मृत्यु की कहानी – मेरी जुबानी INDIAN PAPER INK

विनीत 


मेरा नाम करण भाटला है, मैं एक डॉक्टर हूँ और मैं आपको ये बताने जा रहा हू.

ये घटना तब की है जब मैंने अपनी डॉक्टरी पूरी कर ली थी और मुझे पहली बार हॉस्पिटल के ICU में जाना था.

ICU में जब मैं गया तो मैंने देखा एक 30 साल की लड़की लड़की बेड पर लेती हुई थी.

उस लड़की का कार एक्सीडेंट हुआ था और वो पिछले 3 दिन से वेंटीलेटर पर थी.

जो मरीज कोमा में चले जाते है या जिनका दिल काम करना बंद कर देता है,

उन्हें वेंटीलेटर पर रखा जाता है.

DEATH STORY

इस लड़की के बचने की उम्मीद बिलकुल नहीं थी

और आखिर 3 दिन वेंटीलेटर पर रखने के बाद इस लड़की का वेंटीलेटर हटाना था

ताकि उसे मृत घोषित किया जा सके.

इस लड़की के बचने की उम्मीद बिलकुल नहीं थी

और आखिर 3 दिन वेंटीलेटर पर रखने के बाद इस लड़की का वेंटीलेटर हटाना था

ताकि उसे मृत घोषित किया जा सके.

और दुर्भाग्य से ये काम मेरा था.

मैं ICU में दाखिल हुआ तो उस लड़की का पति, सास, माँ और बाप सब कमरे में थे और आंसू बहा रहे थे.

जैसे ही मैंने उस लड़की के घरवालों को देखा मेरे शरीर में कपकपी शुरू हो गयी क्यूंकि ऐसा मैं पहली बार देख रहा था.

जैसे ही मैंने उस लड़की के घरवालों को देखा मेरे शरीर में कपकपी शुरू हो गयी

क्यूंकि ऐसा मैं पहली बार देख रहा था.

जैसे मैं उस परिवार के पास आया उन्हें एहसास हो गया

कि अब मैं वेंटीलेटर हटाऊँगा और फिर वो लड़की हमेशा के लिए उन्हें छोड़ कर चली जायेगी.

इससे पहले मैं कुछ करता, सभी परिवार वालो ने उस लड़की का हाथ पकड़ा

और रोते हुए उससे कहने लगे “हम तुमसे बहुत प्यार करते है”

“हमें तुम्हारी याद बहुत आएगी”

“प्लीज वापिस आ जाओ”

DEATH STORY

वो लड़की कोमा में थी, उसे कोई होश ना था.

परिवार को ऐसे रट बिलखते देख मेरी तो जैसे सांस ही अटक गयी थी.

मैंने अपनी ज़िन्दगी में ऐसा मौत का अनुभव कभी नहीं किया था.

तभी, अचानक मेरे पीछे से एक आदमी आया जिसके हाथ में करीब 3 साल का बच्चा था.

बच्चे हंस रहा था और आप जानते है कि वो बच्चा इस लड़की का था.

ऐसा लग रहा था कि बच्चा अपनी माँ को कई दिनों के बाद देख रहा है

और इसीलिए वो खुश था लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी माँ अब इस दुनिया से जाने वाली है.

ये सब कुछ मैं देख नहीं पाया और फ़ौरन ICU के बाहर आ गया, उस दिन पहली बार ये सब देखकर मेरे आंसू निकल गए.

मेरे साथ के डॉक्टर ने फिर मुझे समझाया कि डॉक्टरी में सख्त दिल रखना ही पड़ता है वरना ये नौकरी करनी बहुत मुश्किल हो जायेगी.

मैंने जैसे तैसे खुद को संभाला और उस परिवार के पास गया और भरी मन से उन्हें कहा कि अब वेंटीलेटर हटाने का वक़्त हो गया है.

जैसे ही मैंने वेंटीलेटर उस लड़की के मुंह से हटाया कुछ क्षण में ही उसकी मौत हो गयी.             

डॉक्टरी में अब मैं अपनी आँखों के सामने कई मौते देख चूका हू.

सच कहु तो कई बार मुझे दुःख भी होता है और कई बार कोई फर्क नहीं पड़ता.

अब मैंने अपने जज्बातों पर काबू पाना सीख लिया है

और शायद इसी वजह से मैं अभी तक अपनी नौकरी कायम रखे हू.

कमज़ोर दिल वालो की डॉक्टरी लाइन में कोई जगह नहीं !

DEATH STORY

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