“राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्री-प्राइमरी से मिडिल स्टेज का विश्लेषण” (by-Purab Nirmey)

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्री-प्राइमरी से मिडिल स्टेज का विश्लेषण” (by-Purab Nirmey)

प्राचीन सनातन भारतीय ज्ञान और नवोन्मेषिता की समृद्ध परंपरा में ज्ञान, प्रज्ञा और सत्य की खोज को भारतीय परंपरा और दर्शन में सदा सवोच्च मानवीय लक्ष्य माना जाता था। इस आलोक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक महत्वपूर्ण कदम है। जिसका लक्ष्य 2040 तक भारत के लिये एक ऐसी शिक्षा प्रणाली देना है जो किसी से पीछे न हो एवं जहां सभी सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले शिक्षार्थियों को समान रूप से सर्वोच्च गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध हो।
यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इक्कीसवीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है जिसका लक्ष्य देश की अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये एक समुचित आधार प्रदान करना हैI यह नीति भारत की परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को बरक़रार रखते हए, 21वीं सदी की शिक्षा के आकांक्षात्मक लक्ष्यों, जिसमें एसडीजी-4 शामिल है, के संयोजन में शिक्षा व्यवस्था,नियमन और गवर्नेंस सहित, सभी पक्षों में सुधार और पुनर्गठन का प्रस्ताव रखती है। शैक्षिक प्रणाली का उद्देश्य अच्छे उत्पादक इंसानों का विकास करना है – जो तर्कसंगत निर्णयों के माध्यम से संविधान द्वारा परिकल्पित – समावेशी, और बहुलतावादी समाज के निर्माण में बेहतर तरीके से योगदान करें।
यह नीति वर्तमान की 10 + 2 व्यवस्था को 3 से 18 वर्ष के सभी बच्चों के शिए पाठ्यचर्या और
शिक्षण-शास्त्रीय आधार पर 5 + 3 + 3 + 4 की एक नयी व्यवस्था में पुनगर्ठित करने की बात करती है।
बच्चों के मस्तिष्क का 85 % विकास 6 वर्ष की अवस्था से पूर्व ही हो जाता है। इसको ध्यान में रखते हुये आरंभिक 6 वर्ष महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
वर्तमान समय में ECC की सभी तक पहुँच नहीं होने के कारण बच्चों का एक बड़ा हिस्सा प्रथम
कक्षा में प्रवेश पाने के कुछ ही हफ्तों बाद अपने सहपाठियों से पिछड जाता है। इसलिए कक्षा -1 के बच्चों के लिये अल्पकालीन 3 महीने का प्ले-ग्रुप आधारित स्कूली तैयारी मॉड्यूल बनाया जाएगा जिसमें गतिविधियाँ और वर्कबुक होगी जिनमें अक्षर, ध्वनियों, शब्द, रंग,
आकार, संख्या आदि शामिल कर सहयोग को बढावा दिया जायेगा।
DIKSHA पर बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान पर
उच्चतर-गुणवत्ता एवं संसाधनों का एक राष्ट्रीय भंडार उपलब्ध कराया जाएगा ।
छठी से आठवीं का GER 90.9 % है यानी 5वीं के बाद के शैक्षणिक ठहराव को भी पूर्ण करने का प्रयास किया जायेगा ।कुल मिलाकर दो पहलें की जायेगीं जिससे बच्चों का विद्यालय में वापसी सुनिश्चित की जा सके और आगे के बच्चों को ड्रॉपआउट होने से रोका जा सके।
यह सर्वविदित है कि एक से ज्यादा भाषाओं के जानकार बच्चे बहुआयामी होते हैं ,इसके अंतर्गत 5 वीं तक मातृभाषा में शिक्षा दी जाये एवं जहाँ तक संभव हो इसे 8वीं तक जारी रखा जाये । फाउंडेशनल स्टेज में आंगनवाडी/प्री-स्कूल के 3 साल+प्राथमिक
स्कूल में कक्षा 1-2 में 2 साल, 3 से 8 वर्ष के बच्चों , प्रिपरेटरी स्टेज (कक्षा 3-5, 8 से 11 वर्ष के बच्चों एवं
मिडिल स्कूल स्टेज कक्षा 6-8, 11 से 14 वर्ष के बच्चो के समुचित विकास पर जोर दिया जायेगा ।बच्चे 2से 8 वर्ष की आयु के बीच बहुत जल्दी भाषा सीखते हैं इस कारण मातृभाषा पर विशेष जोर के साथ बहुभाषिक एक्सपोजर दिये जायेगें।भारतीय साइन लैंग्वेज को देश भर में मानकीकृत किया जाएगा । ग्रेड 6 से 8 तक के विद्यार्थी NCFSE द्वारा तैयार अभ्यास-आधारित पाठ्यक्रम के अंतर्गत कक्षा पढने के दौरान एक दस दिन के
बस्ता-रहित पीरियड में भाग लेंगे जिसमें वे स्थानीय व्यवसायिक विशेषज्ञों से कौशल विकास तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगें । विद्यार्थियों को कम उम्र में तार्किक ,सहिष्णु, समानुभूतिपूर्ण बनाने पर जोर दिया जायेगा इसके लिये उन्हें नैतिक ढाँचों को विश्लेषित करने की योग्यता प्रदान की जायेगी ।रटकर सीखने की बजाय उनमें रचनावादी दृष्टिकोण को बढावा दिया जायेगा ।RPWD ACT- 2016 के अनुसार दिव्यांगता वाले बच्चों के पास नियमित या विशेष स्कूली शिक्षा का विकल्प होगा ।
