राधा – कृष्णा | Sonika tanwar ‘svra’

राधा – कृष्णा

बड़ी भोली मेरी राधा…
मेरी लीला को पढ़ती हैं।
जरा तू देख इन आंखों में
तेरी ही तस्वीर बस्ती हैं।। (श्री कृष्ण )

मेरे प्रेम को तुम
थोड़ा – सा सम्मान दे देना।
हैं राधा तो बस तेरी
ये दुनिया को कह देना ।। (राधा रानी )

तेरे प्रेम को टीका समझकर
माथे पर सजाया हैं ।
हैं तेरी ही वो सुरत
जिसे मन में बसाया हैं।।(श्री कृष्ण )

तेरी मुरली की धुन में
मैं बस खो ही जाती हूं।
हो सीमा फिर कोई भी
मैं उसे लांघ ही जाती हूं।।(राधा रानी )

तेरे प्रेम को
अपना जीवन बनाया हैं।
मैं तुझसे, तू मुझसे
यही तो गीत सुनाया है।।(श्री कृष्ण )

पीड़ा हुई हैं
तुम जो यू चले गए मोहन।
ढूंढ़े तुम्हे हैं राधा
कहा तुम खो गए मोहन।।(राधा रानी )

मेरे हृदय में बस
तेरी ही छाया हैं।
हैं दूरियां ,फिर भी
हरदम तुझको ही पाया हैं।।(श्री कृष्ण )

तेरी इन दूरियों से
आंखो में दरिया उमड़ता हैं।
हैं कोमल मेरा हृदय
जो हर दिन ही जलता हैं।।(राधा रानी )

कितनी सच्ची मेरी राधा
जो पावन सी बहती हैं।
हां मेरे प्रेम को ,
बड़े ही प्रेम से बांधे रखती हैं।।(श्री कृष्ण )

स्वरचित
सोनिका तंवर ‘ स्वरा ‘ ( हिसार, हरियाणा )

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