शून्य – एक अद्भुत रहस्य पार्ट 14 Copyright by Sikho

रात का घना अंधेरा और उपर से चूभती हूई कडाके की ठंड.

ऐसे वातावरण मे बहुत सारे प्रेमी युगल रस्ते से दिख रहे थे.

अँजेनी हॉटेल के सिढीयों पर असमंजस सी इधर उधर देखती हूई खडी रही.

जॉन की गाडी तेजी से दौडने लगी थी. थोडी ही देर में जिस गाडी के पिछे के कांच पर खुन से शुन्य निकाली हूई तस्वीर लगी थी वह गाडी उसे दिखाई देने लगी आखीर में लंगडते हूए वह गाडी से बाहर आया और सामने की गाडी उसकी पहूंच से निकलती देखकर चिढकर गुस्से से उसने अपनी कसी हूई मुट्ठी अपने गाडीपर जोर से दे मारी.

इधर अँजेनी जॉन की राह देख देखकर थक गई थी.

ड्रायव्हर ने गाडी स्लो कर एक बार अँजेनी और फिर जॉन की तरफ देखा.

अँजेनी ने ‘ठीक है … वह जहा कहता है उधर ही लो’ ऐसा ड्रायव्हर को इशारे से ही कहा.

अँजेनी जॉन को सहारा देते हूए उसके क्वार्टर की तरफ ले जाने लगी.

उसने हंसते हुए उसे फिर से अपने बाहों मे भर लिया.

वह भी हंसने लगी. और फिर दोनो कब अपने प्रेममिश्रीत प्रणय में लीन हुए उन्हे पता ही नही चला.

कमांड1 काम्प्यूटर पर कुछ तो कर रहा था.

कमांड2 उसके बगल में हाथ में व्हिस्की का ग्लास लेकर शान से बैठा था.

कमांड2 ने भी अपने बगल में रखा व्हिस्की का ग्लास उठाया

और वह कमांड1 के सामने बैठ गया.

कमांड1 ने गटागट व्हिस्की के घुंट के साथ अपना अपमान पिने की कोशीश की.

कमांड2 ने जाना की यही सही वक्त है…कमांड1 झमता हूवा बेडरूम की तरफ जाने लगा.

कमांड2 कमांड1 क्या बताता है यह सुनने के लिए बेताब हो गया था.

वह उसकी राह देखते हूए कॉम्पूटर के पास बेसब्री से चहलकदमी करने लगा.

शून्य एक अद्भुत रहस्य

जिधर कमांड1 सोया था उस बेडरुम की तरफ एकबार देखकर उसने तसल्ली की और फिर बिनधास्त वह मेल पढने लगा.

कभी उसकी आंखो मे आश्चर्य दिखता तो कभी चेहरे पर मुस्कुराहट.

वह मेल और उसकी अटॅचमेंट्स पूरी तरह पढने के बाद कमांड2 कॉम्प्यूटर से उठ गया.

आखीर उसने फैसला किया की इस बार वह कमांड1 के साथ नही जाएगा.

कुछ बहाना बनाकर वह कमांड1को अकेला जाने के लिए विवश करने वाला था.

शून्य एक अद्भुत रहस्य

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *