सुनो मुझे ऐ भारत वालों – Purab “निर्मेय”

सुनो मुझे ऐ भारत वालों मैं भारत की वाणी हूँ ,
मैं ही अंगद का अडिग पाँव ,मैं ही बाबा बर्फानी हूँ ।।

कोई कट्टर मुझको काट रहा ,तुम देख रहे मैं चीख रहा
अरे ! फेसबुकिया विद्वानों ,सोया चिंतन दीख रहा ।
कोई मुझे मिटा दे ,उस मिट्टी या चीनी की क्या हस्ती है
मैं “रघु” के “सारंग” से निकली ,इक टंकार पुरानी हूँ ।।
सुनो मुझे…..

कालपटल पर “युवा” रहा हूँ ,धैर्य-त्याग की कथा रहा हूँ
सहनशक्ति मुझमें अथाह ,मैं हर दुश्मन की चिता रहा हूँ
गोरों को समझा दी जिसने ,जीवित शौर्य की हर गाथा
आँख मिलाकर लड़ने वाले, उस “टीपू” की कहानी हूँ ।।
सुनो मुझे…..

मैं हर दर्शन का चिंतन भी ,मैं ही वो मीठा कीर्तन भी
ज्ञान-सृष्टि चैतन्य भी हूँ ,हर नई शिखा और परब्रम्ह भी
एक योगी का ध्यान हूँ मैं , सरदारी में कृपाण मैं ही
विश्व समाता है जिसमें , मैं उस बंशी की रवानी हूँ ।।
सुनो मुझे….

मैं पालक हूँ ,मैं सर्जक हूँ _है पता मुझे मैं क्या-क्या हूँ
एक विश्लेषण मैं हूँ पूरा ,मैं हर व्याख्या की रानी हूँ ।।।।।
सुनो मुझे …….
@”निर्मेय” (by- Purab”निर्मेय”)

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