“यारो की यारी” भाग २ KumarAmit”अनंत

“यारो की यारी” भाग २
September 04, 2020
“यारो की यारी”
भाग २ (part.2)

पीछे अपने पढ़े ….पिछले तीन साल से तुम मिलने आये हो। बहुत याद आती है, आई लव यू तुम्हारी प्यारी सुमन।….अब आगे…

अब लेखक भी परेशान की हमने तो आज तक ऐसे किसी के साथ उठा बैठा नही हूँ और ये सुमन कौन है और इधर प्रीतो सवाल पर सवाल पूछ रही है।लेखक बोले हमको नही पता कौन है यह सुमन इतने में प्रीतो ने पूछा तुम मेरा फोन क्यों नही उठा रहे थे बताओ जल्दी क्रोध में..?अब लेखक जी जेब से फोन निकल के देखते है तो 20 बीस मिसकॉल थी तो प्रीतो से बोलते है माफ करना मोबाइल साइलेन्ट में था हमने नही ध्यान दिया झुंझलाहट में बोले ये लो तुम खुद देख लो मोबाइल प्रीतो के हाथ में दे दिये।अचानक नज़र पढ़ी मोबाइल पर प्रीतो की ठीक उसी पल मैसेज आया किसी अनजान नम्बर से और उस मैसेज को प्रीतो खोल के पढ़ी तो उसके पाव तले जमीन ही खिसक गयीं उस मैसेज में लिखा था कि अब तुम तो हमसे मिलने आओगे नही कल शाम को मैं ही तुम से मिलने तुम्हारे घर आ रही हूँ आई लव यु तुम्हारी प्यारी सुमन।तब प्रीतो रोते हुए लेखक से बोली कि अब पता चला कि तुम मेरा फोन क्यों नही उठाये अब तो सुमन का ही फोन उठाओगे और तेज तेज रोने लगी।इतने में मोबाइल लेखक ने लिया पढ़ा तो हालत खराब हुई और तुरन्त अपने जिगरी दोस्त कुलदीप को फोन किया और बोला कुलदीप तुम जल्दी मेरे घर आओ अभी तो कुलदीप पूछा क्या हुआ बता तो सही पर एक भी ना सुने बोले नही तुम जल्दी आओ बस कुलदीप बोला ठीक है 15 मिंट में पहुँचता हूँ।

दोस्ती जिससे करो उसे दिल से निभाना चाहिए।
दोस्तों को हरदम अपने दिल मे बसाना चाहिए।
दोस्त के बिन जमती नही है दोस्तों की महफ़िल,
दोस्तो को दोस्त के साथ मिलके साथ जाना चाहिए।।

