ये बारिश भी ना – Jitesh soni “Yash “

ये बारिश भी ना

खुद भी रोती है
मुझे भी रुला के जाती है।
ये बारिश भी ना
उसकी याद दिला के जाती है।

सौंधी मिट्टी की तरह
उसकी याद मे महका जाती है
ये बारिश भी ना
उसकी याद दिला के जाती है।

रिमझिम बारिश की फुहार सी
ठंडी ठंडी सुहावनी बयार सी
मेरे होठ उसकी ही नज्म गुनगुनाती है
ये बारिश भी ना
उसकी याद दिला के जाती है।

उसकी वो बारिश देखकर चहक जाना
बारिश की बूँदो को हथेली से थपकाना
वो अक्सर बारिश मे भीग जाती है
ये बारिश भी ना
उसकी याद मे भीगा के जाती है।

खुद भी रोती है
मुझे भी रुला के जाती है
ये बारिश भी ना
उसकी याद दिला के जाती है

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