युगान्तर – एक सूरज जो रात को निकलता है पार्ट 1

 अध्याय – 1 कहानी की शुरूआत 

20 फरवरी 2020

दिल्ली, आधुनिक भारत

सुबह का समय, चारो तरफ लोगो की भीड़ और एक होटल जिसका नाम ताज है उसके कमरा नम्बर 34 में एक लड़का, जो कि लम्बा है पतला लेकिन फुर्तीला और आंखों पर गोल चश्मा है जिसका नाम युगान्तर भटाचार्य है वो अपना समान लगाने व्यस्त है। तभी कमरे में एक व्यक्ति प्रवेश करता है।

ये क्या कर रहे हो युगान्तर? उस व्यक्ति ने अजीब नजरो से देखते हुए कहा।

तुम देख सकते हो कि मै यंहा से जा रहा हूँ! युगान्तर ने जबाब दिया।

फिर वही युगान्तर! उस व्यक्ति ने एक कुर्सी पर बैठते हुए कहा।

तुम्हे हो क्या गया है तुम एक लेखक हो ओर दुनिया तुम्हे पसंद करती है। तुम्हे पता है कितने लोगो को ये प्रसिद्धि मिलती है तुम्हे ये मिली है तो इसे यूँही मत गंवाओ युग! उस व्यक्ति ने जोर देते हुए कहा।

मुझे ये सब नही चाहिए! इतना कहकर युगान्तर अपना बैग उठा लेता है।

लेकिन इस अरबो की सम्पति और करोड़ो लोगो का प्यार कोई कैसे छोड़ सकता है? उस व्यक्ति ने कहा।

इस दुनिया मे हर इंसान और कौमो के लिए कोई ना कोई नुकसान मुकद्दर है अक्लमंद वह है जो उसे ख़ुदा का फ़ैसला समझ कर राजी हो जाये! इतना कहकर युगान्तर होटल से बाहर आ जाता है और अपने बैग तांगे एक सड़क पर चलता रहता है।

युगान्तर बस चुपचाप चलता रहता है और एक सोच में डूब जाता है कि वो लेखक कैसे बना? लेकिन अब क्यो वो ये सब छोड़कर जाना चाहता है? 

ये कहानी शुरू होती है जब युगान्तर एक लेखक नही था। बस कॉलेज में पढ़ने वाला एक साधारण लड़का था। 2017 उसके कॉलेज का आखिरी साल था। वैसे तो युगान्तर एक मध्यवर्गीय परिवार से आता था लेकिन वह अपने भविष्य को लेकर बिल्कुल चिंतित नही था।

एक आध्यात्मिक कहानी

कॉलेज में घूमना, दोस्तो के साथ मस्ती, अपनी प्रेमिका आएशा के साथ कैफ़े ओर कैंटीन में जाना और क्लास में बैठना बस उसके यही काम थे। उसकी जिंदगी साधारण लड़के जैसे ही थी। लेकिन एक दिन युगान्तर जिंदगी में बदलाव आया।

20 फरवरी 2017 

दिल्ली, भारत 

सुबह का समय, धूप खिड़की से होते हुए युगान्तर पर पड़ रही थी जो कि अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था। तभी उसे किसी के रोने की आवाज आती है। वो समय देखता है तो समय सुबह के 8 बज चुके थे। वह बिस्तर ने उठकर खड़ा होता है और बाहर आता है तो उसकी माँ रो रही होती है। वह लगातार उनके रोने का कारण पूछता है जो कि खाना बनाते हुए रोये जा रही थी।

क्या हुआ माँ? 

