Hayagriva – God of Knowledge

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Hayagriva – God of Knowledge

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WRITER – AUTHOR PAWAN SIKARWAR

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Description

WRITER – AUTHOR PAWAN SIKARWAR

सुबह का समय, चारो तरफ पक्षियों की चहचाहट फैली हुई है

एक तरफ पहाड़ो की ऊँची शृंखला थी जंहा पर एक विशाल जलप्राप्त नीचे की तरफ गिर था

चारो तरफ सेब और अन्य वृक्ष लगे हुए थे ऊपर आसमान में घने बादल मंडरा रहे थे

उन्ही पहाड़ो और सुंदर जगह के बीचो बीच एक विशाल किला स्थापित था.

वंहा चारो तरफ सैनिक तैनात थे और महल के अंदर दास दासिया घूम रही थी.

किले के कमरे में एक व्यक्ति जिसकी उम्र तकरीबन पचीस की लगती थी बिस्तर पर लेते हुआ था उसके बाल सफेद थे और कान किसी खरगोश की तरह लम्बे थे और खड़े थे

यही नहीं उसकी आंखे भूरी रंग की थी और शरीर एक फौलादी योद्धा जैसा था. धीरे धीरे उसकी आंखे खुलती है

तो वह एक कमरे में अपने आप को पाकर एकदम से चौंक जाता है मानो उसे समझ नहीं आ रहा था की वह कँहा पर है और वह यंहा कैसे पहुंचा?

यही सवालो की बेचैनी मन में लिए वह कमरे से बाहर जाता है और चारो तरफ अजीब नजरो से देखता है तो सामने से सूरज की रौशनी उसपर पड़ रही है.

GOD OF KNOWLEDGE

वह भागकर बाहर की तरफ देखता तो उसका किला एक छोटे से पर्वत पर था जंहा से नीचे की तरफ देखता है

तो नीचे की तरफ बादल थे मानो वह पहाड़ बादलो के ऊपर हो.

वह जैसे ही पीछे मुड़ता है तो दो दासिया उसे देखकर तुरंत ही सिर झुका लेती है मानो वह कोई राजा हो.

वह कुछ भी समझ नहीं पाता इसलिए आगे बढ़ जाता है तो सामने सैनिक थे जो उसे देखकर घुटनो पर झुक कर उसको सलाम करते है

ये देखकर वह तुरंत ही भाग खड़ा होता है और भागते भागते वह एक बढे से हॉल में पहुँच जाता है जंहा पर ऊंचाई पर एक सिंहासन रखा हुआ था वह धीरे धीरे चलते हुए अंदर जाता है तो उसे अपने दांयी तरफ देखता है तो वह एकदम से चौंक जाता है. 

 

मेरे बाल सफ़ेद कैसे हो गए? और मेरे कान कैसे बढे हो गए? वह अपने आप से सवाल कर रहा था तभी उसे एक दीवार पर कुछ लिखा हुआ था. वह उसे हलके और धीरे स्वर में पढ़ने लगता है. 

 

“ज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिं

आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवं उपास्महे”

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