प्रताड़ना – मेरे शरीर की

नितिन अग्रवाल

बचाओ ! माँ बचाओ ! मुझे यह सब मार डालेगे ! छोड़ो मुझे छोड़ो ! इन सभी शब्दो से मेरा गहरा नाता रहा है !
 अब जब भी मैं घर से बाहर जाती हू तो हर कोई मुझे गंदी गंदी नजरों से देखता है ! देखे भी क्यौ नहीं ! अपवित्र जो हो चुकी थी ! बलात्कार का दाग जो हमेशा के लिए थे मेरे ऊपर !
 जिस तरह किसी कैदी को उम्र कैद  की सजा होने के बाद उसे उसी नज़र से देखा जाता है, चाहे भले ही वह  बेगुन्हा क्यौ न हो ! हमारा समाज इस बात की इजाजत जो देता है ! बिना कुछ सोचे समझे ! 
‘चलिये आइए, ‘मेरे संग हुए हादसे के बारे मे कुछ बाते करते है ! अरे, ‘यह क्या?’  आप सब सोच रहे होगे, यह लड़की पागल हो गयी है क्या ! अपने घाव पर मलहम लगाने की जगह उसे और गहरा क्यौ कर रही है?’
अरे  साहब, आप क्या समझेगे यह सब ! जब कोई उस दिन को भूलने देगा तभी तो भूलेगे ना ! 17 की उम्र से लेकर 20 की उम्र तक उस दरिंदे ने जो मेरे संग किया, मुझे इतना दर्द दिया, जो आज तक सही नहीं हुआ ! आप कहते है, मै क्या कर रही हू ! कभी किसी ने उससे पूछा, उसने मेरे संग ऐसा क्यो किया, मैंने ही उसका ऐसा क्या बिगाड़ा था ! जो उसने मुझे जिंदगी भर के लिए बिगाड़ दिया ! 
सब बच्चों की तरह मै भी उस वक़्त स्कूल जाया करती थी ! हर दिन मुझे स्कूल जाना अच्छा लगता था ! जिसमे मेरे कुछ खास दोस्त मेरे संग जाया करते थे !  09 बी कक्षा मे होने के कारण मुझे अपने पढ़ाई पर ध्यान देना जरूरी था !
 जिससे के लिए घर वालों ने पास के ही टीचर के पास पढ़ाई के लिए भेजना शुरू कर दिया ! उनका नाम था हरी मोहन सिंह ! गाँव  मे सभी उनकी इज्जत किया करते थे ! वो करते भी क्यौ नहीं ! उस गाँव के सबसे ज्यादा पढे लिखे ब्यक्ति होने के कारण वह उस सम्मान के हकदार भी थे ! तभी तो मेरे माँ पापा ने उनको मेरे शिक्षा की ज़िम्मेदारी सोपी ! 
कहते है ना ! जब तक आप किसी के संग समय नहीं बिताते, उसको आप अच्छी तरह नहीं समझ सकते ! वही सब कुछ मेरे संग भी हुआ ! गाँव मे सब उनको सम्मान देते थे ! मै भी उन लोगो की कैटेगरी मे आ गयी थी ! सब कुछ अच्छा चल रहा था !
 06 माह निकाल जाने के बाद उनका मेरे प्रति बर्ताव कुछ अलग सा होने लगा ! भले उस वक़्त मुझे उनके ऐसे किसी इरादे के बारे मे पता नहीं था ! पापा की उन  से मेल जोल के कारण उन्होने पापा से मुझे कुछ वक़्त अलग से पढ़ाने के लिए राज़ी कर लिया था ! पापा ने भी उनको हाँ कर दिया ! रोज़ की तरह वह मुझे अपने समय से कुछ ज्यादा ही समय दिया करते थे ! कुछ दिन तो सब सामान्य की तरह चलता रहा !
धीरे धीरे पढ़ाने के बहाने उन्होने मुझे छूना शुरू कर दिया !हर दिन उनकी हरकतों मे बढ़ोतरी होने लगी ! कभी वह मेरे हाथो को टच करते ! कभी वो मेरी पीठ पर उंगली से मुझे कुछ बताने की कोशिश करते ! 
एक दिन यही बात मैंने अपने घर वालों को बताया, तो उन्होने ही मुझे गलत कहना शुरू कर दिया ! यदि कोई  गाँव के इज्जतदार पर आप कोई आरोप लगाते है सबसे पहले आप ही उस आरोप के भागीदार बन जाते है ! वही उस वक़्त मेरे संग हुआ ! जब मैंने खुद उनके इरादो को लगाम लगाने की कोशिश की ! उन्होने मेरे पिताजी से कह मुझको ही गलत लड़की का नाम देकर गाँव  मे बंदनाम कर दिया !
पापा ने भी उनसे हाथ जोड़कर मेरे लिए उनसे माफी मागी ! वो भी उसके लिए जो मैंने नहीं की थी ! और उनसे फिर से आग्रह किया कि आप मेरी बेटी को 10 बी मे पास करवा दीजिये, क्यौंकि इस गाँव मे आप से ज्यादा पड़ा लिखा और समझदार टीचर कोई नहीं है ! यदि आप उसका मार्गदर्शक करगे, तो वह आगे कुछ कर पाएगी !
कहते है ना यदि किसी को किसी चीज़ की अनुमति मिल जाए तो वह उस चीज़ के संग कुछ भी कर सकता है ! वही सब कुछ आगे मेरे संग होने वाला था ! जब खुद के घर वालों ने आप को खाई मे गिरा दिया हो, तो कोई क्या आप की बात सुनेगा ! 
कुछ दिन बाद फिर से मेरा उनका घर जाना शुरू हो गया ! पहले तो वह खाली समय मै मुझको पढ़ाते थे, लेकिन अब वो बात नहीं थी ! खाली समय केबल मेरे शरीर के संग खेलना, उस किताब की तरह था जिसके हर पन्ने पर मेरे शरीर का एक एक शब्द लिखा हो !
 प्रतिदिन उसकी यह किताब अलग अलग तरह से खुलने लगी ! मानो ऐसा लग रहा था कि मेरे 10 बी कक्षा की नहीं, बॉडी के एक एक पार्ट की परीक्षा हो रही हो !
यह सब 04 साल तक चला ! अब मुझमे ऐसी आदत हो गयी थी, मै खुद वहाँ जाकर अपने कपड़े उतार एक जिंदा लाश की तरह लेट जाती थी !
और आज आप कह रहे है मुझे, ‘शर्म नहीं आ रही अपनी इन सब बातों को बताने मे !’  जब मेरे अपनों ने ही बेशर्म कर बहा भेजा था ! अब किस बात की शर्म सहाब ! अरे जाइए सहाब-  ‘किसी ऐसे को देखे जिसे शर्म आती हो !!!’

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