हादसे तो बेसबब ही नाम से बदनाम हैं – शशि यादव

हादसे तो बेसबब ही नाम से बदनाम हैं।
सच कहें तो हादसों का हादसा इंसान है।।

आदमी को आदमी का वहम खाये जा रहा।
जो बादलों के पार से फेंका हुआ श्मशान है।।

बदचलन तो पायल भी, कुछ कम नहीं हैं पाँव के।
फ़िर तोहमतें बाज़ार की, क्यूँ घुँघरुओं के नाम हैं।।

कुछ यूँ दलीलें दी गयीं, कि आईने कमज़ोर थे।
पत्थरों को क्या पता, शीशे में कितनी जान है।।

आँसुओं से लिख रहे हैं, बेबसी की दास्ताँ।
दर्द की तस्वीर बनाना कहाँ आसान है।।

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