बिन मौसम बरसात – shivanand soni

” बिन मौसम बरसात ”

वो जब चलती हैं तो पत्थर भी मुस्कुराते हैं
वो जब बोलती हैं तो होठ भी कपकपाते हैं

उसकी मुस्कुराहट तो देखो तौबा – तौबा
क्या लिखूँ उनकी तारीफ़ में शब्द कम पड़ जाते हैं

मै भी भीगा था उसके इश्क़ बारिश के पानी में
तब से चुन लिया था उसे हीरोइन अपनी कहानी में

बस इतना ही याद कर ख्यालों में खोया रहता हूँ
और खो जाता हूँ उसके आगे की कहानी में…..

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शिवानंद सोनी ( सोनी )

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