सुंदरता – शाहाना परवीन

लघु कथा:- सुंदरता
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शीना स्कूल में नवीं कक्षा में पढ़ती थी। पढ़ाई मे अधिक रूचि नहीं थी। अधिकतर मैकअप की ओर ही ध्यान रहता था उसका।
शीना देखने में बहुत सुंदर थी। उसे अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड था। कक्षा में उसकी सहेलियाँ उसे बहुत समझाती कि सुंदरता से अधिक शिक्षा की ओर ध्यान दो। जीवन में सफलता प्राप्त करना आवश्यक है। पर वह कहती जो सुंदर है वही सबसे श्रेष्ठ है। उसकी कक्षा में एक नई लड़की का दाखिला हुआ। नाम था मीना । मीना देखने में सांवले रंग की थी। उसके पैर में भी पोलियो था जिस कारण वह थोड़ा लंगड़ाकर चलती थी। शीना तो उसकी तरफ देखने तक में अपना अपमान समझती थी। मीना पढाई में बहुत अच्छी थी। परन्तु सुंदर ना होने के कारण कोई उससे मित्रता नहीं करता था। कक्षा अध्यापिका ने शीना और उसकी सहेलियों को कई बार समझाया कि मीना से बात किया करो, पर किसी ने नहीं सुना। मीना अधिकतर अपना समय पुस्तकालय में व्यतीत करती थी। कैसे एक वर्ष बीत गया पता ही नहीं चला। सब विधार्थी दसवीं कक्षा मे पहुचँ चुके थे। अब सबने पढाई मे जी जान से परिश्रम करना आरंभ कर दिया। शीना को घमंड होने के कारण यही लगता था कि वह स्कूल मे शुरू ही से सबसे प्रसिद्ध रही है और आगे भी वह ही रहेगी।
शीना तो पढ़ाई को सुंदरता के आगे कुछ समझती ही नहीं थी। शीना अधिक मन से पढ़ाई नहीं करती थी। मीना ने दिन रात एक कर दिया। दसवीं का वार्षिक परीक्षा का परिणाम आया । मीना ने पूरे स्कूल को टॉप किया था। स्कूल में मीडिया वाले आए। मीना की फोटो समाचार पत्र मे प्रकाशित हुई। जो मीना को नहीं भी जानता था वह भी मीना को जान गया। मीना को सम्मान पत्र, स्वर्ण पदक व स्कालरशिप प्रदान की गई।
आज सब यही कह रहे थे कि बेटी हो तो मीना जैसी। शीना हमेशा की तरह इस बार भी साधारण नंबरो से ही उत्तीर्ण हुई थी। सारी सहेलियों ने शीना का साथ छोड़ दिया था और सब मीना की सहेलियाँ बन गई थीं।
अब शीना को बहुत पछतावा हुआ और उसे लगने लगा कि वास्तविक सुंदरता हमारा रंग रुप नहीं बल्कि यह शिक्षा है जो हमारे पूरे जीवन को बदलकर रख देती है। जैसे मीना को साधारण लड़की से ख़ास लड़की बना दिया।

धन्यवाद
शाहाना परवीन…✍️
पटियाला पंजाब

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