युगान्तर – एक सूरज जो रात को निकलता है पार्ट 3

अध्याय – 3 सच्चाई और बीमारी

शाम का समय, युगान्तर कॉलेज से घर जाते हुए अपनी कहानी का भाग पोस्ट आफिस से भेज देता है और फिर अपने घर की तरफ चलने लगता है। आज उसने कॉलेज में किसी से भी बात नही की थी। वह बस अकेले ही रहता था और उसे अकेले ही रहना पसंद था। वह घर पहुंच कर अपने बिस्तर पर लेट जाता है और करुण के बारे में सोचने लगता है।
क्या आज तुम्हे क्लिनिक नही जाना? मां ने पूछा।
मै अगले हफ्ते से क्लिनिक को छोड़ दूंगा मां! कॉलेज खत्म होने वाला है और क्लिनिक का भी महीना पूरा होने वाला है फिर मै खुद ही एक अच्छी नॉकरी ढूंढ लूंगा! इतना कहकर युगान्तर क्लीनिक चला जाता है।
पूरे समय क्लीनिक में काम की वजह से अक्सर वह खाना खाते ही सो जाता था। युगान्तर एक कमरे में सो रहा था तभी उसके कानों में हल्की हल्की आवाज आती है जैसे कोई उसे बुला रहा हो।
युगान्तर की तुरन्त ही खड़ा ही जाता है और बाहर जाकर देखता है तो वंहा कोई भी नही होता है। युगान्तर अपने फ़ोन में डॉक्यूमेंट खोलता है और जैसे ही उसपर करुण नाम लिखता है तभी सामने करुण खड़ा दिखाई देता है।
तो तुम चौथे अध्याय के लिए तैयार हो? करुण ने मुस्कराते हुए पूछा।
उससे पहले मुझे कुछ पूछना है! युगान्तर ने जोर देते हुए करुण से कहा।
करुण बस हामी में सिर हिला देता है।
तुमने कहा कि हम दोनों एक ही है लेकिन कैसे? और इस दुनिया मे इतने लोग है फिर तुम मुझे ही क्यो दिख रही हो? युगान्तर ने कुछ सोचते हुए पूछा।
हम दोनों पिछले जन्म से एक दूसरे से जुड़े हुए है! करुण ने जबाब दिया।
पिछले जन्म जैसी कोई चीज़ नही होती है! युगान्तर ने जबाब दिया।
किसी भी रहस्य को जानने की पहली शर्त होती है कि इसपर विश्वास किया जाए। ना मानने वाले के लिए तो कुछ भी सच नही है और मानने वाले के लिए सब सच्चाई है! करुण ने जबाब दिया।
तो फिर बताओ पिछले जन्म में हम मिले कैसे? युगान्तर ने सोचते हुए पूछा।
ये एक बहुत बड़ी कहानी है बस इतना जानता हूँ कि तुम एक साधु थे जिसे मैं हिमालय में बेहोश पड़ा मिला। तुमने मुझे वो सब सिखाया जो मै तुम्हे बता रहा हूँ उसके बाद तुम एक झील में समाधि ले गए और मै रॉ की नॉकरी छोड़कर फिर एक प्राइवेट डिटेक्टिव बन गया! करुण ने जबाब दिया।
लेकिन हम दोनों एक कैसे हुए? युगान्तर अब भी सोच रहा था।
तुम्हारी समाधि के बाद तुम्हारी आत्मा मुझसे जुड़ गई और मेरे शरीर से भी मैने वो विज्ञान पाया जो कभी मेरे पास नही था अब इस जन्म में तुम्हारे शरीर से मेरी आत्मा जुड़ी हुई है और मै तुम्हारा ज्ञान तुम्हे वापस दिलवाने आया हूँ! करुण ने जबाब दिया।
लेकिन क्या हर जन्म में हम दोनों ऐसे ही एक दुसरे से जुड़कर अपनी जिंदगी बिताएंगे? युगान्तर ने करुण की आंखों में देखते हुए पूछा।
नही हम दोनों को अमर होना इस जन्म में तुम मेरी मदद करो जिससे मै इस बन्धन से अलग हो सकू और अमर हो जाऊं अगले जन्म में मै तुम्हारी मदद करूंगा! करुण ने जबाब दिया।
क्या तुम भविष्य देख सकते हो? युगान्तर ने पूछा।
हाँ मै वर्तमान , भूत और भविष्य तीनो में जा सकता हूँ! करुण ने जबाब दिया।
तो फिर तो तुम मेरा भविष्य बता सकते हो! युगान्तर ने खुश होते हुए कहा।
नही ये पकृति का सबसे खतरनाक नियम है जिसको अगर मैने तोड़ा तो बहुत बुरे परिणाम में हम दोनों फंस सकते है! करुण ने जबाब दिया।
क्या इसलिए हम दोनों एक दूसरे से जुड़े क्योंकि हम दोनों ने पकृति के नियम तोड़े थे? युगान्तर ने सोचते हुए पूछा।
बिल्कुल! करुण ने जबाब दिया।
ये एक श्राप की तरह है। जिसकी वजह से हम दोनों को एक युद्ध लड़ना होगा। इसी श्राप की वजह से एक दिन तुम खुद अपने आप को मारना चाहोगे! करुण इतना कहकर आसमान में देखने लगता है।
मुझे एक विश्व प्रसिद्ध लेखक बनना है इसके लिए मै कुछ भी कर सकता हूँ! युगान्तर ने उतसाहित होकर कहा।
फिर तो तुम्हे ऐसे समय बर्बाद नही करना चाहिए। चलो अब चौथा अध्याय लिखना शुरू करो। क्योंकि अगले हफ्ते तुम्हे अपना ये अधयाय देना होगा! इतना कहकर करुण कहानी के बारे में बताने लगता है।
युगान्तर भी कहानी को जल्दी से लिखना शुरू कर देता है। जैसे ही 4 बजने में 15 मिनट का समय शेष रह जाता है तभी करुण युगान्तर को लिखने से मना कर देता है।
क्या हुआ?
मुझे अब चलना होगा। तुम भी जाकर सो जाओ! इतना कहकर करुण गायब हो जाता है।
अध्याय का बस एक पृष्ठ ही लिखा गया था।
लेकिन करुण को कैसे पता कि मुझे ये अध्याय मुझे अगले हफ्ते देना होगा क्या वो मेरा दिमाग पढ़ सकता है जैसे कि वो कहानी में दूसरे लोगो को देखते ही उनके बारे में बता देता है! युगान्तर अपने आप से ही बात कर रहा था। फिर जाकर वो सोने चला जाता है।

