अक्स दिखाई देगा…..

पुनीत ने हल्के से पवित्रा की ठोड़ी पर हाथ रख कर उसके चेहरे को ऊपर उठाया और मुस्कुराते हुए बोला…..

तुमने शायद ध्यान नही दिया पर वो तो तब से मेरे साथ थी जब से मैं तुम्हारे साथ था।

वो हर एक बात हर एक लफ्ज़ तुम्हारे लिए था

“पावी” मैन सिर्फ तुमसे प्यार किया है पावी और तुमसे ही प्यार करूँगा।

क्या तुम मेरी हमसफर,मेरी जीवन संगिनी बनना पसंद करोगी?….

पवित्रा के लब खामोश थे और आंखों से आंसुओं की धारा बह रही थी,

पर इस बार ये आसुंओं की धारा खुशी की थी।

पुनीत की बांहों में उसका प्यार समाया हुआ था,

और वो कागज़ के टुकड़ा जिस पर पवित्रा अपने दिल की बात लिख रही थी उसे भी आज कुछ बयाँ करने की ज़रूरत नही थी क्योंकि धड़कने धड़कनों को सुन रही थीं,

खामोशी प्यार के गीत गुनगुना रही थी,

माता पिता के आशीर्वाद के साथ फूलों की बरसात के बीच ….दिल से दिल का “गठबंधन”जो हो रहा था।

प्यार की एक कहानी

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