फेमिनो की दुनिया – नितेश सिंह चौहान

नमस्कार, मेरा नाम नितेश है। रंग गोरा, बाल लंबे और गोल चेहरा। मै दिल्ली का रहनेवाला हूँ।

एक बार मै हर दिन की तरह अपने कॉलेज जा रहा था।

मेरे पास एक साइकिल थी। जिससे मै कॉलेज जाता था।

अक्सर मेरे इस रास्ते मे एक बन्द पार्क पड़ता था।

जिसकी वजह से मुझे पार्क से घुमा कर जाना पड़ता था। 

आज भी मै कॉलेज जा रहा था लेकिन आज वो पार्क बन्द नही था।

जैसा कि हमेशा ही होता था।

इसलिए मैंने सोचा क्यों ना आज मै इसी पार्क के अंदर से होता चालू क्योंकि इससे मेरे कम से कम दस मिनट बच जाते। 

मैने अपनी साइकिल उस पार्क के अंदर ले ली और साइकिल चलाते हुए जाने लगा तभी मुझे एक अजीब आवाज सुनाई दी जिसे सुनकर मैने साइकिल रोक ली।

खड़े होकर आसपास उस आवाज के दिशा देखने लगा तभी मुझे महसूस किया वो आवाज एक पेड़ से आ रही थी जो कि सेब का सूखा पेड़ था और पार्क के बीचों बीच भी था।

उस पेड़ की तने में एक रास्ता भी जा रहा था।

मेरे मन मे ऐसे ही उस रास्ते के अंदर देखने की इच्छा हुई तो मैने जैसे ही उस रास्ते के अंदर झांका तभी मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मुझे अंदर खींच लिया हो और तभी मै उस पेड़ के दूसरी तरफ जाकर निकला। 

जैसे ही मेने अपने आप को साफ करते हुए पेड़ की तरफ देखा तो मै चोंक ही गया क्योंकि उस सूखे पेड़ पर सेब ही सेब लगे हुए थे। साथ ही उस पेड़ में अब कोई रास्ता भी नही था।

इससे पहले की मै कुछ समझ पाता तभी कुछ पुलिस वाली महिलाओं ने मुझपर बन्दूक तान दी।

उनकी आंखें ऐसे खुली थी मानो वो बिल्कुल चोंकी हुई हो।

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मुझे माफ़ कीजियेगा! दरअसल मै इस पार्क में यूँही आ गया मुझे कॉलेज जाना था तो समय बचाने के लिए आ गया! नितेश ने घबराते हुए जबाब दिया।

तू तुम एक ल ल लड़के हो? एक महिला ने चोंकते हुए कहा।

जी हाँ! क्या ये कोई गुनाह है? मैने हंसते हुए कहा।

नही अब तक तो नही थी लेकिन तुम्हे अभी न्यायलय चलना होगा! उस पुलिसकर्मी ने नितेश के हाँथ में हथकड़ी पहनाते हुए कहा।

अरे आप ऐसा कैसे कर सकती है? मैने क्या गुनाह किया है? नितेश ने गुस्से में होते हुए कहा।

तुम एक लड़के हो इसलिए! उस पुलिस कर्मी ने इतना कहकर नितेश को पार्क के बाहर ले आती है तो चारो तरफ सिर्फ लडकिया और औरते ही थी।

नितेश को कुछ समझ ही नही आ रहा था की आखिर उसके साथ ये क्या हो रहा है

वह बस यही कह रहा था कि ये क्या बकवास है कि एक लड़का होना भी कोई भला जुर्म होता है।

लेकिन जैसे ही नितेश को न्यायलय ने पेश किया गया सभी वंहा बस चौकी हुई आंखों से ही उसे देखे जा रहे थे जैसे मानो वह कोई अजूबा हो। नितेश को लेकिन एक बात बहुत अजीब लग रही थी क्योंकि वंहा सभी महिलाएं और लड़कियां ही थी मानो कोई लड़का हो ही नही इस दुनिया मे। 

न्यायधीश जैसे ही अपनी कुर्सी पर बैठती है वो नितेश को देखकर एकदम से चोंक् जाती है। 

क्या ये सच मे एक लड़का है या एक लड़की जिसने सिर्फ लड़को जैसे कपड़े पहन रखे है? न्यायाधीश महोदया जी ने नितेश को घूरते हुए कहा।

क्या बकवास है। मै एक लड़का हूँ और मेरा नाम नितेश है दरअसल में उस पेड़ में जैसे ही प्रवेश किया तो लेड के दूसरी तरफ आ गया! नितेश ने झल्लाते हुए कहा।

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सभी लोग नितेश को ही देखे जा रहे थे।

देखो बच्चे ये दुनिया मे सिर्फ महिलाएं ही रहती है और ये महिलाओं की दुनिया है इसलिए एक लड़के को देखकर हम सभी चोंक गए है। ये बात तो साधारण है कि तुम दूसरी दुनिया के हो और बेमाता ने तुम्हे हमारे पास किसी खास मकसद से ही भेजा होगा! इतना कहकर न्यायधीश महोदया चुप हो जाती है।

क्या यंहा सिर्फ महिलाएं और लड़कियां ही है? तो यंहा फिर बच्चे केसे होते है? और ये बेमाता कौन है? नितेश ने अजीब नजरो से सबको देखते हुए कहा।

बेमाता वो ही पेड़ है जिसके अंदर से तुम यंहा आये हो बच्चे और हमारे यंहा बच्चे महिलाएं जब पच्चीस वर्ष की ही जाती है तो उसी पेड़ का एक सेब खा लेती है जिससे वो गर्भ धारण कर लेती है लेकिन सभी महिलाएं या लडकिया सिर्फ लड़कियों को ही जन्म देती है! न्यायधीश महोदया ने जबाब दिया।

तो कृपया करके मुझे मेरी दुनिया मे भेज दीजिये! नितेश ने घबराते हुए कहा।

ठीक है हम कुछ तरकीब ढूंढेंगे तब तक एक आर्मी घर मे रहोगे और रोजाना की तरह कॉलेज भी जाओगे हम जल्दी ही तुम्हे तुम्हारी दुनिया मे भेजने की कोशिश करेंगे! इतना कहकर न्यायधीश महोदया चली जाती है।

नितेश को एक घर मे ले जाया जाता है और वो काफी बढ़ा था

जंहा माली, नोकरानी, रसोईया सब महिलाएं ही थी।

नितेश को अगले दिन कॉलेज जाना था जंहा सिर्फ लडकिया ही होंगी।

नितेश को बढ़ा अजीब लग रहा था।

अगले दिन, 

नितेश एक कार से कॉलेज जाता है जो कि शायद इतना बढ़ा था कि उसे विश्वास ही नही हो रहा था।

जैसे ही वो कार से उतरकर कॉलेज के मुख्य दरवाजे को देखता है तो अंदर सभी लडकिया ही जा रही थी।

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तभी नितेश को एक साइकिल पर एक लड़का दिखाई देता है

जिसे देखकर नितेश खुश हो जाता है और एकदम से उसकी साइकिल के सामने आ जाता है।

हेलो, भगवान का शुक्र है कि आप भी एक लड़के है इसका मतलब मेरे साथ सिर्फ मजाक हो रहा था ये लड़कियों की दुनिया नही है! नितेश ने खुश होते हुए कहा।

क्या पागल हो? मै तुम्हे लड़का दिखाई देती हूं! इतना कहकर वो लड़की गुस्से में चली जाती है जो कि लड़का लग रही थी।

कंहा फंस गया मै? नितेश इतना कहकर कॉलेज के अंदर चला जाता है।

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