वो भी आनन फानन में अपने मैनेजर को बोल कर भागा यहाँ आया तो देखा कि प्रीतो रो रही है और लेखक चिंता में डूबे पड़े है तो पूछा क्या हुआ आप क्यों रो रही हो भाभी जी यह रोना धोना बन्द करो हमको बताओ क्या बात है क्यों ये सब हो रहा है तब सारी बातें दोनों ने बताया तो कुलदीप बोला जिस नम्बर से मैसेज आया है उस पर फोन लगाओ तो जल्दी से उस नम्बर पर फोन लगाया तो पता चला कि मोबाइल बन्द है तो बड़ी मुश्किल से कुलदीप दो घंटे लगातार समझाया दोनों को तो शान्त किया और बोला कि अब चिंता क्यों कर रहे हो कल शाम को साफ हो जाएगा सब, अब अगले दिन रविवार था और हर रविवार को सभी दोस्तों को एक जगह एक साथ होना रहता है तो कुलदीप ने जय सिंह फोन किया और बोला कि जय सिंह कल तुम्हारे यहाँ नही लेखक के यहाँ सभी लोग शाम को मिलते है तो जय सिंह बोला ठीक है वही मिलते है। अब कुलदीप ने राहत की सांस लेते हुए प्रीतो भाभी से बोला भाभी एक कप चाय पिला दो, तब प्रीतो चाय बना के ले आयी सभी बैठ के चाय पिये पर अभी किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट नही थी अब शाम हो गयी थी फिर कुलदीप बोला ठीक है अब आप लोग बिना कोई तमासा किये आराम से खाना पीना करके आराम करो मैं सुबह आता हूँ यह बोल कर कुलदीप अपने घर निकल गया।इधर ये दोनों मुह बना कर एक दूसरे बिना बात चीत किये बैठे है।कुलदीप घर पहुँच कर अपने श्रीमती सावित्री से सारी कहानी बताया तो सावित्री भी सोच में पड़ गयी।और फिर कुलदीप सावित्री से पूछता है कि तुमको क्या लगता है कि क्या है ये सब सावित्री बोली कुछ समझ मे नही आ रहा है क्योंकि जसविन्दर भैया तो बहुत अच्छे और चरित्रवान जैसा तो कोई है ही नही।कुलदीप बोला हाँ यार तुम बात तो ठीक बोल रही हो जसविन्दर को मैं बचपन से जनता हूँ वो ऐसा कर ही नही सकता है।वो वैसे लड़कियों से बहुत डरता है।पर हमें लग रहा है कि कोई तो है जो बिना वजह से इन दोनों को परेसान कर रहा है।सावित्री बोली हमे लगता है कि प्रीतो के ही कोई जानकर या सम्बध वाली है कोई जो इन दोनों से फ़िरकी ले रहा है।कुलदीप बोला चलो कल सुबह चलते है दोनों जसविन्दर के यहाँ।इधर जसविन्दर प्रीतो को नींद नही आ रही है दोनों अलग अलग विस्तर पर लेट कर सोच सोच कर चिन्तित हो रहे है। जैसे तैसे सुबह हो गयीं अब कुलदीप सावित्री को लेकर निकल रहा था तभी अचानक जय सिंह का फोन आया और बोला कि कुलदीप मैं तो अभी ही जसविन्दर के घर जा रहा हूँ तो तुम शाम की जगह पर अभी क्यों नही चलते तो कुलदीप बोला ठीक है तुम पहुँचो मैं भी आता हूँ। थोड़ी देर में जय सिंह अपनी पत्नी के साथ जसविन्दर के घर जैसे पहुँचा वैसे ही कुलदीप भी अपनी पत्नी के साथ पहुच गया।और जय सिंह को कुछ पता नही था तब सभी दोस्त एक साथ बैठ कर सारी बातें बताये तो जय सिंह बोला कोई बात नही है सभी लोग मिल कर खाना पीना बनाते खाते है शाम को सब साफ हो ही जायेगा तो सावित्री बोली हान बिलकुल अब आप सभी बैठो बातें करो हम तीनो मिल कर खाने पीने का काम कर लेते है तो सावित्री बोली प्रीतो से बोली भाभी जी जब से हमारी शादी हुई है तब से आज तक जो हमने समझा है वो यह है कि जसविन्दर भैया जैसा कोई नही है वो ऐसा कुछ नही कर सकते है और फिर इतने में अंजली भी बोली बिलकुल हमारे जसविन्दर भैया जैसा कोई नही है भाभी जी हम अच्छे से जानते भैया को और उन पर हमको गर्व होता है कि कितने अच्छे स्वभाव के है साथ इतने गुणी भी है ईमानदार भी है आज तक भैया हम लोगों से मजाक तक नही किये है जरूर कोई और बात है।अब प्रीतो को थोड़ा शान्ती हुई तो फिर सब ने मिल कर 2 बजे दिन में लंच भोजन किये और आराम करे अब शाम होने को आ गयी है सभी की जहन में वही बातें गुज रही है।सभी को शाम का बड़ी बेसब्ररी से इंतजार था तभी अचानक घर की घन्टी बजती है। तो जसविन्दर दौड़ कर दरवाजा खोलता है सामने एक लड़की उसके हाथ मे एक बैग था चेहरा दुपटटा से बाधा हुआ था और एक प्यारी सी मधुर स्वर में आवाज आयीं की हाय जस्सू कैसे हो मेरे हमसफ़र अब तो सभी आँख बबूला हो गये और जसविन्दर बोला क्रोध में आप कौन हो और मैं आप को नही जानता इतने में प्रीतो रो कर बोली कि मैं अभी जा रही हूँ तुम्हारे घर से रहो अपनी सुमन के साथ सब रोकने लगे।तब उस लड़की ने अपना दुपटटा हटाया और बोली लो पहचानो हमको तब तो प्रीतो की पाँव के नीचे से ज़मीन खिसक गयीं।अच्छा तो तू है पागल बेकूफ़ लड़की आज 4चार दिन से हमारी नींद हराम करके रखा है तुझे तो मैं छोड़ूगी नही।तब सुमन बोलती है दीदी मुझे माफ़ करना हम तो मस्ती कर रहे थे।तब प्रीतो ने बताया कि यह रज्जो है मेरी मासी की लड़की और मेरे बचपन की सहेली यह बहुत शरारती है बचपन से ही तब जा कर सबके जान में जान आयीं और फिर जसविन्दर जी से बोली जीजू हमको माफ कर दो हम तो बचपन से ऐसे ही है।तब जा कर जसविन्दर बोले कि मेन्टल लड़की तेरी वजह से तेरी दीदी ने मेरा जीना हराम कर दिया था शुक्र है तू उसकी बहन निकली कोई बात नही हमने माफ कर दिया ।तब जा कर सभी के चेहरे पर मुस्कुराहट आई और फिर सबने मिल कर बोले कि आख़िर साली घरवाली से ज्यादा प्यारी होती है और फिर प्रीतो ने जसविन्दर से माफी मांगी और सीने से लग कर रोने लगी।और फिर जसविन्दर ने उसको माफ कर दिया और हँसी खुशी बैठ कर सभी चाय नास्ता करने लगे।।।

सच्चे दोस्त कभी रूठते नही है।
पक्के दोस्त कभी टूटते नही है।
जो छोड़ते है साथ वो दोस्त नही,
अच्छे दोस्त कभी छुटते नही है।।

प्यारे साथियों ये हमारा लेख,(कहानी) कैसे लगा कृपया हमें अपने कमेंट के माध्यम से बताने कृपा करें एवं अपना शुभाशीष देने की कृपा करें।
“धन्यवाद”

@Kumar Amit”अनंत”
Delhi

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