हमे गवारा नहीं – Ayush awasthi

अब ये सितम हमे गवारा नहीं
चाँद सूरज पर निर्भर रहे
हमे गवारा नही
जब जरूरत थी तुम्हारी
तब तुम मेरे पास नही थी
अब सारी कायनात लायी हो
हमे गवारा नही
जुबा खामोश ही करनी थी मेरी
तो दीदार करा देती अपना
अब चाहती हो हम खामोश हो जाये
हमे गवारा नहीं
तेरे कंधे पर सर रख कर रोने का
बात करने का ख्वाब अधूरा रह गया
अब चाहती हो हम अधूरे रह जाये
हमे गवारा नहीं
तेरे गम मे लफ़्जो को
कागज पर उतार दिया
अब आयी हो पास
माफ़ी पर ये शायर अब तुम्हारा नहीं

आयुष अवस्थी

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