मेरे पापा – Namrata Pandey

कड़ी धूप में शीतल छांव
जैसे है मेरे पापा,
बाहर सख्त,भीतर से साफ्ट,
लगते हैं मेरे पापा।
मन की बात समझते हैं,
पर कभी नहीं जतलाते हैं।
बिल्कुल जैसे सैंटा क्लॉस
जैसे हैं मेरे पापा।
कभी-कभी तो गुस्से में,
डांट लगाते जोरों से।
कुछ ही पल में फिर देखो,
प्यार जताते  हैं पापा।
जब साथ हमारे खेले तो
बिल्कुल बच्चा बन जाते हैं
पर हमें जिताने की खातिर
खुद को हारा दिखलाते है।
कितनी मेहनत करते हैं,
कभी नहीं वो थकते हैं।
बच्चों के सपनों की खातिर,
खुशियां न्योछावर करते हैं।
जब काम से बाहर जाते हैं,
घर सूना सूना लगता है।
जब लौट के वापस आते हैं,
घर में उत्सव सा लगता है।
गर कोई मुसीबत आ जाए,
हमें पता ना चलता है।
सब चुटकी में सुलझा लेते,
जादूगर से है पापा,
पापा, तुम सबसे अच्छे
आई लव यू सो मच पापा।

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