स्कूली शिक्षा में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम हैं। यह नीति सभी अल्पसंख्यक समुदायों तक शिक्षा की पहुंच को सुनिश्चित करेगी । बस्ते व किताबों का बोझ कम कर वर्टिकल मॉडलों द्वारा सीखने व अनुभव की तकनीकि पर बल दिया जायेगा । NEP के अनुसार, 2030 तक SDG4 4 से जुडी ECCE से माध्यमिक शिक्षा तक सार्वभौमिकता होगी। 2025 तक नेशनल मिशन के माध्यम से फाउंडेशनल लर्निंग और न्यूमेरसी कौशल प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।NEP के अनुसार, 2030 तक प्री-स्कूल से माध्यमिक स्तर तक 100% GEW होगी। 2023 तक, शिक्षकों को मूल्यांकन सुधारों के लिए तैयार किया जाएगा। समावेशी और समान शिक्षा प्रणाली के प्रावधान के लिए 2023 तक का लक्ष्य रखा गया है।बोर्ड परीक्षा में रट्टा लगाने के बजाय बच्चे के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, इसलिए मुख्य अवधारणाओं और ज्ञान के अनुप्रयोग का टेस्ट होगा। यह लक्ष्य रखा गया हैं कि हर बच्चे को अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के साथ एक कौशल प्राप्त हो। सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में सीखने के एक मानक होंगे और शुल्क भी एक समान बनाया जाएगा।
किसी छात्र के रिपोर्ट कार्ड में छात्रों के अकादमिक मार्क्स के स्थान पर छात्र की कौशल और क्षमताओं का व्यापक रिपोर्ट होगा। राष्ट्रीय मिशन का उद्देश्य बुनियादी साक्षरता और न्युमेरेसी पर ध्यान केंद्रित करना है।
पाठ्यक्रम के शैक्षणिक संरचना में बड़े बदलाव के बजाय संकाय में बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं।व्यावसायिक तथा शैक्षणिक और पाठ्यक्रम सम्बन्धी तथा पाठ्येतर के बीच के सभी तरह की बाधाओं को भी दूर किया जाएगा। शिक्षकों और वयस्कों के लिए नया National Curriculum framework होगा। बोर्ड परीक्षा नॉलेज एप्लीकेशन पर आधारित होगी।लर्निंग की प्रगति को ट्रैक करने के लिए छात्र की प्रगति को समय-समय पर ट्रैक किया जाएगा। PARAKH नाम का एक राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र स्थापित होगा।नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, HEI में प्रवेश के लिए एक प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा। शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक होगा। 21 वीं शताब्दी के कौशल, गणितीय सोच और वैज्ञानिक स्वभाव को एकीकृत करने के लिए पाठ्यक्रम को इसके अनुरूप बनाया जाएगा। मेधावी बच्चों को वर्तमान स्कूल शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ा जाएगा।पाठ्यक्रम को केवल मूल अवधारणाओं तक सीमित किया जाएगा। विद्यार्थी कक्षा-3, 5 और 8 के स्तर पर स्कूली परीक्षाओं में भाग लेंगे जिन्हें शैक्षिक प्राधिकरणों द्वारा संचालित किया जाएगा। इस नीति में प्रस्तावित सुधारों के अनुसार, कला और विज्ञान, व्यावसायिक तथा शैक्षणिक विषयों एवं पाठ्यक्रम व पाठ्येतर गतिविधियों के बीच बहुत अधिक अंतर नहीं होगा। कक्षा-6 से ही शैक्षिक पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा को शामिल कर दिया जाएगा और इसमें इंटर्नशिप की व्यवस्था भी दी जाएगी।राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा स्कूली शिक्षा के लिये राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा’ के तहत NEP-2020 में छात्रों के सीखने की प्रगति की बेहतर जानकारी हेतु नियमित और रचनात्मक आकलन प्रणाली को अपनाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही इसमें विश्लेषण तथा तार्किक क्षमता एवं सैद्धांतिक स्पष्टता के आकलन को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है।
कुल मिलाकर यह नीति भारत के ज्ञान में आधुनिक भारत और उसकी सफलताओं और चुनौतियों के प्रति प्राचीन भारत का ज्ञान और उसका योगदान शामिल करेगी। और शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, आदि के संबंध में भारत की भविष्य की आकांक्षाओं की स्पष्ट भावना के समावेशन द्वारा एक समृद्ध भारत का ठोस आधार प्रदान करने के प्रयास में अभूतपूर्व योगदान देने का प्रयास करेगी ।

@”निर्मेय”

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