मन की बात उनके साथ – RAJNI SHARMA

“मन की बात उनके साथ”
इतनी-सी इल्तिज़ा है मेरी,
बेवजह ही बात को न बढ़ाया करो,
ग़र हो खता हमसे तो मेरे यारा, बेतकल्लुफ़ ही मान जाया करो।
इतनी सी इल्तिज़ा हे साहेब ,
बेवजह ही बात को न बढ़ाया करो।

लाल- पीले होकर मकां को, नफ़रत का अखाड़ा न बनाया करो।
इतनी-सी इल्तिज़ा हे जनाब,
बेवजह बात को न बढ़ाया करो।

निवाले से क्यों होते हो खफा,
इसके लिए शुक्रिया अदा करो।
इतनी-सी इल्तिज़ा हे मेरी,
बेवजह बात को न बढ़ाया करो।

अपनों को अपनापन दिखाया करो,
मुहब्बत को मुहब्बत से चुकाया करो।
इतनी-सी इल्तिज़ा हे मेरी,
बेवजह बात को न बढ़ाया करो।

साहेब मेरे , मुस्कराहट को ही,
मुखड़े का नूर बनाया करो।
इतनी-सी इल्तिज़ा है मेरी,
बेवजह बात को न बढ़ाया करो।
रजनी शर्मा (अध्यापिका)

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