रक्तबीज कोरोना – शिवांगी मिश्रा

रक्तबीज कोरोना
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माना संकट आन पड़ा ,किस बात का रोना धोना है ।
रखो सावधानी खुद में,बस धैर्य हमें ना खोना है ।।

भय से जूझ रहा है मानव
विपदा भारी आन पडी है ।
गली हाट सूनसान पड़े सब
सिर पर मृत्यु आन खड़ी है ।।
इक दूजे से होती सबको, *सम रक्तबीज कोरोना है ।।*
माना संकट आन पड़ा ,किस बात का रोना धोना है ।
रखो सावधानी खुद में,बस धैर्य हमें ना खोना है ।।

नियम उल्लंघन कर के तुम
मत कर्तव्यों का हनन करो ।
अपने क्रुर व्यहार से तुम मत
प्रकृति जीवन का पतन करो ।।
कुछ क्षण तुम सो लो घर में,यदि काल के वश ना सोना है ।।
माना संकट आन पड़ा ,किस बात का रोना धोना है ।
रखो सावधानी खुद में,बस धैर्य हमें ना खोना है ।।

यह संकट अपनों पर है
और अपने देश पे छाया है ।
सम्पूर्ण विश्व कोहराम मचा कर
विदेशी काल यह आया है ।।
एकजुट हो कुछ कष्ट सहनकर,
चिरकाल सुकूँ पल होना है ।।

माना संकट आन पड़ा ,किस बात का रोना धोना है ।
रखो सावधानी खुद में,बस धैर्य हमें ना खोना है ।।

स्वरचित….
शिवांगी मिश्रा
लखीमपुर खीरी

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