बचपन का सावन – Namrata Pandey

सावन के आने की आहट जो पाई
भैया और उसकी पतंगें याद आई
अलबेली ऋतु और अलबेला मौसम
खेतों में फैली हरियाली याद आई
वो डालों पर झूले और कोयल की कूकें
आंगन में पिसती हुई मेहंदी याद आई
वो पायल की छन छन
वो चूड़ी की खनखन
अम्मा के हाथों की रसोई याद आई
वो प्यारा सा बचपन, वो बाबुल का आंगन
ऐसे याद आया कि आंखें भर आई.

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