अगले दिन,

सुबह का समय, चारो तरफ लोगो की भीड़ और युगान्तर भी जल्दी से मेट्रो पकड़कर नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर उतर जाता है और कहानी के बारे में सोचते हुए ही कॉलेज जाता है। अब कॉलेज के एग्जाम शुरू होने में सिर्फ एक महीना ही रह गया था। लेकिन युगान्तर के लिए कॉलेज अब कोई खास जगह नही थी। वह तो जल्दी से चाहता था कि ये कॉलेज खत्म हो जाये।
कॉलेज में प्रवेश करते ही सामने युगान्तर को आएशा दिखाई देती है जो कि युगान्तर को देखकर रुक जाती है।
युगान्तर? आएशा युगान्तर को आवाज देती है।
युगान्तर आवाज सुनकर रुक जाता है।
क्या हुआ बोलो? युगान्तर एक चिड़चिड़े मन से पूछता है।
देखो युगान्तर इस साल जो हमारे बीच हुआ वो गलत हुआ है और मुझे इसके लिए काफी बुरा भी लग रहा है लेकिन हम दोनों इस रिश्ते को ऐसे ही नही तोड़ सकते है ना? तो क्यो ना हम दोनों दोस्त बन जाये? आएशा ने मुस्कराते हुए पूछा।
मुझे कोई दोस्त नही चाहिये धन्यवाद। अब मुझे चलना होगा क्योंकि मैं क्लास के लिए देर हो रही है! युगान्तर इतना कहकर चला जाता है।
युगान्तर साइंस ब्लॉक से जा ही रहा था कि तभी एक क्यूट सी लड़की युगान्तर के सामने आ जाती है।
हेलो मेरा श्रुति है।
मेरा नाम युगान्तर! युगान्तर अजीब नजर से देखकर आगे बढ़ जाता है।
क्या तुम मेरी एक मदद कर सकते हो? दरअसल मै साइकोलॉजी की विद्यार्थी हूँ और आज मेरा इंटरनल टेस्ट है जिसमे मुझे किसी के हाव भाव देखकर उनके कुछ सवालों का जबाब खुद से लिखना है फिर जो जबाब सही होंगे उतने मुझे मार्क्स मिल जाएंगे! श्रुति ने जल्दी से युगान्तर को समझाते हुए कहा।
वैसे तो मेरी क्लास है लेकिन कोई बात नही मै तुम्हारी मदद करने को तैयार हूं बताओ क्या करना है? युगान्तर ने मुस्कराते हुए जबाब दिया।
बस मै तुम्हारा कुछ समय लुंगी। क्या तुम मेरी क्लास में चल सकते हो? श्रुति इतना कहकर युगान्तर को अपने क्लास में चलने का इशारा करती है।
युगान्तर बस एक कुर्सी पर बैठ जाता है और फिर श्रुति युगान्तर से बातचीत करती है और फिर युगान्तर के हाव भाव देखते हुए वो सवालों का जबाब लिखती है।
घण्टी बजने के बाद उन्ही सवालों का जबाब बिना युगान्तर को बताए कि श्रुति ने क्या लिखा है युगान्तर से पूछे जाते है और युगान्तर उनका जबाब देता है। लेकिन युगान्तर के आश्चर्य का ठिकाना ही नही रहता क्योंकि श्रुति के ज्यादातर जबाब बिल्कुल सही हो जैसे वो युगान्तर के दिमाग को पढ़ पा रही थी।
युगान्तर एक अजीब सी भावना महसूस कर रहा था मानो उसने जादू देखा हो! लेकिन वह बिना कुछ कहे ही वंहा से चलने लगता है।