बेटा तेरे पिता! इतना कहकर वो रोने लगती है।

वह कमरे में अपने पिता को देखता है तो लेटे होते है उनकी तबियत कुछ ठीक नही मालूम हो रही थी इसलिए वह अपने बड़े भाई से पूछता है।

तो उसे मालूम होता है कि उसके पिता को ब्लड कैंसर होता है जो कि पहली अवस्था मे थे अगर उनका इलाज समय पर नही हुआ तो वह कुछ ही सालो में मर भी सकते है। 

युगान्तर को समझ ही नही आता है कि ये हो क्या रहा है उसके घर की स्तिथि इतनी अच्छी नही थी कि वो लाखो का इलाज भी करवा पाता इसलिए वह अपनी मां के रोने की वजह समझ जाता है। 

वह जल्दी से अपनी माँ को गले लगा लेता है। 

एक आध्यात्मिक कहानी

माँ आप चिंता मत कीजिये भाई और मै इलाज के पैसे जुटा लेंगे और जल्द ही हम उनका इलाज शुरू करवा देंगे वैसे भी ये मेरे कॉलेज का आखिरी समेस्टर है तो मै आगे जॉब भी करना शुरू कर दूंगा फिलहाल के लिए मै अपने दोस्तो से पैसे मांगूगा! इतना कहकर युगान्तर कॉलेज चला जाता है।

वह अपने सभी दोस्तों से पैसे मांगता है

लेकिन सभी कोई ना कोई बहाना बना देते है जिसकी वजह से वो और चिंता में आ जाता है। 

वह समझ जाता है कि दोस्त सिर्फ आपके उस वर्तमान स्तिथि में आनंद लेने के लिए होते है। ऐसे बहुत कम ही दोस्त होते है जो आपके भविष्य के लिए आपको आर्थिक मदद करे। 

लेकिन कंही ना कंही गलती उसकी भी थी क्योंकि दोस्ती में किसी भी तरह की आशा नही रखनी चाहिए वरना दोस्ती जल्दी टूट सकती है। 

यही सोचता हुआ युगान्तर कॉलेज के कोने में जाकर बैठा होता है जंहा पर उसकी प्रेमिका आएशा आती है।

युगान्तर तुम कंहा थे तब से मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी थी! आएशा ने युगान्तर के बगल में बैठते हुए कहा।

हाँ बोलो ना! युगान्तर ने उदास भरी आवाज में जबाब दिया।

देखो युगान्तर मै मानती हूँ कि तुम बहुत अच्छे लड़के हो और मै तुमसे बेहद प्यार करती हूं लेकिन ठंडे दिमागे से सोचे तो हमारे इस रिश्ते का कोई भविष्य नही है इसलिए इस रिश्ते हो आगे बढ़ाने का कोई फायदा नही होगा! आएशा ने दुखी होते हुए कहा।

युगान्तर एकदम से चोंक्त जाता है। मानो एक गहरी चोट उसके दिमाग और दिल पर पड़ी हो। 

लेकिन ये बात तुम्हे पहले नही पता थी ? फिर क्यो उस समय तुमने मुझे स्वीकार किया था? युगान्तर ने गुस्से में होते हुए कहा।

एक आध्यात्मिक कहानी

क्योंकि मै तुम्हे प्यार करती थी लेकिन अब कॉलेज खत्म होने वाला है और तुम कैसे मुझसे शादी कर पाओगे? मै एक मुस्लिम हूँ और तुम हिन्दू हो समाज हम दोनों को नही स्वीकार करेगा! आएशा ने रोते हुए कहा।

परिस्थिति ये नही रहेगी मेरा विश्वास करो समय जरूर बदलेगा! युगान्तर की आंखों में आंसू आ जाते है।

अपना ख्याल रखना युगान्तर! इतना कहकर वह चली जाती है।

युगान्तर बस अपने बैग से अपनी डायरी निकालता है और एक पंक्ति लिखता है 

“नमाज के नकाब में नायाब लगती है वो

उसी सच्ची मुसलमां को मै अपनी पूजा में मांगता हूं”

युगान्तर एक सोच में डूब जाता है कि वो कैसे पैसे कमाए और अपने पिता के इलाज के लिए रुपये इक्कठे कर सके। 

युगान्तर पूरे दिन की बेचैनी के साथ घर की तरफ रवाना हो जाता है

घर जाते हुए उसे एक किताबो वाली दुकान दिखाई देती है

तभी उसकी नजर एक मैगजीन पर पड़ती है

तो वह तुरन्त ही उसको खरीद लेता है और उसके पहले कवर की हैडलाइन को पढ़ने लगता है कि एक टीवी सीरियल को डिटेक्टिव स्क्रिप्ट राइटर चाहिए। 

