सेलम विच ट्रायल BY INDIAN PAPER INK

यह बात विश्व प्रसिद्ध है कि भारत के कुछ हिस्सों में अंधविश्वास का प्रचलन रहा है,

मगर शायद आप नहीं जानते होंगे कि भारत की ही तरह पश्चिमी देशों में भी इसका अच्छा खासा प्रभाव रहा है.

इस अंधविश्वास ने समाज को इस कदर प्रभावित किया कि इसकी वजह से बहुत से लोगों को भयंकर यातनाएं सहनी पड़ी.

यह लेख इंग्लैंड के मैसाचुसेट्स के अधीन आते गांव सेलम का है.

कहते हैं कि सालों पहले यहाँ अंधविश्वास के चलते एक ऐसी घटना घटी,

जिसके बारे में सुनकर आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं!

इंग्लैंड में रहने वाले क्रिश्चन भी सदियों से शैतान, देवता, भूत इत्यादि में यकीन रखते आ रहे हैं.

कहते हैं ‘विच ट्रायल’ के नाम से जानी जाने वाली इस घटना का आरंभ भी इसी वजह से हुआ था.

गांव के नेता सैम्युअल पैरिस की 9 साल की बेटी एलिजाबेथ और 11 साल की भतीजी ऐबीगेल ने अचानक अजीबो-गरीब हरकतें करनी शुरु कर दी.

माना जाता है कि वह दोनों लगातार अलग-अलग आवाजें निकाल रही थीं और अजीब सी मुद्राओं में अपने शरीर को घुमा रही थीं.

लड़कियों ने बताया कि उन्हें ऐसा लग रहा है कि जैसे उन्हें कोई मार रहा है!

कुछ समय बाद गांव की अन्य लड़कियों को भी इसी तरह की परेशानियां शुरु हो गई.

जिसके चलते गांव में अंधविश्वास फैल गया कि सभी लड़कियों पर शैतान का साया पड़ गया है.

इस मामले से जुड़ी जांच की जिम्मेदारी मैजीस्ट्रेट जोनाथन कॉरविन और जॉन हैथ्रोन को सौंपी गई.

इसके साथ ही उन्होंने अपनी तफ्तीश शुरू की.

जोनाथन और हैथ्रोन ने तफ्तीश पूरी करने के बाद गाँव की तीन महिलाओं का नाम बताया.

कहते हैं उनके मुताबिक वह तीनों महिलाएं शैतान की दूत थीं,

जिन्हें अन्य महिलाओं व लड़कियों को यातनाएं देने का कार्य सौंपा गया था.

salem witch trials in hindi

तीनों महिलाएं निचले तबके की थीं. टिटूबा एक कैरेबियन गुलाम थी,

साराह गुड एक भिखारन और साराह ओसर्बोन एक बुजुर्ग गरीब महिला थी.

इन तीनों को पकड़ कर कई दिनों तक अलग-अलग तरह से प्रताड़ित किया गया.

फिर इन पर मुकदमा चलाने के लिए 1 मार्च को एक खास अदालत संयोजित की गई,

जहां इन पर चुड़ैल होने का इल्ज़ाम लगाया गया.

गुड और ओसर्बोन ने खुद पर लगे सभी आरोपों को गलत बताया जबकि टिटूबा ने खुद को बचाने के लिए सभी आरोप कबूल कर लिए और अदालत की मुखबिर बन गई.

टिटूबा ने कबूल किया कि उन्हें शैतान द्वारा चयनित किया गया,

ताकि वह सभी महिलाओं को चुड़ैल बना दें. इसके चलते तीनों को जेल में बंद कर दिया गया.

खुद को बचाने के लिए टिटूबा ने गांव की कई लड़कियों व महिलाओं पर चुड़ैल होने का इल्ज़ाम लगा दिया जिस वजह से बहुत से लोगों को बेवजह पकड़ा गया.

इस केस के बाद अगले कई महीनों तक चुड़ैल ढूँढने का अभियान चला…

जिसके तहत सेलम गांव के चर्च की सबसे वफादार सदस्य मार्था कॉरे पर शैतान का साथ देने का इल्ज़ाम लगाया गया.

सामाजिक संगठनों द्वारा यह दावा किया गया कि अगर मार्था चुड़ैल हो सकती है,

तो कोई भी हो सकता है.

अंधविश्वास लोगों के दिलों में इस कदर घर कर चुका था कि वह लोग अपने घर के लोगों तो क्या,

अपने पालतू जानवरों तक को शक की नज़रों से देखने लग गए थे.

इन परिस्थितियों को देखते हुए गवर्नर ने अक्टूबर माह में स्पेशल कोर्ट को भंग कर दिया और जेल में सजा काट रहे सभी लोगों के खिलाफ पेश किए गए सबूतों की दोबारा से जांच शुरु करवाई.

1693 में गवर्नर के आदेशों पर जेल में बंद सभी कैदियों के छोड़ दिया गया.

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आखिरकार, 1697 में मैसाचुसेट्स की जनरल कोर्ट ने सेलम में हुए इस घटनाक्रम को एक त्रासदी बताया.

उन्होंने कहा कि सेलम में किया गया ‘विच ट्रायल’ पूरी तरह से गैरकानूनी कार्य था.

कहते हैं कि फांसी की सजा सुनाने वाले न्यायाधीश को भी आगे चलकर सजा का सामना करना पड़ा.

उन्होंने खुद अपने जुर्म कबूले!

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