यादें – प्रीति कुमारी “अल्हड़”

आज कुछ यादें मुझसे बातें करने आई हैं
जिन्हें देख मेरी आँखें मुस्काई हैं,
एक याद ऐसी भी याद आई हैं,
जिसके पीछे छुपी मेरी तन्हाई हैं ।

यादें , यादें होती हैं,
इनमें तो खट्टी मीठी बातें होती हैं,
कुछ यादों में साँसे बस्ती दिखती हैं
यादों के तरानों में मेरी एक कस्ती बहती दिखती हैं ।

हर याद की एक अलग रवानी हैं,
कुछ याद ऐसी भी हैं, जिसमें मेरी पूरी ज़िंदगानी हैं,
उसका मुस्काना मुझे याद आ रहा हैं,
उसकी मुस्कुराहट में छुपी अनेको कहानी हैं ।

उसने हाथ थामा था मेरा ऐसे,
जैसे उसे अपनी सारी याद बस मेरे साथ बनानी हैं,
एक याद बात करने आई है मुझसे,
उसमें ही छुपी मेरी आख़िरी कहानी हैं ।

एक तस्वीर आँखों से ओझल होने को हैं,
उसकी यादें मुझसे कहती सब कुछ बस एक छल हैं
अरे! वो तो अब कोई याद बन गया हैं,
तेरी यादों का वो सौगात बन गया।

न जाने उसकी कितनी ही यादें सहेजी है मैंने ,
अच्छी,सस्ती,बेशकीमती सब तरह की यादें हैं
उन यादों में हमारी खूबसूरत पलों की बातें हैं,
आज उसकी यादें बातें करने आई हैं…
मैं बस उसकी हूँ ये पैगाम ले जाने आई हैं ,
मुद्दतो बाद चेहरे पर एक “अल्हड़” मुस्कान आई हैं,
आज कुछ यादें फिर बातें करने आई हैं…

*प्रीति कुमारी “अल्हड़”*
18 जून 2020

3 Replies to “यादें – प्रीति कुमारी “अल्हड़””

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