“मैं अपने पापा जैसी हूँ” – RAJNI SHARMA

“मैं अपने पापा जैसी हूँ”
सब कहते हैं, सच कहते हैं,
मैं अपने पापा जैसी हूँ,
हर हाल में ,हर सम्भव ही,
मुस्कुराती रहती हूँ।

गांव में सबसे अधिक पढ़े थे,
आदर्श पुत्र में अनोखेपन थे,
बहनों के राजदुलारे हैं,
किसान की भांति मेहनत करते,
देशभक्ति में सबसे न्यारे हैं,
सेवा उनकी बहुत है भाती,
यह सोच मैं भी इतराती हूंँ
हर सम्भव मुस्कुराती रहती हूँ।

पापा को पढ़ाते देख,
शिक्षण को अपना मर्म बनाया,
पापा ने भी अपने पिता से ,
ये सुन्दर था सद्गुण पाया,
सब कहते हैं, सच कहते हैं ,
इसलिए मैं पापा जैसी हूँ,
हर सम्भव मुस्कुराती रहती हूँ।

माँ के आंँखों के थे तारे,
मातृ भक्ति में सदा रहे,
पूजा माँ को भगवान से बढ़कर, मन मंदिर में सम्मान सहजकर,
मैंने भी अपनी माँ को ही माना,
हाँ मैं भी बिल्कुल वैसी हूँ,
सब कहते हैं ,सच कहते हैं ,
मैं अपने पापा जैसी हूँ,
इसलिए सदा मुस्कुराती रहती हूँ।

हर मुश्किल में धैर्य रखना,
वट वृक्ष की भांति ,
कुटुंब को संभाले रखना,
सबकी मंशा को सहजता से,
सहना और निभाना,
मंद मंद मुस्कान उनकी
सबका दिल जीत जाती है,
यह देख मैं खुश हो जाती हूँ,
सब कहते हैं, सच कहते हैं ,
मैं अपने पापा जैसी हूँ,
हर सम्भव मुस्कुराती हूँ।
रजनी शर्मा (अध्यापिका)

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