मशीनों की दुनिया – S. Anand

सुबह-सुबह फोन की घंटी सुनकर अनाया की आंख खुल गई। फोन उसकी सहेली रानी का था। अनाया आंख मलते हुए उठी और उसने फोन उठा लिया।

“क्या तुम्हें पता है अनाया, आज 24 घंटे के लिए बिजली काट दी गई है?”

“क्या ?” अनाया चौक गई।

लेकिन इससे पहले कि आगे बात हो पाती फोन कट गया। अनाया ने देखा कि उसकी फोन की बैटरी खत्म हो गई थी। उसने कल रात अपना फोन चार्ज नहीं किया था और अब तो बिजली भी नहीं थी। अनाया परेशान हो गई। उसने सोचा अगर आज पूरे दिन बिजली नहीं आई तो घर का काम कैसे चलेगा? उसके घर के सारे उपकरण तो बिजली से चलते हैं। अब तो वह घर का कोई काम नहीं कर पाएगी ।

अनाया को अपने परिवार के लिए नाश्ता तैयार करना था । वो बिस्तर से उठी और उसने किचन में जाकर देखा। किचन के सारे उपकरण आराम से बैठकर सुस्ता रहे थे। वैसे तो वह हर सुबह टोस्टर की मदद से कुछ ही मिनटों में टोस्ट बना लेती थी। और उसके साथ साथ जूसर की मदद से जूस या फिर कॉफी मेकर पर गरमा गरम कॉफी बना लेती थी। और अगर रोटियां बनानी हो तो आटा गूंथने, रोटी को बेलने और सेकने के लिए भी उसके पास मशीनें थी। अपने हाथ से तो उसने कभी रोटी बनाई ही नहीं थी। लेकिन आज उसकी सारी मशीनें ठप पड़ी थी । अनाया सोच में पड़ गई की अब करे तो क्या करें? तभी उसका पति शरद किचन में आ गया।

“क्या हुआ, अनाया ? इतनी परेशान क्यों हो ? शरद ने पूछा।

“देखो ना शरद, आज कोई भी मशीन काम नहीं कर रही है। बिजली जो नहीं है। आज मैं घर का काम कैसे करूंगी?”

“कोई बात नहीं, आज मैं तुम्हारी मदद कर देता हूं।” कहते हुए शरद ने आटा गूथना शुरू किया।

अनाया का जन्म एक बहुत ही धनिक परिवार में हुआ था । उसने अपना सारा जीवन बहुत ही आराम से कई सारी सुख सुविधाओं के बीच में बिताया था। और परिणाम यह हुआ कि इन सुख-सुविधाओं के बिना वह एक पल भी अपने जीवन की कल्पना तक नहीं कर सकती थी। लेकिन शरद का जन्म एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था । एक छोटे से गांव से अपनी शिक्षा पूरी कर, मुंबई जैसे बड़े शहर में सी ए की नौकरी पाने तक, शरद ने बहुत सारी मुश्किलों का सामना किया था। इस कारण वह सुख-सुविधाओं का आदी नहीं था ।

अनाया और शरद ने मिलकर नाश्ता तैयार किया। उसके बाद आनाया अपने बिल्डिंग के नीचे भाजी तरकारी खरीदने चली गई। उसका घर पांचवी मंजिल पर था । आज बिजली ना होने की वजह से लिफ्ट काम नहीं कर रही थी। इसलिए अनाया को सीढ़ियां चढ़ने पड़ी। अपने घर तक पहुंचते-पहुंचते वह पसीने में नहा गई। घर पहुंचते ही वह शरद से लिफ्ट ना होने की वजह से हुई परेशानियों की शिकायत करने लगे।

“तुम्हें तो पता है, मैं कभी लिफ्ट का उपयोग नहीं करता।” शरद ने कहा। “हमेशा सीढ़ियों से ही चढ़ता उतरता हूं । इसलिए मुझे आज भी कोई तकलीफ नहीं हुई।”

शाम का वक्त हो चला था। शाम को आनाया या तो घर पर ही व्यायाम करती थी या फिर जिम जाती थी । घर में व्यायाम करने के लिए उसने बहुत सारे आधुनिक उपकरण मंगवा रखे थे। पर आज तो वे भी काम नहीं कर रहे थे। अनाया दुखी मन से सोफे पर बैठ गई। शरद अनाया की परेशानी को समझ गया । शरद कभी व्यायाम करने के लिए मशीनों की सहायता नहीं लेता था। वह पास वाले पार्क में जाकर व्यायाम करता था। शरद के कहने पर अनाया भी उसके साथ पार्क में चली गई। दोनों ने मिलकर पार्क में ही व्यायाम किया। आज पहली बार, अनाया ने जाना की खुली हवा में व्यायाम करने का मजा ही कुछ और होता है।

अपने परिवार के लिए रात का खाना, अनाया ने बिना किसी यंत्र की मदद लिए, अपने हाथों से ही बनाया। घर में बिजली ना होने की वजह से उन्होंने बिल्डिंग की छत पर जाकर रात का भोजन किया । कल तक अनाया और उसके बच्चे खाना खाते समय भी मोबाइल के जरिए सोशल मीडिया पर ही व्यस्त रहते थे । उन्हें एक दूसरे से बात करने की तक की फुर्सत नहीं मिलती थी। आज बिजली ना होने की वजह से मोबाइल भी काम नहीं कर रहे थे। इसलिए अनाया के परिवार को एक दूसरे के साथ बातचीत और हंसी मजाक करने का अवसर मिल गया। आज वे सब बहुत खुश थे। अनाया को जिंदगी में पहली बार यह एहसास हुआ कि मशीनों के बिना भी जिंदगी इतनी खूबसूरत हो सकती है।

“एक तरह से अच्छा ही हुआ कि आज बिजली नहीं थी।” बच्चों के सो जाने के बाद आनाया नहीं शरद से कहा। “नहीं तो मैं इस अनुभव से वंचित ही रह जाती हमेशा।”

“अनाया यह मशीनें हमारा काम आसान करने और समय बचाने के लिए बनाई गई हैं।” शरद ने कहा, “लेकिन हमें इन मशीनों का इतना आदी नहीं होना चाहिए की इनके बिना हमारा गुजारा ही ना हो। विज्ञान और तकनीक ने कहीं नए आविष्कार करके हमारे जीवन को बहुत अधिक सुविधापूर्ण बना दिया है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हम इन मशीनों के गुलाम बन जाए। यह मशीनें हमारी खूब सेवा तो करती हैं, पर अगर यह हम पर हावी हो जाए तो हमें ही मशीन बना छोड़ेंगीं।

“नहीं शरद, ऐसा कभी नहीं होगा । मैं तुम्हें वादा करती हूं।” अनाया ने मुस्कुराते हुए कहा।

वह मशीनों की दुनिया से मनुष्यों की दुनिया में आकर बहुत खुश थी।

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