समय की पहिया – कुमार विशाल

समय की पहिया चल रहा है ,
गिरगिट से ज्यादा आज, इंसान रंग बदल रहा है ।

भूल गया वो उसको जिसके साथ वो हरपल रहा है,
दुसरो को आगे बढ़ता देख , एक दूजे से ही जल रहा है।
समय की पहिया चल रहा है ,
गिरगिट से ज्यादा आज, इंसान रंग बदल रहा है ।

याद करो उन बातों को , क्यों भूल गए उन रातों को
बहुत सताती है याद करो , बीते उन मुलाकातों को
दिल के किसी कोने में यादों की दीपक जल रहा हैं।
समय की पहिया चल रहा है ,
गिरगिट से ज्यादा आज, इंसान रंग बदल रहा है ।

बड़ी कठिन ये डगर है , जिसमें जिंदगी की सफर है ,
करलो अच्छे काम कुछ , कर्म ही जग में अमर है ।
सच के सामने देखो कैसे झूठ अब उछल रहा है।
समय की पहिया चल रहा है ,
गिरगिट से ज्यादा आज, इंसान रंग बदल रहा है ।

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