अरे सुनो! श्रुति ने पीछे से जबाब दिया।
मुझे माफ़ करना मेरी वजह से तुम्हारी क्लास छूट गई! श्रुति ने माफी मांगते हुए कहा।
अरे इसमे माफी मांगने जैसी कोई चीज़ नही है! युगान्तर ने जबाब दिया।
तो क्या तुम अभी फ्री हो? श्रुति ने पूछा।
हाँ! युगान्तर ने जबाब दिया।
तो तुमने मेरी मदद की और मेरे इतने अच्छे मार्क्स आये है इसलिए मेरी तरफ तुम्हे चाय और समोसे! इतना श्रुति युगान्तर का हाँथ पकड़कर केंटीन की तरफ ले जाती है।
जब से युगान्तर अपने दोस्तों के साथ बैठना बन्द किया ही तब से वो अपने घर का ही खाना किसी खाली क्लास में जाकर खाता था लेकिन काफी दिनों बाद वो वापस केंटीन में कुछ खाने आया था। सामने ही आएशा एक लड़के के साथ बैठी थी। युगान्तर के बाद उसकी नजदीकियां इस लड़के के साथ काफी बढ़ने लगी थी। लेकिन युगान्तर को एक लड़की के साथ देखकर मानो आएशा का खून जल गया हो। लेकिन इन बातों से बेखबर श्रुति युगान्तर को केंटीन के अंदर वाली टेबल पर ले जाती है।
वैसे एक बात पुछु? युगान्तर ने चाय पीते हुए श्रुति से पूछा।
हाँ क्यों नही! श्रुति ने चाय पीते हुए हामी भरी।
क्या तुम्हें जादू आता है? क्योंकि तुमने मेरे दिमाग की चीज़ें कैसे जान ली? युगान्तर सोचते हुए पूछता है।
ये सुनकर श्रुति हँस जाती है।
अरे बेबकुफ़ ये कोई जादू नही विज्ञान है। हम किसी भी इंसान के हाव भाव से पता लगा सकते है कि आखिर वो क्या सोच रहा है! श्रुति ने जबाब दिया।
लेकिन ये विज्ञान किस चीज़ में मदद करता है? युगान्तर ने सोचते हुए पूछा।
दरअसल ये विज्ञान हमे मनोवैज्ञानिक बनाता है और इसके जरिये हम मनोवैज्ञानिक रूप से बीमार लोगो का इलाज करते है! श्रुति ने जानकारी दी।
तो इससे हम पागलो का इलाज कर सकते है सही है ना? युगान्तर ने कहा।
हाँ ऐसा कह सकते हो लेकिन ऐसा नही है। दिमागी रूप से थके हुए लोग या अन्य मनोवैज्ञानिक विकार वाले लोग भी होते है। जैसे कि मल्टी पर्सनालिटी विकार इसमे एक इंसान को लगता है कि वो एक शरीर में दो लोग है और ऐसा होता भी है इसमें कुछ लोग अपनी आवाज ओर हाव भाव बदलकर बाते करने लगते है।
अच्छा क्या ऐसी भी कोई बीमारी है जिसमे किसी इंसान को कोई दूसरा व्यक्ति दिखाई देता हो लेकिन वो इस दुनिया मे ना हो मतलब हकीकत रूप से तो बिल्कुल भी नही! युगान्तर ने सोचते हुए पूछा।
बिल्कुल इस बीमारी को हम कहते है –
“स्किजोफ्रीनिया”
यानी कि मनोविदलता जो कि एक ऐसा भृम पैदा करती है जैसे कि आप किसी को देख सकते है।

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