युगान्तर उसी को पढ़ता हुआ वापस घर आ जाता है और छत पर एक कोने में बैठकर सोचने लगता है कि वो इस सीरियल से पैसे कमा सकता है क्योंकि वो लिखने में ही तो अच्छा है लेकिन उसने कभी भी क्राइम से जुड़ी कोई कहानी या स्क्रिप्ट नही लिखी थी। उसे हर हफ्ते एपिसोड भेजने थे जिसके लिए उसे हर एपिसोड के पांच हज़ार रुपये मिलते। ये एक छोटी रकम थी लेकिन युगान्तर को पैसे की काफी जरूरत थी इसलिए वह बिना सोचे लिखने की कोशिश करता है।

एक आध्यात्मिक कहानी

युगान्तर चुपचाप अपने फ़ोन में वर्ड डॉक्यूमेंट खोलकर उसमे अपनी कहानी को शुरू करने के लिए किरदार लिखने की कोशिश करता है क्योंकि कहानी का एक नायक होना बहुत जरूरी है। साथ ही नायक से जुड़े बाकी पात्र भी काफी महत्वपूर्ण होते है। 

हर नायक को लिखने के लिए एक प्रेणास्त्रोत जरूर होना चाहिए और युगान्तर बचपन से ही व्योमकेश बक्शी के सीरियल दूरदर्शन पर देखता आया था इसलिए युगान्तर ये निश्चय करता है कि वह अपना मुख्य किरदार भी किसी बंगाली नाम पर रखेगा।

युगान्तर सोचते हुए छत पर टहलने लगता है तभी उसके दिमाग मे एकदम से एक नाम आता है सुजान चटर्जी।

हाँ ये होगा मेरी कहानी का नायक डिटेक्टिव सुजान चटर्जी! लेकिन युगान्तर एकदम से चुप हो जाता है।

अरे नही लोग इसे फिर व्योमकेश बक्शी की नकल समझेगें! युगान्तर अपने मन मे ये बात सोचते हुए नीचे आ जाता है और टीवी खोलकर क्रिकेट देखने लगता है।

जिसमे करुण नायर जो कि एक भारतीय खिलाड़ी है वो काफी अच्छा प्र्दशन कर रहे थे युगान्तर एकदम से खुश होते हुए कहता है मिल गया मुझे मेरे नायक का नाम डिटेक्टिव करुण नायर। युगान्तर ने खुश होते हुए कहा।

लेकिन मैं अपनी कहानी का नाम क्या रखु? ये सोचते हुए वापस युगान्तर अपने कमरे से बाहर आ जाता है। 

तभी युगान्तर को उसकी मम्मी आवाज देती है।

एक आध्यात्मिक कहानी

बेटा एक पार्ट टाइम जॉब है पास में ही आंखों के डॉक्टर का क्लिनिक है जो कि शाम के समय ही अपना क्लिनिक खोलते है। तेरा सुबह का कॉलेज है तो तू वंहा शाम के समय जॉब क्यो नही करता उन्हें कंपाउंडर चाहिए। मैने उनसे तेरे लिए बात कर ली है अगर तुम राजी हो तो कल से शाम को वंहा जाना शुरू कर सकते हो वो तुम्हे महीने का दो हज़ार रुपये देंगे! माँ ने एक उम्मीद के साथ पूछा।

हाँ मां मै जॉब कर लूंगा और कल से वंहा चला भी जाऊंगा! इतना कहकर युगान्तर वंहा से आ जाता है।

तभी उसकी नजर अपनी एक पुरानी किताब पर नजर पड़ती है जो कि एक ब्रिटिश लेखक की थी एडवेंचर ऑफ शेरलॉक होम्स।

युगान्तर ये नाम सुनकर काफी प्रभावित होता है और एकदम से कहता है। 

मेरी कहानी का भी नाम होगा 

“एडवेंचर ऑफ करुण नायर – रहस्य भरतपुर का” 

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