माँ दर्शन देने आई हैं – कुमार विशाल

हम भक्तों ने मिलकर माता की दरबार सजाई है,
करके सिंह सवारी माँ, हमें दर्शन देने आई हैं।

चिड़िया चहक रही है, कोयल मीठी राग सुना रही है,
कलियाँ दरवाजे खोलकर देखो कैसे मुश्कुरा रही है।
प्रकृति ने भी देखो कैसे धरती की रंग सजाई है,
करके सिंह सवारी माँ, हमें दर्शन देने आई हैं।

नवरात्र में नौ दिन माँ, नौ रूप को धारण करती है,
दुखियों का दुःख हरकर वो सबके घर खुशियां भरती है।
हम भक्तों की नईया तो मईया ने पार लगाई है,
करके सिंह सवारी माँ, हमें दर्शन देने आई हैं।

🙏तुम्हारे आशीर्वाद की सदा हम पर कृपा हो,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै हे जग जननी नमो नमः🙏

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